पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (PUTA) के प्रस्तावित चुनाव को लेकर विवाद गहरा गया है। संघ के निर्वाचित महासचिव डॉ. विभाष रंजन ने 4 नवंबर 2026 को पटना कॉलेज के जिम्नेजियम हॉल में प्रस्तावित मतदान और उससे जुड़ी चुनाव प्रक्रिया को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसके बाद विवाद गहरा गया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर कर चुनाव प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न फैसलों और अधिसूचनाओं को निरस्त करने तथा प्रस्तावित मतदान पर रोक लगाने की मांग की है। डॉ. रंजन के मुताबिक, याचिका 26 अक्टूबर 2026 को दायर की गई। इसमें पटना विश्वविद्यालय, कुलपति, कुलसचिव और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पदाधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका की प्रति 29 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को तामील कराई गई। हालांकि, याचिका पर हाईकोर्ट के किसी आदेश की जानकारी उपलब्ध नहीं है। कार्यकारिणी भंग करने के फैसले पर सवाल डॉ. रंजन ने याचिका में दावा किया है कि पूटा वर्ष 1957 से अपने लिखित संविधान के अनुसार संचालित होता रहा है। उनके मुताबिक, 20 दिसंबर 2006 के संशोधन के तहत कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित है और संविधान के अनुच्छेद 20 के अनुसार नई कार्यकारिणी के चुनाव तक पुरानी कार्यकारिणी कार्य करती रहेगी। याचिका में 10 अगस्त 2026 की विज्ञप्ति के जरिए वर्ष 2023 में निर्वाचित कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। डॉ. रंजन का कहना है कि संविधान में कार्यकारिणी को इस तरह भंग करने का प्रावधान नहीं है। बैठक की सूचना और कार्यसूची पर भी आपत्ति याचिका में आरोप लगाया गया है कि 10 अगस्त को बुलाई गई आम सभा के लिए संविधान के मुताबिक 10 दिन पहले सूचना नहीं दी गई। डॉ. रंजन के अनुसार, बैठक की सूचना 1 अगस्त को जारी की गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधियाचित आम सभा के लिए जरूरी 30 सदस्यों का कारण सहित लिखित अनुरोध उपलब्ध नहीं था। उनका कहना है कि बैठक की कार्यसूची में पूटा चुनाव की रूपरेखा और कार्यक्रम का उल्लेख था, लेकिन कार्यकारिणी को भंग करने का मुद्दा शामिल नहीं था। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि संबंधित कार्यकारिणी बैठक की सूचना निर्वाचित महासचिव को नहीं दी गई थी। 10 अगस्त की विज्ञप्ति में प्रस्तावों को एक साथ ‘सर्वसम्मति’ और ‘पूर्ण बहुमत’ से पारित बताए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
डॉ. रंजन के मुताबिक, बैठक की कार्यवाही, उपस्थिति पंजी और मतगणना का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की नियुक्ति पर विवाद डॉ. रंजन ने याचिका में दावा किया है कि पूटा के संविधान में ‘मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी’ नाम का पद निर्धारित नहीं है। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया संचालित करने, सहयोग समिति गठित करने और चुनाव खर्च स्वीकृत करने जैसी जिम्मेदारियां इस पद से जुड़े व्यक्ति को दी गईं। याचिका के अनुसार, 18 अगस्त 2026 के पत्र के जरिए निवर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष/महासचिव से 21 अगस्त तक प्रमाणित मतदाता सूची मांगी गई थी। डॉ. रंजन ने इस प्रक्रिया की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया है। चुनाव फंड के नाम पर राशि जमा कराने का आरोप याचिका में इंडियन बैंक की पटना विश्वविद्यालय शाखा में ‘PUTA Election Fund, 2026’ नाम से खाता खोले जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। डॉ. रंजन का आरोप है कि यह खाता पूटा की अनुमति और महासचिव व कोषाध्यक्ष की जानकारी के बिना खोला गया। उन्होंने दावा किया कि व्हाट्सएप समूहों के जरिए शिक्षकों से क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति शिक्षक 500 रुपये जमा करने की अपील की गई। याचिका में 1 अक्टूबर 2026 को इस खाते में 49 हजार रुपये जमा होने की सूचना का भी उल्लेख है। ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव अधिसूचना की तारीखों पर भी उठाए सवाल याचिका में 14 अक्टूबर 2026 को जारी चुनाव अधिसूचना संख्या PUTA/CEO/2026/11 को भी चुनौती दी गई है। डॉ. रंजन के अनुसार, अधिसूचना में सात पदाधिकारी पदों और विभिन्न इकाइयों में विभाजित कार्यकारिणी की 19 सीटों का उल्लेख है, जबकि उनके मुताबिक यह संरचना पूटा के संविधान के अनुच्छेद 18 और 23 के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिसूचना में प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 24 सितंबर और दावा-आपत्ति की अवधि 25 सितंबर से 12 अक्टूबर तक बताई गई है, जबकि अधिसूचना 14 अक्टूबर को जारी हुई। याचिका में चुनाव मैनुअल, दिशानिर्देश और ‘पूटा केंद्रीय चुनाव समिति’ के उल्लेख पर भी आपत्ति जताई गई है। डॉ. रंजन के अनुसार, 24 सितंबर को प्रस्तावित मतदान नहीं हुआ था। उन्होंने 20 अगस्त को चुनाव प्रक्रिया रोकने का अनुरोध करने और 16 अक्टूबर को संबंधित अधिसूचना वापस लेने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र देने का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि इन आपत्तियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट से मतदान रोकने की मांग याचिका में 10 अगस्त की विज्ञप्ति में दर्ज प्रस्तावों, 18 अगस्त के पत्र और 14 अक्टूबर की चुनाव अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही, 4 नवंबर को प्रस्तावित मतदान पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। वैकल्पिक रूप से, याचिका लंबित रहने के दौरान मतदान और परिणाम घोषित होने की स्थिति में चुनाव तथा उसके परिणाम को अवैध और शून्य घोषित करने की मांग भी की गई है। शिक्षकों से अनधिकृत खाते में राशि नहीं जमा करने की अपील डॉ. विभाष रंजन ने शिक्षकों से अपील की है कि वे पूटा के संविधान और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवाद के प्रति सजग रहें तथा किसी अनधिकृत खाते में राशि जमा न करें। उन्होंने कहा कि संघ की गरिमा उसके संविधान में निहित है और मामले को हाईकोर्ट में ले जाया गया है। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए शिक्षकों से न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करने की अपील की। पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (PUTA) के प्रस्तावित चुनाव को लेकर विवाद गहरा गया है। संघ के निर्वाचित महासचिव डॉ. विभाष रंजन ने 4 नवंबर 2026 को पटना कॉलेज के जिम्नेजियम हॉल में प्रस्तावित मतदान और उससे जुड़ी चुनाव प्रक्रिया को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसके बाद विवाद गहरा गया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर कर चुनाव प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न फैसलों और अधिसूचनाओं को निरस्त करने तथा प्रस्तावित मतदान पर रोक लगाने की मांग की है। डॉ. रंजन के मुताबिक, याचिका 26 अक्टूबर 2026 को दायर की गई। इसमें पटना विश्वविद्यालय, कुलपति, कुलसचिव और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पदाधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका की प्रति 29 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को तामील कराई गई। हालांकि, याचिका पर हाईकोर्ट के किसी आदेश की जानकारी उपलब्ध नहीं है। कार्यकारिणी भंग करने के फैसले पर सवाल डॉ. रंजन ने याचिका में दावा किया है कि पूटा वर्ष 1957 से अपने लिखित संविधान के अनुसार संचालित होता रहा है। उनके मुताबिक, 20 दिसंबर 2006 के संशोधन के तहत कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित है और संविधान के अनुच्छेद 20 के अनुसार नई कार्यकारिणी के चुनाव तक पुरानी कार्यकारिणी कार्य करती रहेगी। याचिका में 10 अगस्त 2026 की विज्ञप्ति के जरिए वर्ष 2023 में निर्वाचित कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। डॉ. रंजन का कहना है कि संविधान में कार्यकारिणी को इस तरह भंग करने का प्रावधान नहीं है। बैठक की सूचना और कार्यसूची पर भी आपत्ति याचिका में आरोप लगाया गया है कि 10 अगस्त को बुलाई गई आम सभा के लिए संविधान के मुताबिक 10 दिन पहले सूचना नहीं दी गई। डॉ. रंजन के अनुसार, बैठक की सूचना 1 अगस्त को जारी की गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधियाचित आम सभा के लिए जरूरी 30 सदस्यों का कारण सहित लिखित अनुरोध उपलब्ध नहीं था। उनका कहना है कि बैठक की कार्यसूची में पूटा चुनाव की रूपरेखा और कार्यक्रम का उल्लेख था, लेकिन कार्यकारिणी को भंग करने का मुद्दा शामिल नहीं था। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि संबंधित कार्यकारिणी बैठक की सूचना निर्वाचित महासचिव को नहीं दी गई थी। 10 अगस्त की विज्ञप्ति में प्रस्तावों को एक साथ ‘सर्वसम्मति’ और ‘पूर्ण बहुमत’ से पारित बताए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
डॉ. रंजन के मुताबिक, बैठक की कार्यवाही, उपस्थिति पंजी और मतगणना का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की नियुक्ति पर विवाद डॉ. रंजन ने याचिका में दावा किया है कि पूटा के संविधान में ‘मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी’ नाम का पद निर्धारित नहीं है। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया संचालित करने, सहयोग समिति गठित करने और चुनाव खर्च स्वीकृत करने जैसी जिम्मेदारियां इस पद से जुड़े व्यक्ति को दी गईं। याचिका के अनुसार, 18 अगस्त 2026 के पत्र के जरिए निवर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष/महासचिव से 21 अगस्त तक प्रमाणित मतदाता सूची मांगी गई थी। डॉ. रंजन ने इस प्रक्रिया की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया है। चुनाव फंड के नाम पर राशि जमा कराने का आरोप याचिका में इंडियन बैंक की पटना विश्वविद्यालय शाखा में ‘PUTA Election Fund, 2026’ नाम से खाता खोले जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। डॉ. रंजन का आरोप है कि यह खाता पूटा की अनुमति और महासचिव व कोषाध्यक्ष की जानकारी के बिना खोला गया। उन्होंने दावा किया कि व्हाट्सएप समूहों के जरिए शिक्षकों से क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति शिक्षक 500 रुपये जमा करने की अपील की गई। याचिका में 1 अक्टूबर 2026 को इस खाते में 49 हजार रुपये जमा होने की सूचना का भी उल्लेख है। ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव अधिसूचना की तारीखों पर भी उठाए सवाल याचिका में 14 अक्टूबर 2026 को जारी चुनाव अधिसूचना संख्या PUTA/CEO/2026/11 को भी चुनौती दी गई है। डॉ. रंजन के अनुसार, अधिसूचना में सात पदाधिकारी पदों और विभिन्न इकाइयों में विभाजित कार्यकारिणी की 19 सीटों का उल्लेख है, जबकि उनके मुताबिक यह संरचना पूटा के संविधान के अनुच्छेद 18 और 23 के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिसूचना में प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 24 सितंबर और दावा-आपत्ति की अवधि 25 सितंबर से 12 अक्टूबर तक बताई गई है, जबकि अधिसूचना 14 अक्टूबर को जारी हुई। याचिका में चुनाव मैनुअल, दिशानिर्देश और ‘पूटा केंद्रीय चुनाव समिति’ के उल्लेख पर भी आपत्ति जताई गई है। डॉ. रंजन के अनुसार, 24 सितंबर को प्रस्तावित मतदान नहीं हुआ था। उन्होंने 20 अगस्त को चुनाव प्रक्रिया रोकने का अनुरोध करने और 16 अक्टूबर को संबंधित अधिसूचना वापस लेने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र देने का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि इन आपत्तियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट से मतदान रोकने की मांग याचिका में 10 अगस्त की विज्ञप्ति में दर्ज प्रस्तावों, 18 अगस्त के पत्र और 14 अक्टूबर की चुनाव अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही, 4 नवंबर को प्रस्तावित मतदान पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। वैकल्पिक रूप से, याचिका लंबित रहने के दौरान मतदान और परिणाम घोषित होने की स्थिति में चुनाव तथा उसके परिणाम को अवैध और शून्य घोषित करने की मांग भी की गई है। शिक्षकों से अनधिकृत खाते में राशि नहीं जमा करने की अपील डॉ. विभाष रंजन ने शिक्षकों से अपील की है कि वे पूटा के संविधान और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवाद के प्रति सजग रहें तथा किसी अनधिकृत खाते में राशि जमा न करें। उन्होंने कहा कि संघ की गरिमा उसके संविधान में निहित है और मामले को हाईकोर्ट में ले जाया गया है। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए शिक्षकों से न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करने की अपील की।

