(संस्कृति गौबा)
नयी दिल्ली, एक नवंबर भारत की पहली महिला सीनियर विश्व चैंपियन पहलवान मनीषा भानवाला ने कहा कि एशियाई खेलों में पदक से चूकने की निराशा ने उन्हें विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने के लिए प्रेरित किया। मनीषा ने कजाकिस्तान के अस्ताना में विश्व चैंपियनशिप में महिलाओं के 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली महिला पहलवान हैं।मनीषा और पदक जीतने वाले अन्य भारतीय खिलाड़ियों का शनिवार को यहां पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। मनीषा ने कहा कि एशियाई खेलों की हार निराशाजनक थी लेकिन उनके पास इसके बारे में सोचने के लिए ज्यादा समय नहीं था क्योंकि विश्व चैंपियनशिप केवल 10 दिन बाद होने वाली थी। उन्होंने पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है।यह साल मेरे लिए काफी मुश्किल रहा। इस साल एशियाई खेल थे और मेरे लिए वह बेहद महत्वपूर्ण थे इसलिए मैं थोड़ा परेशान थी। इसके बाद मैं वहां किसी कारणवश पदक नहीं जीत पाई।’’
मनीषा ने कहा, ‘‘एशियाई खेलों में पदक नहीं जीतने से मुझे बहुत निराशा हुई लेकिन मैं विश्व चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध थी।मेरे पास इसके लिए 10 दिन का समय था और मैंने कड़ा अभ्यास किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कहीं न कहीं यह आभास था कि इस बार इतिहास रच सकती हूं और मैंने ऐसा कर दिखाया। भारतीय कुश्ती महासंघ ने भी मेरा समर्थन किया है और आगे भी करता रहेगा।’’
इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने यह भी खुलासा किया कि फाइनल में उनकी प्रतिद्वंदी के आक्रामक रवैये ने आखिर में उन्हें फायदा पहुंचाया। मनीषा ने 0-6 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए अमेरिकी खिलाड़ी अबीगैल नेट को 8-6 से हराया।उन्होंने कहा कि नेट की शुरुआती आक्रामकता ने उन्हें मुकाबले का रुख पलटने का मौका दिया, जिसका उन्होंने फायदा उठाते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की। अपने करियर के दौरान कई भार वर्गों में प्रतिस्पर्धा कर चुकी मनीषा ने कहा कि उन्होंने ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए 57 किलोग्राम वर्ग में हाथ आजमाने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम सीनियर खिलाड़ी बनते हैं तो हमारा अनुभव भी उसी अनुसार बढ़ता जाता है।जूनियर वर्ग में मैं पहले 65 किलो वर्ग में भाग लेती थी। फिर मुझे अहसास हुआ कि मुझे 62 किलो वर्ग में खेलना चाहिए। इसके बाद मुझे लगा कि मैं ओलंपिक में इतिहास रच सकती हूं, इसलिए मैंने 57 किलो वर्ग चुना।’’
इस बीच महिलाओं की 72 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली तनु शर्मा ने कहा कि उनका बचपन का सपना देश का प्रतिनिधित्व करना था।उन्होंने कहा, ‘‘विश्व चैंपियन बनना मेरा सपना है। लेकिन जब मैं छोटी थी, तब मेरा सिर्फ एक ही सपना था, अपनी जर्सी के पीछे ‘इंडिया’ लिखा देखना, देश का प्रतिनिधित्व करना। जब मैं सीनियर खिलाड़ियों को देखती थी, तो सोचती थी कि क्या कभी मैं यहां तक पहुंच पाऊंगी।’’
दूसरी तरफ महिलाओं के 50 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली नीलम सिरोही ने कहा कि वह कड़ी मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल करने में सफल रही।नीलम ने कहा, ‘‘मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं। मैंने इस पदक के लिए पिछले कई वर्षों से कड़ा अभ्यास किया। मैं 2022 से विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही हूं, लेकिन पदक नहीं जीत का रही थी।मेरे माता-पिता, मेरे कोच और मेरे फूफा जी हमेशा मुझसे कहते थे कि मैं विश्व चैंपियन बन सकती हूं और अब मैंने इसे साबित कर दिया है।’’
(संस्कृति गौबा)
नयी दिल्ली, एक नवंबर भारत की पहली महिला सीनियर विश्व चैंपियन पहलवान मनीषा भानवाला ने कहा कि एशियाई खेलों में पदक से चूकने की निराशा ने उन्हें विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने के लिए प्रेरित किया। मनीषा ने कजाकिस्तान के अस्ताना में विश्व चैंपियनशिप में महिलाओं के 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली महिला पहलवान हैं।
मनीषा और पदक जीतने वाले अन्य भारतीय खिलाड़ियों का शनिवार को यहां पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। मनीषा ने कहा कि एशियाई खेलों की हार निराशाजनक थी लेकिन उनके पास इसके बारे में सोचने के लिए ज्यादा समय नहीं था क्योंकि विश्व चैंपियनशिप केवल 10 दिन बाद होने वाली थी। उन्होंने पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है।
यह साल मेरे लिए काफी मुश्किल रहा। इस साल एशियाई खेल थे और मेरे लिए वह बेहद महत्वपूर्ण थे इसलिए मैं थोड़ा परेशान थी। इसके बाद मैं वहां किसी कारणवश पदक नहीं जीत पाई।’’
मनीषा ने कहा, ‘‘एशियाई खेलों में पदक नहीं जीतने से मुझे बहुत निराशा हुई लेकिन मैं विश्व चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध थी।
मेरे पास इसके लिए 10 दिन का समय था और मैंने कड़ा अभ्यास किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कहीं न कहीं यह आभास था कि इस बार इतिहास रच सकती हूं और मैंने ऐसा कर दिखाया। भारतीय कुश्ती महासंघ ने भी मेरा समर्थन किया है और आगे भी करता रहेगा।’’
इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने यह भी खुलासा किया कि फाइनल में उनकी प्रतिद्वंदी के आक्रामक रवैये ने आखिर में उन्हें फायदा पहुंचाया। मनीषा ने 0-6 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए अमेरिकी खिलाड़ी अबीगैल नेट को 8-6 से हराया।
उन्होंने कहा कि नेट की शुरुआती आक्रामकता ने उन्हें मुकाबले का रुख पलटने का मौका दिया, जिसका उन्होंने फायदा उठाते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की। अपने करियर के दौरान कई भार वर्गों में प्रतिस्पर्धा कर चुकी मनीषा ने कहा कि उन्होंने ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए 57 किलोग्राम वर्ग में हाथ आजमाने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम सीनियर खिलाड़ी बनते हैं तो हमारा अनुभव भी उसी अनुसार बढ़ता जाता है।
जूनियर वर्ग में मैं पहले 65 किलो वर्ग में भाग लेती थी। फिर मुझे अहसास हुआ कि मुझे 62 किलो वर्ग में खेलना चाहिए। इसके बाद मुझे लगा कि मैं ओलंपिक में इतिहास रच सकती हूं, इसलिए मैंने 57 किलो वर्ग चुना।’’
इस बीच महिलाओं की 72 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली तनु शर्मा ने कहा कि उनका बचपन का सपना देश का प्रतिनिधित्व करना था।
उन्होंने कहा, ‘‘विश्व चैंपियन बनना मेरा सपना है। लेकिन जब मैं छोटी थी, तब मेरा सिर्फ एक ही सपना था, अपनी जर्सी के पीछे ‘इंडिया’ लिखा देखना, देश का प्रतिनिधित्व करना। जब मैं सीनियर खिलाड़ियों को देखती थी, तो सोचती थी कि क्या कभी मैं यहां तक पहुंच पाऊंगी।’’
दूसरी तरफ महिलाओं के 50 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली नीलम सिरोही ने कहा कि वह कड़ी मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल करने में सफल रही।
नीलम ने कहा, ‘‘मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं। मैंने इस पदक के लिए पिछले कई वर्षों से कड़ा अभ्यास किया। मैं 2022 से विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही हूं, लेकिन पदक नहीं जीत का रही थी।
मेरे माता-पिता, मेरे कोच और मेरे फूफा जी हमेशा मुझसे कहते थे कि मैं विश्व चैंपियन बन सकती हूं और अब मैंने इसे साबित कर दिया है।’’
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