SEBI चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey बोले, निष्‍क्रिय कंपनियों को शेयर बाजार से बाहर करेगा नियामक

SEBI चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey बोले, निष्‍क्रिय कंपनियों को शेयर बाजार से बाहर करेगा नियामक

कोलकाता, एक नवंबर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने के लिए काम कर रहा है, जो वास्तव में किसी प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि ऐसी कंपनियों की बाजार में मौजूदगी निवेशकों के लिए संभावित खतरा बन सकती है। पांडेय ने कहा कि शेयर बाजार में कई ऐसी कंपनियां सूचीबद्ध हैं, जिनकी कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं है।

इन कंपनियों के शेयरों का इस्तेमाल कुछ बाजार संचालक कीमतों में कृत्रिम तेजी लाने और बाद में शेयर बेचकर मुनाफा कमाने यानी ‘पंप एंड डंप’ गतिविधियों के लिए करते हैं। इससे छोटे और खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए ऐसी कंपनियों को बाजार से हटाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बाजार की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सेबी इस दिशा में प्रयास कर रहा है। सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन समूहों के माध्यम से निवेशकों को ऐसे शेयरों में फंसाए जाने का जोखिम बना रहता है। इससे निपटने के लिए सेबी कृत्रिम मेधा (एआई) तकनीक का इस्तेमाल कर संदिग्ध खातों और गतिविधियों की निगरानी कर रहा है।

निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं। लघु एवं मझोला उद्यम (एसएमई) कंपनियों की सूचीबद्धता व्यवस्था पर पांडेय ने कहा कि नियामक ने इस ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के लिए परामर्श पत्र के माध्यम से कई बदलाव प्रस्तावित किए हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि पुरानी सूचीबद्ध कंपनियों में से कुछ अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के संदर्भ में पांडेय ने कहा कि नियामक आने वाले कुछ सप्ताह में एक और परामर्श पत्र जारी कर सकता है। इसमें खासतौर पर खुलासा संबंधी नियम और एक ही जगह निवेश या जोखिम की सीमा संबंधी प्रस्ताव को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक दुनिया के विभिन्न बाजारों में निवेश करते हैं और उनके निवेश संबंधी फैसले डॉलर के लिहाज से कर-बाद रिटर्न पर निर्भर करते हैं।

कंपनियों की कमाई की संभावनाएं, नए क्षेत्रों का विकास, मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें और वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल भी उनके निवेश निर्णयों को प्रभावित करते हैं। पांडेय के अनुसार, सेबी का प्रयास भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों के लिए पंजीकरण से लेकर निवेश जारी रखने तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और सुगम बनाना है। सेबी के इन प्रयासों का उद्देश्य एक ओर निष्क्रिय और संदिग्ध कंपनियों पर अंकुश लगाना है, वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ भारतीय पूंजी बाजार की पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *