बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक विवादित बयान और विरोधस्वरूप भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के देशव्यापी प्रदर्शन के बीच मंगलवार को सभी राजनीतिक दलों की अशोभनीय टीका-टिप्पणी व बयानबाजी की बढ़ती हुई होड़ को अनुचित करार दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने आधिकारिक एक्स पर एक पोस्ट में कहा, भारतीय राजनीति में आपसी विश्वास, द्वेष, कटुता, आरोप-प्रत्यारोप आदि का स्तर, गिरते-गिरते अब व्यक्तिगत स्तर पर भी काफी बेलगाम होकर असंसदीय, अमर्यादित, अपमानजनक, संकीर्ण व जातिवाद से ग्रसित होता हुआ, हिंसक बयानबाजी तक पहुंच जाना अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि यह देश की गरिमा व मान-मर्यादा आदि के लिए भी अति-चिन्तनीय है।
मायावती ने कहा, शीर्ष स्तर पर आसीन लोगों को भले ही एक-दूसरे के प्रति समुचित सम्मान नहीं हो, लेकिन आपत्तिजनक एवं विषैली राजनीति को अवश्य ही किसी भी प्रकार से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खासकर बढ़ती संकीर्ण व गरीब-विरोधी स्वार्थी राजनीति के प्रचलन के कारण लोगों का भरोसा यहां की राजनीतिक व्यवस्था पर कमजोर होना कतई भी देश व जनहित में नहीं होगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सरकारी स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार व चुनावी प्रक्रिया पर भी उंगली उठने के कारण जनता में पहले से ही काफी बेचैनी है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘ऐसे में नेताओं के बीच नाक की लड़ाई स्थिति को और भी अधिक विषम बना रही है, जबकि जनता की चाहत देश की बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी व महंगाई आदि ज्वलंत समस्याओं के निदान पर सभी का ध्यान केन्द्रित करने की है। बसपा प्रमुख ने कहा, ऐसे में ख़ासकर सभी पार्टियों व उनके नेताओं के बीच अशोभनीय टीका-टिप्पणी व बयानबाजी का बढ़ती हुई होड़ यहां राजनीतिक माहौल को और भी अधिक कड़वा व विषैला बना देगी।’’
उन्होंने कहा कि यह अनुचित है और सभी लोग इस ओर जरूर समुचित ध्यान दें तो यह बेहतर होगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की विवादित टिप्पणी के विरोध में सोमवार को देश भर में भाजपा ने प्रदर्शन किया।
पटना में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक श्रोता की ‘‘प्रधानमंत्री कहीं नहीं जाएंगे’’ की टिप्पणी के जवाब में खरगे ने कहा था, ‘‘मोदी का बाप भी जाएगा।’’
यह घटना पटना में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसे खरगे संबोधित कर रहे थे।

