भागलपुर में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार पर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां पैदा करने की सोच विपक्ष की भूल है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां सत्ता बदलने का रास्ता जनता का मत है। देश की 140 करोड़ से अधिक आबादी को राजनीतिक महत्वाकांक्षा या सत्ता पाने की बेचैनी के कारण अराजकता की ओर नहीं धकेला जा सकता। विपक्ष के कुछ नेता बांग्लादेश के हालात, नेपाल में सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट और पाकिस्तान में सेना के हस्तक्षेप से हुए सत्ता परिवर्तन का जिक्र भारत की राजनीति के संदर्भ में करते हैं। भारत का लोकतंत्र इन देशों से अलग है। विपक्षी दलों को घेरा विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए चिराग पासवान ने आरोप लगाया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं। विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर देश की छवि और व्यवस्था कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रदर्शनों के जरिए विदेशी ताकतों की सोच को बल देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं हो सकती। ‘सदन में हंगामा, बाहर लोकतंत्र की दुहाई’ केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद का सत्र चलता है तो विपक्ष सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने क्यों नहीं देता? सदन के भीतर हंगामा, कार्यवाही बाधित करना और बाहर लोकतंत्र की रक्षा की बातें करना आखिर कैसी राजनीति है? विपक्ष महाभियोग जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा करता है, खड़गे जी के आवास पर मॉक पार्लियामेंट आयोजित करता है, लेकिन वास्तविक संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर आने पर सदन को चलने नहीं दिया जाता। लोकतंत्र केवल विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद में जनहित के मुद्दों पर चर्चा करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बिहार और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जमीन पर भी उठाया सवाल चिराग पासवान ने कांग्रेस के राजनीतिक प्रदर्शन पर तंज कसते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में उसकी स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की राजनीतिक उपस्थिति क्या है, यह किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस और विपक्षी दल चुनावी नतीजों के बाद ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगते हैं। चुनाव में जनता का समर्थन नहीं मिलता है तो आत्ममंथन करने के बजाय ईवीएम को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। विपक्ष को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। चुनावी हार के कारणों को तलाशने और अपनी राजनीतिक कमियों को सुधारने की जरूरत है, न कि हर बार चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की। भागलपुर में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार पर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां पैदा करने की सोच विपक्ष की भूल है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां सत्ता बदलने का रास्ता जनता का मत है। देश की 140 करोड़ से अधिक आबादी को राजनीतिक महत्वाकांक्षा या सत्ता पाने की बेचैनी के कारण अराजकता की ओर नहीं धकेला जा सकता। विपक्ष के कुछ नेता बांग्लादेश के हालात, नेपाल में सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट और पाकिस्तान में सेना के हस्तक्षेप से हुए सत्ता परिवर्तन का जिक्र भारत की राजनीति के संदर्भ में करते हैं। भारत का लोकतंत्र इन देशों से अलग है। विपक्षी दलों को घेरा विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए चिराग पासवान ने आरोप लगाया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं। विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर देश की छवि और व्यवस्था कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रदर्शनों के जरिए विदेशी ताकतों की सोच को बल देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं हो सकती। ‘सदन में हंगामा, बाहर लोकतंत्र की दुहाई’ केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद का सत्र चलता है तो विपक्ष सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने क्यों नहीं देता? सदन के भीतर हंगामा, कार्यवाही बाधित करना और बाहर लोकतंत्र की रक्षा की बातें करना आखिर कैसी राजनीति है? विपक्ष महाभियोग जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा करता है, खड़गे जी के आवास पर मॉक पार्लियामेंट आयोजित करता है, लेकिन वास्तविक संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर आने पर सदन को चलने नहीं दिया जाता। लोकतंत्र केवल विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद में जनहित के मुद्दों पर चर्चा करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बिहार और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जमीन पर भी उठाया सवाल चिराग पासवान ने कांग्रेस के राजनीतिक प्रदर्शन पर तंज कसते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में उसकी स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की राजनीतिक उपस्थिति क्या है, यह किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस और विपक्षी दल चुनावी नतीजों के बाद ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगते हैं। चुनाव में जनता का समर्थन नहीं मिलता है तो आत्ममंथन करने के बजाय ईवीएम को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। विपक्ष को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। चुनावी हार के कारणों को तलाशने और अपनी राजनीतिक कमियों को सुधारने की जरूरत है, न कि हर बार चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की।

