नयी दिल्ली, एक नवंबर वाहन कलपुर्जा विनिर्माता कंपनी सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स लिमिटेड (सोना कॉमस्टार) आने वाले वर्षों में अपने सालाना निवेश में बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विवेक विक्रम सिंह ने कहा कि फिलहाल कंपनी हर साल 500-600 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है, लेकिन कारोबार के विस्तार के साथ इसमें और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। सिंह ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि कंपनी अपने तीनों कारोबारी क्षेत्रों में निवेश जारी रखेगी।
यह निवेश मुख्य रूप से अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीकी क्षमताएं विकसित करने और आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं को अपनाने पर केंद्रित होगा। कंपनी का लक्ष्य नए उत्पादों का विकास करना भी है। सिंह के मुताबिक, कंपनी ने सितंबर तिमाही के दौरान तीन नए उत्पादों का व्यावसायीकरण किया है।
इनमें इलेक्ट्रिक वाहन के लिए हेलिकल लिमिटेड स्लिप डिफरेंशियल, रेलवे कोच के लिए एयर स्प्रिंग और दोपहिया वाहन के लिए रियर रडार सेंसर शामिल हैं। कंपनी का सितंबर तिमाही का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 31 प्रतिशत बढ़कर 223 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 170 करोड़ रुपये था। वहीं, परिचालन राजस्व बढ़कर 1,535.84 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 1,138.29 करोड़ रुपये था।
सिंह ने कहा कि फिलहाल कंपनी के कुल कारोबार में भारत की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है। आने वाले वर्षों में अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के बावजूद भारत की हिस्सेदारी 50-55 प्रतिशत के दायरे में रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कंपनी को पहले से मिले ऑर्डर का राजस्व में योगदान शुरू होगा।
अगले साल उत्तरी अमेरिका के बाजार में अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है, जबकि भारत में भी कारोबार की गति बनी रहने की संभावना है। कंपनी ने सितंबर तिमाही के दौरान 3,600 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। सिंह ने कहा कि इन ऑर्डर से राजस्व प्राप्ति अलग-अलग समय पर होगी।
यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित वाहन का विकास किस चरण में है और उसका मॉडल कब बाजार में उतारा जाता है। वैश्विक कंपनियों की ओर से चीन पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की कोशिशों को भारत के लिए बड़ा अवसर बताते हुए सिंह ने कहा कि भारतीय कंपनियां इसका लाभ उठा सकती हैं। हालांकि, इसके लिए घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को डिजाइन और विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमताएं मजबूत करनी होंगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन और तकनीकी दक्षता प्रदर्शित करनी होगी। घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता के स्तर में व्यापक सुधार से भारत को वैश्विक कंपनियों के अधिक ऑर्डर और उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है। कंपनी अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विलय एवं अधिग्रहण के अवसरों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।
सिंह ने कहा कि कंपनी कई संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है, खासकर तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में। इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में कंपनी की मजबूत स्थिति का संकेत देते हुए सिंह ने बताया कि दूसरी तिमाही में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी) से होने वाला राजस्व सालाना आधार पर 129 प्रतिशत बढ़ा। हाइब्रिड वाहनों को छोड़कर, बीईवी कारोबार का योगदान कंपनी के कुल वाहन क्षेत्र के राजस्व में 51 प्रतिशत रहा।
उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता की रफ्तार कंपनी के शुरुआती अनुमान से भी तेज रही है।

