ग्वालियर में साइबर ठगों ने रिटायर्ड मौसम वैज्ञानिक को निशाना बनाकर 31 हजार रुपए की ठगी कर ली। दर्पण कॉलोनी निवासी उमाशंकर चौकसे ने फेसबुक पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लोगो वाला विज्ञापन देखा था। इसमें घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण पत्र) अपडेट करने की सुविधा देने का दावा किया गया था। विज्ञापन के लिंक पर क्लिक करने के बाद ठगों ने बैंक प्रतिनिधि बनकर उनसे गोपनीय जानकारी हासिल की और तीन ट्रांजैक्शन में खाते से 31 हजार रुपए निकाल लिए। पीड़ित ने साइबर सेल में शनिवार की शाम 6:30 बजे शिकायत दर्ज कराई। फेसबुक पर देखा बैंक के लोगो वाला विज्ञापन दर्पण कॉलोनी निवासी रिटायर्ड मौसम वैज्ञानिक उमाशंकर चौकसे हर साल की तरह इस बार भी नवंबर में अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान शुक्रवार शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच उन्हें फेसबुक पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लोगो वाला एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। उमाशंकर ने इसे बैंक की आधिकारिक सुविधा समझकर विज्ञापन पर दिए गए लिंक पर क्लिक कर दिया। लिंक पर क्लिक करते ही आया फोन लिंक पर क्लिक करने के कुछ देर बाद उमाशंकर के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताया। उसने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनकी पेंशन और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारियां हासिल कर लीं। इसके कुछ ही देर बाद उनके बैंक खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 31 हजार रुपए निकाल लिए गए। साइबर सेल में शिकायत बैंक खाते से रुपए कटने का मैसेज मिलने पर उमाशंकर को साइबर ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने तत्काल साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। ठगी से नाराज रिटायर्ड वैज्ञानिक ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फेसबुक को ‘फर्जी बुक’ करार दिया। रिटायर्ड वैज्ञानिक की अपील-सोशल मीडिया के विज्ञापनों पर भरोसा न करें उमाशंकर चौकसे ने ग्वालियर सहित देशभर के पेंशनर्स और आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले बैंक या सरकारी संस्थानों के विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। उन्होंने लोगों को किसी भी ऑनलाइन लिंक पर अपनी बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचने की सलाह दी।

