जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, जिसके तहत चार नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इन चार नए चेहरों में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (कल्लू) शामिल हैं जो कश्मीर घाटी से हैं। वहीं, मंत्रिमंडल से एक मौजूदा मंत्री को हटाया जा सकता है।
पूर्व मंत्री और सात बार के विधायक सागर 1983 में पहली बार श्रीनगर की बटमालू सीट से जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 1987 में भी यह सीट बरकरार रखी। बाद में सागर ने खानयार सीट से चुनाव लड़ा और 1996 में वहां से जीत हासिल की।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के महासचिव सागर अब तक विधानसभा का कोई चुनाव नहीं हारे हैं। सागर ने 2024 में खानयार सीट से चुनाव जीता था। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले श्रीनगर के पूर्व उपमहापौर शेख इमरान को 9,912 मतों के अंतर से हराया था।
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके मीर ने परिसीमन के बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में त्रेहगाम सीट से जीत हासिल की थी। पहलगाम के विधायक वानी और हब्बाकदल की विधायक फिरदौस ने पहली बार मंत्री के रूप में शपथ ली। वानी पहलगाम का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जबकि फिरदौस 2024 में तीसरी बार हब्बाकदल निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गईं।
पार्टी की महिला शाखा की अध्यक्ष फिरदौस, सकीना इट्टू के बाद अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में शामिल दूसरी महिला हैं। सागर ने उर्दू में शपथ ली, जबकि सैफुल्ला, फिरदौस और वानी ने अंग्रेजी में शपथ ग्रहण की। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर, नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा, नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और सत्तारूढ़ गठबंधन तथा विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों सहित अन्य लोग मौजूद थे। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में पहले छह मंत्री थे। नियमों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रिमंडल के सदस्यों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत तक हो सकती है।
जम्मू कश्मीर विधानसभा में 90 सदस्य हैं। सरकार की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने खुद को मंत्रिमंडल से दूर रखा है। पार्टी अपने इस रुख पर कायम है कि जब तक जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाता, तब तक वह मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होगी।

