उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से बैंकिंग धोखाधड़ी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ‘सेक्टर पाई’ (Sector Pie) शाखा में बचत और सावधि जमा (Fixed Deposit) खाताधारकों के पैसों में करोड़ों रुपये के गबन के आरोपों के बाद, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की बागडोर संभालते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान खाताधारकों के बैंक खातों से लगभग 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी की गई है।
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (गाजियाबाद) ने पीएनबी के नोएडा मंडल के मुख्य प्रबंधक की ओर से 23 अक्टूबर को भेजी गई लिखित शिकायत के आधार पर बृहस्पतिवार को मामला दर्ज किया। यह शिकायत ‘सेक्टर पाई’ शाखा की एक कर्मचारी और कुछ अन्य खाताधारकों के खिलाफ की गई थी। सीबीआई ने प्राथमिकी में शाखा की कार्यालय सहायक दीपांशी, खाताधारक आशुतोष पाठक और कुछ अज्ञात लोक सेवकों तथा निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया है।
इन सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, खातों में हेराफेरी और लोक सेवकों द्वारा आपराधिक कदाचार से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। पीएनबी ने अपनी शिकायत में कहा है कि कथित धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब 16 सितंबर को एक खाताधारक अपने खाते से हुए तीन संदिग्ध निकासी लेनदेन की शिकायत लेकर शाखा प्रबंधक के पास पहुंची।
बैंक के अनुसार, अब तक विभिन्न ग्राहक खातों से 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी का पता चला है। आरोप है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान इस धनराशि का गबन किया गया। शिकायत के मुताबिक, धोखाधड़ी की वास्तविक राशि का पता लगाने के लिए शाखा में खातों और लेनदेन का मिलान किया जा रहा है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी प्रावधान लागू किए हैं। यह कार्रवाई नए आपराधिक कानूनों यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जिनमें शामिल हैं:
आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)
धोखाधड़ी (Cheating)
खातों में हेराफेरी (Falsification of Accounts)
लोक सेवकों द्वारा आपराधिक कदाचार (Criminal Misconduct by Public Servants)
इसके अतिरिक्त, मामले की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की प्रासंगिक धाराएं भी एफआईआर में शामिल की गई हैं।
Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi

