अररिया की सभी ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। शुक्रवार को समाहरणालय परिसर स्थित डीआरडीए सभागार में इस अभियान को लेकर जिला स्तरीय बैठक हुई। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में मुखियाओं को अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में बाल विवाह रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। मुखियाओं को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश बैठक में मुखियाओं से पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और बाल विवाह की आशंका वाले मामलों पर नजर रखने को कहा गया। अधिकारियों ने सामुदायिक निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि समय रहते ऐसे मामलों की जानकारी मिल सके और जरूरी कार्रवाई की जा सके। कई विभागों के अधिकारी और सामाजिक संगठन हुए शामिल कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर हुई। बैठक में जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस), पुलिस उपाधीक्षक, सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मौजूद रहे। महिला एवं बाल विकास निगम, अररिया के जिला परियोजना प्रबंधक, जिला मिशन समन्वयक, जेंडर स्पेशलिस्ट और अन्य कर्मियों ने भी भाग लिया। मास्टर ट्रेनरों ने दी बाल विवाह रोकने की जानकारी मास्टर ट्रेनर बंकू बिहारी सरकार, सैफ उर रहमान और पियूष जी ने बाल विवाह की रोकथाम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। यूनिसेफ के राज्य प्रतिनिधियों और बाल विवाह रोकने के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विभागों के बीच तालमेल बनाने पर जोर बैठक में शिक्षा, पुलिस, बाल संरक्षण और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाने की जरूरत बताई गई। अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। बाल विवाह मुक्त समाज बनाने की ली शपथ बैठक के अंत में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने की शपथ ली। प्रशासन का लक्ष्य सामूहिक प्रयासों के जरिए जिले की हर ग्राम पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाना है। अररिया की सभी ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। शुक्रवार को समाहरणालय परिसर स्थित डीआरडीए सभागार में इस अभियान को लेकर जिला स्तरीय बैठक हुई। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में मुखियाओं को अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में बाल विवाह रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। मुखियाओं को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश बैठक में मुखियाओं से पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और बाल विवाह की आशंका वाले मामलों पर नजर रखने को कहा गया। अधिकारियों ने सामुदायिक निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि समय रहते ऐसे मामलों की जानकारी मिल सके और जरूरी कार्रवाई की जा सके। कई विभागों के अधिकारी और सामाजिक संगठन हुए शामिल कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर हुई। बैठक में जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस), पुलिस उपाधीक्षक, सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मौजूद रहे। महिला एवं बाल विकास निगम, अररिया के जिला परियोजना प्रबंधक, जिला मिशन समन्वयक, जेंडर स्पेशलिस्ट और अन्य कर्मियों ने भी भाग लिया। मास्टर ट्रेनरों ने दी बाल विवाह रोकने की जानकारी मास्टर ट्रेनर बंकू बिहारी सरकार, सैफ उर रहमान और पियूष जी ने बाल विवाह की रोकथाम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। यूनिसेफ के राज्य प्रतिनिधियों और बाल विवाह रोकने के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विभागों के बीच तालमेल बनाने पर जोर बैठक में शिक्षा, पुलिस, बाल संरक्षण और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाने की जरूरत बताई गई। अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। बाल विवाह मुक्त समाज बनाने की ली शपथ बैठक के अंत में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने की शपथ ली। प्रशासन का लक्ष्य सामूहिक प्रयासों के जरिए जिले की हर ग्राम पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाना है।

