Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधान परिषद की नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा के भीतर नाराजगी और गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अपने विधानसभा क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम नागपुर में ही पार्टी के कुछ नेताओं पर संगठन को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले भाजपा नेता ओमप्रकाश यादव ने दावा किया है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी की गुटबाजी के कारण स्नातक मतदाताओं का अपेक्षित पंजीकरण नहीं हो पाया। इसका खामियाजा भाजपा को चुनाव में भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि नागपुर में हार के पीछे पार्टी के ही कुछ स्थानीय नेताओं की स्वार्थ वाली राजनीति भी जिम्मेदार है।
ओमप्रकाश यादव के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम नागपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब चार लाख मतदाता हैं। इनमें कम से कम 50 प्रतिशत मतदाता स्नातक होने की संभावना थी। ऐसे में भाजपा के पास लगभग 50 हजार स्नातक मतदाताओं का पंजीकरण कराने का अवसर था, लेकिन पार्टी केवल 24 हजार मतदाताओं का ही पंजीकरण करा सकी। उन्होंने इसके लिए कुछ स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है।
फडणवीस के ‘गढ़’ में ही भाजपा कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि दक्षिण-पश्चिम नागपुर के कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण जूनियर कार्यकर्ताओं को स्नातक मतदाताओं के पंजीकरण का काम नहीं करने दिया। कई जगहों पर कार्यकर्ताओं को मतदाता पंजीकरण से रोका गया।
ओमप्रकाश यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्षेत्र के कुछ नेताओं की ‘मैं नहीं तो कोई नहीं’ वाली जिद ने पार्टी का भारी नुकसान किया है। इन नेताओं ने खुद भी ढंग से काम नहीं किया और मैदान में डटे अन्य बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी काम नहीं करने दिया। इसके कारण पार्टी के कार्यकर्ता नाराज हुए और संगठन की चुनावी तैयारी प्रभावित हुई।
यादव का दावा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने विधानसभा क्षेत्र में स्नातक मतदाताओं का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, व्यस्त होने के कारण वह खुद इस काम पर लगातार नजर नहीं रख सके। उन्होंने कुछ स्थानीय नेताओं पर भरोसा करके जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन वहीं पर गड़बड़ी हुई।
‘गुटबाजी करने वाले नेता पर एक्शन हो’
ओमप्रकाश यादव ने दक्षिण-पश्चिम नागपुर में पार्टी के भीतर गुटबाजी करने वाले एक स्थानीय नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि इस नेता के दबाव के कारण कई नाराज कार्यकर्ता अपनी शिकायतें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
हालांकि, मीडिया के सामने यादव ने संबंधित नेता का नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी का नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन इस संबंध में पार्टी के उचित मंच पर अपनी बात और जरूरी जानकारी पहुंचा चुके हैं।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व से मांग की कि जो नेता खुद काम नहीं करता और दूसरे कार्यकर्ताओं को भी काम नहीं करने देता, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यादव के मुताबिक, ऐसे नेताओं के कारण संगठन को लगातार नुकसान हो रहा है।
9 हजार वोट अवैध होने के पीछे साजिश का शक
ओमप्रकाश यादव ने नागपुर स्नातक चुनाव में करीब 9 हजार वोट अवैध होने के मामले पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 9 हजार मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहाले के नाम के सामने एक जैसी गलती करते हुए ‘2’ अंक लिख दिया, जिसके कारण उनके मत अवैध हो गए।
यादव ने इस पर संदेह जताते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर एक ही तरह से वोट अवैध होना महज संयोग नहीं हो सकता। इसके पीछे कोई साजिश होने की आशंका है। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से इसकी जांच करने और यह पता लगाने की मांग की कि मतदाताओं से इस तरह मतदान किसने करवाया।
उन्होंने कहा कि वह एक छोटे कार्यकर्ता हैं, इसलिए किसी का नाम लेकर आरोप नहीं लगाएंगे। लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री तक पहुंचाई गई थी कार्यकर्ताओं की नाराजगी
ओमप्रकाश यादव ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम नागपुर में स्नातक चुनाव को लेकर संगठन का काम ठीक से नहीं हो रहा था। कुछ स्थानीय नेता दूसरे कार्यकर्ताओं को काम करने का मौका नहीं दे रहे थे। उन्होंने इस पूरी स्थिति से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी अवगत कराया था।
अब देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और संबंधित नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

