बिहार में विकास योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं होगी:सीएम ने 12 लाख आवास जल्द बनाने के निर्देश दिए; नशे के खिलाफ एक महीने चलेगा अभियान

बिहार में विकास योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं होगी:सीएम ने 12 लाख आवास जल्द बनाने के निर्देश दिए; नशे के खिलाफ एक महीने चलेगा अभियान

पटना में आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने और बिहार को नशामुक्त बनाने के लिए दो अलग अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने एक तरफ 100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं और केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा की, वहीं दूसरी ओर ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ की शुरुआत की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाए। वहीं, नशे के खिलाफ शुरू किए गए अभियान को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने पर जोर दिया। 12 लाख परिवारों को जल्द मिलेगा पक्का मकान मुख्यमंत्री ने लोकसेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में ‘बिहार गति’ के तहत विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवास योजना के लिए सर्वेक्षण का काम तेजी से पूरा किया जाए। सर्वेक्षण के दौरान मिली आपत्तियों का भी जल्द और पारदर्शी तरीके से निपटारा किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 12 लाख आवास बनाने का लक्ष्य जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता सूची में रखा जाए, ताकि जरूरतमंद परिवारों को पहले आवास का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने सरकारी जमीन की उपलब्धता की अंचलवार जांच करने का निर्देश दिया। जिलों के प्रभारी सचिवों को कहा गया कि पात्र लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने में आने वाली समस्याओं को दूर किया जाए। 2028 तक तैयार होगी साइंस सिटी की गैलरी पटना के राजेंद्र नगर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई। उन्होंने निर्देश दिया कि साइंस सिटी में विभिन्न गैलरियों के प्रदर्शों का निर्माण वर्ष 2028 तक पूरा किया जाए। इसका उद्देश्य लोगों, खासकर विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना है। 2027 तक पूरा होगा आमस-शिवरामपुर सड़क खंड मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-119डी के तहत आमस-दरभंगा सड़क परियोजना के पैकेज-1 की समीक्षा की। इसके अंतर्गत 55 किलोमीटर लंबे आमस-शिवरामपुर खंड का निर्माण वर्ष 2027 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा बिहार जलाशय पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ जरूरी समझौता करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने और निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने का निर्देश दिया। आदिवासी परिवारों को पक्का मकान देने के लिए चलेगा विशेष अभियान प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान की समीक्षा के दौरान विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि पात्र आदिवासी परिवारों को योजना का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजना की नियमित निगरानी करें और पात्र लोगों को तय नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं को समय पर पूरा करना और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। एक महीने तक चलेगा ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ विकास योजनाओं की समीक्षा के साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज पटना के अधिवेशन भवन में ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ की शुरुआत की। यह अभियान 27 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि इसे गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। अभियान के तहत नशे के नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए जन-जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ये वाहन अगले एक महीने तक बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर ऑडियो और वीडियो के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताएंगे। इस मौके पर नशामुक्ति के लिए व्हाट्सऐप चैटबोट और हेल्पलाइन की भी शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े जिलों के अधिकारियों व आम लोगों को नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करने, दूसरों को जागरूक करने और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकने में सहयोग देने की शपथ दिलाई। शहरों में प्रचार, गांवों में नुक्कड़ नाटक और चौपाल मुख्यमंत्री ने अभियान को सफल बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया। शहरी इलाकों में व्यापक प्रचार किया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक, चौपाल और पंचायत स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखना जरूरी है। नशे की लत के कारण कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपना भविष्य खराब कर लेते हैं। इसलिए विद्यार्थियों, युवाओं, जीविका दीदियों, सामाजिक संगठनों और समाज के दूसरे वर्गों को इस अभियान से जोड़ना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त, स्वस्थ और उज्ज्वल बिहार बनाने के लिए अभियान को लगातार और प्रभावी तरीके से चलाना होगा। इसमें जीविका की करीब 1.81 करोड़ दीदियों और ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। सूखे नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश मुख्यमंत्री ने शराबबंदी के साथ-साथ चरस, हेरोइन और अफीम जैसे नशीले पदार्थों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने जब्ती के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सूखे नशे के बढ़ते प्रचलन को गंभीरता से लेने की जरूरत है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में वर्ष 2024 में 282 किलोग्राम चरस जब्त की गई थी। वर्ष 2025 में यह मात्रा बढ़कर 400 किलोग्राम हो गई। इसी तरह, वर्ष 2024 में 42 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में इसकी मात्रा बढ़कर 65 किलोग्राम हो गई। वर्ष 2025 में 77 किलोग्राम अफीम भी जब्त की गई। मुख्यमंत्री ने पुलिस और मद्य निषेध विभाग के अधिकारियों को नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए और संबंधित जिलों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने बताया कि बिहार में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ करीब 1,700 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों के निपटारे के लिए कई जिलों में विशेष न्यायालयों की व्यवस्था की गई है। 2016 में लागू हुई थी शराबबंदी मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए बिहार में शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया था। उस समय राज्य के बजट का आकार करीब 50 से 55 हजार करोड़ रुपये था। इसके बावजूद राजस्व की चिंता किए बिना शराबबंदी को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने नीतीश कुमार के इस फैसले के लिए उन्हें बधाई देते हुए कहा कि अब शराबबंदी को प्रभावी बनाए रखने के साथ-साथ सभी प्रकार के नशीले पदार्थों के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने इन प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार जताया। विद्यार्थियों के आवेदनों के निपटारे की भी जानकारी दी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थी सहयोग शिविर में मिले आवेदनों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि शिविर के माध्यम से अब तक 1,755 आवेदन मिले हैं, जिनमें से 1,650 का निपटारा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को न्याय नहीं मिला है या जो किसी आदेश से संतुष्ट नहीं हैं, वे राज्यस्तरीय सहयोग शिविर में आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को न्याय मिलना जरूरी है, तभी बिहार विकास और उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ सकेगा। पटना में आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने और बिहार को नशामुक्त बनाने के लिए दो अलग अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने एक तरफ 100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं और केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा की, वहीं दूसरी ओर ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ की शुरुआत की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाए। वहीं, नशे के खिलाफ शुरू किए गए अभियान को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने पर जोर दिया। 12 लाख परिवारों को जल्द मिलेगा पक्का मकान मुख्यमंत्री ने लोकसेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में ‘बिहार गति’ के तहत विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवास योजना के लिए सर्वेक्षण का काम तेजी से पूरा किया जाए। सर्वेक्षण के दौरान मिली आपत्तियों का भी जल्द और पारदर्शी तरीके से निपटारा किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 12 लाख आवास बनाने का लक्ष्य जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता सूची में रखा जाए, ताकि जरूरतमंद परिवारों को पहले आवास का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने सरकारी जमीन की उपलब्धता की अंचलवार जांच करने का निर्देश दिया। जिलों के प्रभारी सचिवों को कहा गया कि पात्र लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने में आने वाली समस्याओं को दूर किया जाए। 2028 तक तैयार होगी साइंस सिटी की गैलरी पटना के राजेंद्र नगर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई। उन्होंने निर्देश दिया कि साइंस सिटी में विभिन्न गैलरियों के प्रदर्शों का निर्माण वर्ष 2028 तक पूरा किया जाए। इसका उद्देश्य लोगों, खासकर विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना है। 2027 तक पूरा होगा आमस-शिवरामपुर सड़क खंड मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-119डी के तहत आमस-दरभंगा सड़क परियोजना के पैकेज-1 की समीक्षा की। इसके अंतर्गत 55 किलोमीटर लंबे आमस-शिवरामपुर खंड का निर्माण वर्ष 2027 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा बिहार जलाशय पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ जरूरी समझौता करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने और निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने का निर्देश दिया। आदिवासी परिवारों को पक्का मकान देने के लिए चलेगा विशेष अभियान प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान की समीक्षा के दौरान विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि पात्र आदिवासी परिवारों को योजना का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजना की नियमित निगरानी करें और पात्र लोगों को तय नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं को समय पर पूरा करना और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। एक महीने तक चलेगा ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ विकास योजनाओं की समीक्षा के साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज पटना के अधिवेशन भवन में ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ की शुरुआत की। यह अभियान 27 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि इसे गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। अभियान के तहत नशे के नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए जन-जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ये वाहन अगले एक महीने तक बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर ऑडियो और वीडियो के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताएंगे। इस मौके पर नशामुक्ति के लिए व्हाट्सऐप चैटबोट और हेल्पलाइन की भी शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े जिलों के अधिकारियों व आम लोगों को नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करने, दूसरों को जागरूक करने और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकने में सहयोग देने की शपथ दिलाई। शहरों में प्रचार, गांवों में नुक्कड़ नाटक और चौपाल मुख्यमंत्री ने अभियान को सफल बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया। शहरी इलाकों में व्यापक प्रचार किया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक, चौपाल और पंचायत स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखना जरूरी है। नशे की लत के कारण कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपना भविष्य खराब कर लेते हैं। इसलिए विद्यार्थियों, युवाओं, जीविका दीदियों, सामाजिक संगठनों और समाज के दूसरे वर्गों को इस अभियान से जोड़ना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त, स्वस्थ और उज्ज्वल बिहार बनाने के लिए अभियान को लगातार और प्रभावी तरीके से चलाना होगा। इसमें जीविका की करीब 1.81 करोड़ दीदियों और ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। सूखे नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश मुख्यमंत्री ने शराबबंदी के साथ-साथ चरस, हेरोइन और अफीम जैसे नशीले पदार्थों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने जब्ती के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सूखे नशे के बढ़ते प्रचलन को गंभीरता से लेने की जरूरत है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में वर्ष 2024 में 282 किलोग्राम चरस जब्त की गई थी। वर्ष 2025 में यह मात्रा बढ़कर 400 किलोग्राम हो गई। इसी तरह, वर्ष 2024 में 42 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में इसकी मात्रा बढ़कर 65 किलोग्राम हो गई। वर्ष 2025 में 77 किलोग्राम अफीम भी जब्त की गई। मुख्यमंत्री ने पुलिस और मद्य निषेध विभाग के अधिकारियों को नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए और संबंधित जिलों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने बताया कि बिहार में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ करीब 1,700 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों के निपटारे के लिए कई जिलों में विशेष न्यायालयों की व्यवस्था की गई है। 2016 में लागू हुई थी शराबबंदी मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए बिहार में शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया था। उस समय राज्य के बजट का आकार करीब 50 से 55 हजार करोड़ रुपये था। इसके बावजूद राजस्व की चिंता किए बिना शराबबंदी को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने नीतीश कुमार के इस फैसले के लिए उन्हें बधाई देते हुए कहा कि अब शराबबंदी को प्रभावी बनाए रखने के साथ-साथ सभी प्रकार के नशीले पदार्थों के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने इन प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार जताया। विद्यार्थियों के आवेदनों के निपटारे की भी जानकारी दी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थी सहयोग शिविर में मिले आवेदनों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि शिविर के माध्यम से अब तक 1,755 आवेदन मिले हैं, जिनमें से 1,650 का निपटारा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को न्याय नहीं मिला है या जो किसी आदेश से संतुष्ट नहीं हैं, वे राज्यस्तरीय सहयोग शिविर में आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को न्याय मिलना जरूरी है, तभी बिहार विकास और उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ सकेगा।  

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