पंजीयक विभाग में घुसकर प्रॉपर्टी रिकॉर्ड के रजिस्टर फाड़ दिए गए, दस्तावेजों में बदलाव कर कई रजिस्टर गायब कर दिए गए। मामला कलेक्टर तक पहुंचा तो जांच समिति बनाई गई। समिति ने 30 मामले पकड़े और 18 मामलों में एफआईआर कराई। इसके बावजूद पुलिस ने 15 महीने में एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई। कलेक्टर के 9 दिसंबर 2024 के आदेश पर जिला रिकॉर्ड रूम में संदिग्ध दस्तावेजों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने 9 जुलाई 2025 को रिपोर्ट दी। कलेक्टर के 17 जुलाई 2025 के पत्र के आधार पर वरिष्ठ उप पंजीयक, इंदौर-1 ने 24 जुलाई को पंढरीनाथ थाने में 18 संदिग्ध दस्तावेजों के मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र भेजा। 27 जुलाई 2025 को एफआईआर क्रमांक 83/2025 दर्ज हुई। संपत्ति करीब हजार करोड़ की बताई जाती है। सीधी बात – सतीश कुमार पटेल, टीआई पंढरीनाथ यह पेचीदा मामला है, इसमें बहुत ध्यान रखना पड़ता है एफआईआर को 15 महीने हो गए, इन्वेस्टिगेशन शुरू ही नहीं हुआ?
– ऐसा नहीं है, इन्वेस्टिगेशन चल रहा है, हम बारीकी से जांच कर रहे हैं। न फरियादियों के बयान लिए गए और न रिकॉर्ड जब्त हुए?
– यह पेचीदा मामला है, इसमें बहुत ध्यान रखना पड़ता है। जांच रिपोर्ट में सबकुछ है, फिर भी एक्शन नहीं हुआ?
– एफआईआर हुई है तो एक्शन जरूर होगा, भरोसा रखिए।

