सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को कड़ी फटकार लगाई। यह फटकार उन दवा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए लगाई गई, जो कथित तौर पर ‘लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी’ (एक महत्वपूर्ण एंटीफंगल दवा) का निर्माण और बिक्री कर रही थीं। ये कंपनियां कोविड-19 महामारी के दौरान मिली आपातकालीन मंजूरियों के आधार पर ऐसा कर रही थीं, जिनकी समय-सीमा पहले ही खत्म हो चुकी थी। कोर्ट ने पूछा कि पिछले पांच सालों से रेगुलेटरी अधिकारी क्या कर रहे थे, जबकि यह दवा बिना किसी क्लिनिकल ट्रायल और रेगुलेटरी निगरानी के बेची जा रही थी। जब ये दवाएं बिना क्लिनिकल ट्रायल और अन्य जरूरी नियमों के बेची जा रही थीं, तब आपके अधिकारी पांच साल तक क्या कर रहे थे? क्या वे सो रहे थे या फिर उनकी जेबें गर्म की गई थीं?
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जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच ने सरकार से यह सवाल पूछा। बेंच ने उन कंपनियों के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई शुरू करने में हुई देरी पर नाराजगी जताई, जिन पर महामारी के दौर की अस्थायी अनुमतियों के सहारे काम जारी रखने का आरोप है। बेंच ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही, इस साल की शुरुआत में सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ कदम उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की, आप फरवरी 2026 में जाकर जागे और जब इस कोर्ट ने आपको टोका, तब आपने नोटिस जारी करना शुरू किया। यह फटकार राजेंद्र प्रसाद द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान लगाई गई। इस याचिका में ‘लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी’ (Liposomal Amphotericin B) के निर्माण और बिक्री को जारी रखने पर सवाल उठाए गए हैं। इसे 2021 में कोविड-19 की विनाशकारी दूसरी लहर के दौरान, जब भारत में इस दवा की भारी किल्लत थी, आपातकालीन अनुमति के तहत बनाने और बेचने की छूट दी गई थी। उस समय, कोविड-19 मरीजों में ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ (जिसे आमतौर पर ‘ब्लैक फंगस’ कहा जाता है) के इलाज के लिए इस दवा की बहुत ज्यादा जरूरत थी; यह एक जानलेवा संक्रमण हो सकता है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने मामले में दाखिल नवीनतम हलफनामे का हवाला देते हुए बताया कि कई दवा कंपनियों को आपातकालीन मंजूरी तो दे दी गई, लेकिन नियामक प्राधिकरणों की ओर से इस पर कोई प्रभावी फॉलो-अप नहीं किया गया। सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने अदालत को बताया कि उनकी कंपनी को कोई आपातकालीन मंजूरी नहीं दी गई थी। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा जारी किए जाने वाले निर्देश केवल किसी एक निर्माता तक सीमित नहीं होंगे। अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए पीठ ने कहा, “हम जो भी निर्देश जारी करेंगे, वे उन सभी कंपनियों पर लागू होंगे जिन्हें कोविड के दौरान उचित परीक्षण के बिना आपातकालीन लाइसेंस दिए गए थे।

