हाईकोर्ट ने कहा-कस्टोडियन-डेथ रिलीफ स्कीम तीन महीने में लागू करो:जेलों की निगरानी के लिए कमेटी गठित करने, चालानी गार्डों की भर्ती करने के भी निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा-कस्टोडियन-डेथ रिलीफ स्कीम तीन महीने में लागू करो:जेलों की निगरानी के लिए कमेटी गठित करने, चालानी गार्डों की भर्ती करने के भी निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि वह हिरासत में होने वाली मौत पर मुआवजा देने के लिए राजस्थान कस्टोडियन डेथ रिलीफ स्कीम-2025 को अंतिम रूप देकर तीन महीने के भीतर लागू करें। मुख्य न्यायाधीश संजय के अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की अदालत ने यह निर्देश जेल में व्यवस्थाओं से जुड़ी आधा दर्जन जनहित याचिकओं को निस्तारित करते हुए दिए। इसके साथ ही अदालत ने जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, चालानी गार्डों की भर्ती करने, जेल में महिला कैदियों के लिए सैनेटरी नेपकिन वैंडिंग मशीन लगाने सहित अन्य निर्देश दिए। वहीं अदालत ने जेलों की निगरानी करने और अदालती आदेश की मॉनिटरिंग करने के लिए हर जिले में जिला जज की अध्यक्षता में एक स्थायी कमेटी का गठन करने का भी निर्देश दिया हैं। यह कमेटी हर तीन महीने में मॉनिटरिंग बैठक करेगी। तीन महीने में जेलों में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरें लगाएं
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र प्रतीक कासलीवाल ने जेलों में अपर्याप्त सीसीटीवी के इंस्टोलेन को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्होंने बताया था कि अक्टूबर 2025 में डीजे की निरीक्षण रिपोर्टों से विभिन्न सुविधाओं में भारी कमियां उजागर हुईं। विशेष रूप से अजमेर के महिला बंदी सुधार गृह में एक भी कैमरा नहीं था। बीकानेर केंद्रीय जेल में बजट की कमी के कारण 275 प्रस्तावित कैमरों में से केवल 16 कैमरे लगे थे। जयपुर जिला जेल में आवश्यक कोटे से कम कैमरे थे। कोटा केंद्रीय जेल में मात्र 15 कैमरे थे और जोधपुर तथा उदयपुर में 37 कैमरे खराब थे। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिए कि संबंधित एजेंसियां तीन महीने में बीकानेर में 275 और जयपुर में 60 कैमरों सहित सभी प्रस्तावित सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा करें। वहीं, खराब कैमरों की मरम्मत करें और पर्याप्त स्टोरेज बैकअप प्रणाली सुनिश्चित करें। करीब 14 साल पहले कोर्ट ने लिया था स्वप्रेरित प्रसंज्ञान
दरअसल, फरवरी 2012 में अजमेर जेल में बंद एक हिस्ट्रीशीटर आतिश गर्ग ने मोबाइल फोन के जरिए जयपुर के एक टायर कारोबारी पर गोलीबारी और रंगदारी की घटना की साजिश रची थी। वह जेल के भीतर से ही गोलियां चलाने की आवाज भी सुन रहा था। इस घटना ने जेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए और अदालत ने जेलों को षड्यंत्रालय तक कहा था। इस घटना पर हाईकोर्ट ने स्व:प्रेरणा से जनहित याचिका दर्ज की थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कैदियों को न्यूनतम मजदूरी, बुनियादी सुविधाएं, महिला कैदियों के विशेष स्वास्थ्य अधिकारों और हिरासत में मौत के मामलों को शामिल करते हुए समय-समय पर निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा है कि पिछले सालों में लगातार मॉनिटरिंग से राजस्थान प्रिजनर्स रूल्स 2022 और पैरोल रूल्स 2021 जैसे नियमों में संशोधन हुए हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *