कोडरमा में 56 साल के मिथिलेश ने दी JTET:बोले- नतीजा जल्दी आया तो बचे 4 साल बच्चों को पढ़ाने में लगा सकूंगा

कोडरमा में 56 साल के मिथिलेश ने दी JTET:बोले- नतीजा जल्दी आया तो बचे 4 साल बच्चों को पढ़ाने में लगा सकूंगा

उम्र के 56वें पड़ाव पर भी सरकारी शिक्षक बनने का सपना अधूरा नहीं छोड़ने वाले मिथिलेश कुमार इन दिनों चर्चा में हैं। गिरिडीह जिले के गांवां प्रखंड निवासी मिथिलेश ने कोडरमा के झुमरीतिलैया स्थित सेक्रेड हार्ट स्कूल परीक्षा केंद्र पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) दी। सरकारी सेवा के नियमों के मुताबिक, उनके सेवाकाल के अब चार साल बाकी हैं। वह 90 के दशक से सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं। लंबे प्रयास के बावजूद स्थायी नियुक्ति नहीं मिली। वर्ष 2008 में उन्होंने अपने गांव के पास उत्क्रमित मध्य विद्यालय, राजखारा में पारा शिक्षक के रूप में पढ़ाना शुरू किया। तब से वह लगातार बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। अब करीब 10 साल बाद TET आयोजित हुई, तो उन्होंने एक बार फिर परीक्षा देकर अपना सपना पूरा करने की उम्मीद जताई है। 2016 में कुछ अंकों से चूके, इस बार सफलता का भरोसा मिथिलेश कुमार वर्ष 2016 में भी शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल हुए थे। हालांकि, कुछ अंकों से सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्हें दोबारा परीक्षा का अवसर मिलने के लिए करीब 10 साल इंतजार करना पड़ा। इस बार उन्होंने फिर परीक्षा दी। मिथिलेश ने प्रश्नपत्र के स्तर पर संतोष जताया। उन्हें भरोसा है कि इस बार वह परीक्षा पास कर लेंगे। करीब 18 साल से पारा शिक्षक के रूप में काम कर रहे मिथिलेश के लिए यह परीक्षा स्थायी सरकारी शिक्षक बनने का अवसर है। लंबे समय से बच्चों को पढ़ाने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर प्रयास जारी रखा। उनकी कोशिश उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं या उम्र बढ़ने के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं। बोले- परिणाम जल्द आए, ताकि बच्चों को दे सकूं ज्यादा समय मिथिलेश कुमार ने सरकार से परीक्षा का परिणाम जल्द जारी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नतीजा जल्दी आ गया, तो वह अपने बचे हुए चार साल नियमित सरकारी शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ाने में लगा सकेंगे। उनका उद्देश्य अपने शेष सेवाकाल में अधिक से अधिक समय बच्चों की शिक्षा को देना है। वर्षों की कोशिश के बाद अब उन्हें सफलता की उम्मीद है। उनके लिए यह परीक्षा केवल नियुक्ति पाने का माध्यम नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष को मुकाम तक पहुंचाने का अवसर भी है। 56 साल की उम्र में परीक्षा देने पहुंचे मिथिलेश का संकल्प बताता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, लक्ष्य हासिल करने की कोशिश जारी रखी जा सकती है।

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