‘चिंता मत करना…सब इंतजाम मैं कर लूंगा’:आदि कैलाश से इंदौर लौटे तो साथ था शव, इसी महीने था तिलक का जन्मदिन; दोस्तों ने सुनाईं यादें

‘चिंता मत करना…सब इंतजाम मैं कर लूंगा’:आदि कैलाश से इंदौर लौटे तो साथ था शव, इसी महीने था तिलक का जन्मदिन; दोस्तों ने सुनाईं यादें

इंदौर के सराफा कारोबारी तिलक शर्मा के लिए आदि कैलाश की यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि दोस्तों के साथ यादगार वक्त बिताने का मौका थी। उसने सात दोस्तों के इस सफर की पूरी प्लानिंग खुद की थी। किसका रजिस्ट्रेशन कराना है, परमिट कैसे लेना है, कहां रुकना है? खाने-पीने और आने-जाने की व्यवस्था कैसे होगी? इन सबकी जिम्मेदारी तिलक ने अपने हाथ में रखी थी। दोस्तों से उसका एक ही कहना था- तुम चिंता मत करना, हम सब साथ चलेंगे। अब वही दोस्त उसकी यादें लेकर इंदौर लौटे हैं। उनके लिए यह सफर जिंदगी का ऐसा अनुभव बन गया, जिसे वे शायद कभी भुला नहीं पाएंगे। शनिवार रात तिलक का शव इंदौर लाया गया और अरविंदो अस्पताल की मरच्युरी में रखवाया गया। रविवार दोपहर 12 बजे रामबाग मुक्तिधाम पर उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान दोस्तों की आंखें नम थीं और बातचीत में बार-बार तिलक का जिक्र आता रहा। जन्मदिन को लेकर था उत्साहित, दोस्तों के साथ ही मनाना चाहता था खुशियां दोस्त निखिल ने बताया कि 25 अक्टूबर को तिलक का जन्मदिन था। वह इसे लेकर काफी उत्साहित था। दोस्तों के साथ यात्रा पर जाने की योजना भी उसी ने बनाई थी। तिलक सभी दोस्तों को बहुत चाहता था। वह चाहता था कि सभी साथ रहें और मिलकर घूमने जाएं। दोस्तों के मुताबिक, तिलक मिलनसार और यारों के लिए हमेशा आगे रहने वाला इंसान था। हर व्यवस्था खुद की, दोस्तों को सिर्फ साथ चलने के लिए कहा प्रतीक ने बताया कि यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन से लेकर परमिट और टूर पैकेज तक की व्यवस्था तिलक ने ही की थी। होटल में रुकने, खाने और आने-जाने की प्लानिंग भी उसी ने संभाली। सात दोस्तों का यह समूह 25 अक्टूबर को इंदौर से आदि कैलाश के लिए रवाना हुआ था। 28 अक्टूबर को आदि कैलाश के दर्शन किए थे। दोस्तों का कहना है कि तिलक के रहते किसी को किसी व्यवस्था की चिंता नहीं करनी पड़ती थी। दोस्त की यादों के साथ लौटा पूरा समूह प्रतीक ने बताया कि तिलक बहुत अच्छा और मिलनसार था। वह दोस्तों को जोड़कर रखने वाला इंसान था। उसकी दीपावली बाद शादी भी होने वाली थी। जिंदगी के इस नए पड़ाव की तैयारियों के बीच वह दोस्तों के साथ यात्रा पर निकला था। दोस्तों के लिए यह बात और भी तकलीफदेह है कि जिस साथी ने पूरे सफर की जिम्मेदारी उठाई, उसी के बिना उन्हें वापस लौटना पड़ा। दोस्तों के मुताबिक तिलक सिर्फ यात्रा की प्लानिंग करने वाला साथी नहीं था, बल्कि वह ऐसा यार था जो सबको साथ लेकर चलता था। अब उसकी यादें और साथ बिताए पल ही दोस्तों के पास रह गए हैं।

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