विश्व डिस्लेक्सिया दिवस पर कार्यक्रम, रानी कुमारी बनीं पेंटिंग प्रतियोगिता की विजेता

विश्व डिस्लेक्सिया दिवस पर कार्यक्रम, रानी कुमारी बनीं पेंटिंग प्रतियोगिता की विजेता

विश्व डिस्लेक्सिया दिवस के अवसर पर मधुवन स्थित संसाधन कक्ष में बच्चों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यालय के बच्चों ने प्रभात फेरी निकालकर सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। इस दौरान बच्चों की कॉपियों की जांच कर पढ़ने-लिखने में कठिनाई से जूझ रहे विद्यार्थियों को चिह्नित करने का प्रयास किया गया। पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित हुई, जिसमें वर्ग सात की रानी कुमारी को प्रथम पुरस्कार मिला। संसाधन कक्ष प्रभारी डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि डिस्लेक्सिया सीखने से जुड़ी स्थिति है, बीमारी नहीं। इसमें सामान्य या तेज बुद्धि वाले बच्चों को भी पढ़ने, लिखने और शब्दों को पहचानने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि पठन-पाठन संबंधी कठिनाइयों में डिस्लेक्सिया, डिस्कैलकुलिया और डिसग्राफिया शामिल हैं। डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि अक्षरों में भ्रम होना या शब्दों को पढ़ने में कठिनाई होना आलस्य अथवा कम बुद्धि का संकेत नहीं है। विशेष शिक्षण तकनीक, फॉनिक्स और ऑडियो बुक्स की मदद से बच्चों को काफी सुधार करने में सहायता मिल सकती है। समय पर पहचान और उचित सहयोग से बच्चे सामान्य विद्यालयों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक सुनील कुमार, उमा शंकर , प्रभात कुमार, जितेंद्र कुमार और अर्चना कुमारी सहित विद्यालय के सभी बच्चों ने भाग लिया। विश्व डिस्लेक्सिया दिवस के अवसर पर मधुवन स्थित संसाधन कक्ष में बच्चों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यालय के बच्चों ने प्रभात फेरी निकालकर सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। इस दौरान बच्चों की कॉपियों की जांच कर पढ़ने-लिखने में कठिनाई से जूझ रहे विद्यार्थियों को चिह्नित करने का प्रयास किया गया। पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित हुई, जिसमें वर्ग सात की रानी कुमारी को प्रथम पुरस्कार मिला। संसाधन कक्ष प्रभारी डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि डिस्लेक्सिया सीखने से जुड़ी स्थिति है, बीमारी नहीं। इसमें सामान्य या तेज बुद्धि वाले बच्चों को भी पढ़ने, लिखने और शब्दों को पहचानने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि पठन-पाठन संबंधी कठिनाइयों में डिस्लेक्सिया, डिस्कैलकुलिया और डिसग्राफिया शामिल हैं। डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि अक्षरों में भ्रम होना या शब्दों को पढ़ने में कठिनाई होना आलस्य अथवा कम बुद्धि का संकेत नहीं है। विशेष शिक्षण तकनीक, फॉनिक्स और ऑडियो बुक्स की मदद से बच्चों को काफी सुधार करने में सहायता मिल सकती है। समय पर पहचान और उचित सहयोग से बच्चे सामान्य विद्यालयों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक सुनील कुमार, उमा शंकर , प्रभात कुमार, जितेंद्र कुमार और अर्चना कुमारी सहित विद्यालय के सभी बच्चों ने भाग लिया।  

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