चंदन चौहान| खगड़िया जिले में बाढ़ और बारिश के बाद खेतों में जमा पानी निकालने को लेकर दो विभागों के बीच जिम्मेदारी का पेंच फंस गया है। इसका खामियाजा खगड़िया सदर और अलौली क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2 और ड्रेनेज डिवीजन समस्तीपुर के बीच जल निकासी की जिम्मेदारी को लेकर खींचतान के कारण करीब 7500 एकड़ खेतों में अब भी जलजमाव बरकरार है। समय पर पानी नहीं निकला तो हजारों एकड़ जमीन पर रबी फसल की बुआई नहीं हो सकेगी। पिछले साल भी समय पर बुआई नहीं होने के कारण हजारों एकड़ जमीन परती रह गई थी। ऐसे में इस बार भी किसानों के सामने खेती और आजीविका का संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। जलजमाव की समस्या से सदर प्रखंड के धुसमुरी विशनपुर, भदास, बछौता, उत्तर माड़र, माड़र दक्षिण और सन्हौली-रसौंक पंचायतों के सैकड़ों किसान प्रभावित हैं। हर साल बरसात और बाढ़ के बाद इन इलाकों की हजारों एकड़ जमीन जलजमाव की चपेट में आ जाती है। पानी की निकासी में देरी होने से खेतों की जुताई और रबी फसल की बुआई प्रभावित होती है। किसानों को आशंका है कि इस बार भी समय रहते पानी नहीं निकला तो उन्हें पिछले साल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जल निकासी की समस्या को लेकर पिछले साल किसानों ने आंदोलन किया था। किसानों के दबाव के बाद विभाग को इटवा स्लुइस गेटों से गाद निकलवाने और जल निकासी की दिशा में काम करना पड़ा था। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी नवीन कुमार भी पूरे दलबल के साथ इटवा स्लुइस गेट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उस समय तटबंध पर दो नए स्लूइस गेट बनाने का आश्वासन दिया गया था। दोनों स्लुइस गेट का निर्माण वर्ष 2025 में ही होना था, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी निर्माण की फाइल विभाग में अटकी हुई है। चंदन चौहान| खगड़िया जिले में बाढ़ और बारिश के बाद खेतों में जमा पानी निकालने को लेकर दो विभागों के बीच जिम्मेदारी का पेंच फंस गया है। इसका खामियाजा खगड़िया सदर और अलौली क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2 और ड्रेनेज डिवीजन समस्तीपुर के बीच जल निकासी की जिम्मेदारी को लेकर खींचतान के कारण करीब 7500 एकड़ खेतों में अब भी जलजमाव बरकरार है। समय पर पानी नहीं निकला तो हजारों एकड़ जमीन पर रबी फसल की बुआई नहीं हो सकेगी। पिछले साल भी समय पर बुआई नहीं होने के कारण हजारों एकड़ जमीन परती रह गई थी। ऐसे में इस बार भी किसानों के सामने खेती और आजीविका का संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। जलजमाव की समस्या से सदर प्रखंड के धुसमुरी विशनपुर, भदास, बछौता, उत्तर माड़र, माड़र दक्षिण और सन्हौली-रसौंक पंचायतों के सैकड़ों किसान प्रभावित हैं। हर साल बरसात और बाढ़ के बाद इन इलाकों की हजारों एकड़ जमीन जलजमाव की चपेट में आ जाती है। पानी की निकासी में देरी होने से खेतों की जुताई और रबी फसल की बुआई प्रभावित होती है। किसानों को आशंका है कि इस बार भी समय रहते पानी नहीं निकला तो उन्हें पिछले साल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जल निकासी की समस्या को लेकर पिछले साल किसानों ने आंदोलन किया था। किसानों के दबाव के बाद विभाग को इटवा स्लुइस गेटों से गाद निकलवाने और जल निकासी की दिशा में काम करना पड़ा था। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी नवीन कुमार भी पूरे दलबल के साथ इटवा स्लुइस गेट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उस समय तटबंध पर दो नए स्लूइस गेट बनाने का आश्वासन दिया गया था। दोनों स्लुइस गेट का निर्माण वर्ष 2025 में ही होना था, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी निर्माण की फाइल विभाग में अटकी हुई है।

