मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर 1 नवंबर को शाजापुर में कार्यक्रम हुआ। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर हो गया है। परमार ने बताया कि 2003 के आंकड़ों के मुताबिक, अंग्रेजों, नवाबों और कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में मध्यप्रदेश में साढ़े सात लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई होती थी। नर्मदा पाइपलाइन का पानी शाजापुर और आसपास के जिलों तक पहुंचने के बाद यह रकबा 70 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का लक्ष्य 2030 तक प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करना है। उन्होंने कहा कि सिंचाई का रकबा बढ़ने से किसानों को फायदा होगा और कृषि उत्पादन बढ़ेगा। परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ रहा है और कई कंपनियां यहां उद्योग लगाने के लिए आगे आ रही हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इस साल अपेक्षाकृत कम बारिश हुई कम बारिश के कारण शाजापुर को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इस बारे में पूछे जाने पर परमार ने कहा कि जिले में इस साल अपेक्षाकृत कम बारिश हुई। सूखाग्रस्त घोषित करने के तय मापदंडों के अनुसार सरकार आगे की व्यवस्था करेगी। किसानों को राहत देने पर भी नियमों और प्रावधानों के तहत फैसला लिया जाएगा। स्थापना दिवस के कार्यक्रम में मंत्री ने सिंचाई के रकबे में बढ़ोतरी, औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसरों का जिक्र किया।

