नालंदा के युवा पर्यावरणविद् राहुल कुमार ने राष्ट्रीय पटल पर जिले और राज्य का गौरव बढ़ाया है। राहुल का चयन यूनिसेफ के वैश्विक यूथ प्लेटफॉर्म ‘युवा’ की प्रतिष्ठित ‘यंग पीपल्स एक्शन टीम’ 2026-27 के सदस्य और यूथ एडवाइजर के रूप में हुआ है। इस राष्ट्रीय दायित्व के लिए देशभर से लगभग 6,000 प्रतिभाशाली युवाओं ने आवेदन किया था। कई चरणों की बेहद प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के उपरांत राहुल कुमार ने इस राष्ट्रीय सलाहकार समिति में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। राष्ट्रीय मंच पर रखेंगे जमीनी अनुभव और युवा विजन यूनिसेफ युवा के सलाहकार के रूप में राहुल कुमार अब युवाओं से जुड़े नीतिगत निर्णयों, पर्यावरण अभियानों और कौशल विकास से जुड़ी राष्ट्रीय योजनाओं में अपनी सक्रिय सलाह और भूमिका निभाएंगे। अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राहुल ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) रक्षा और सामुदायिक सहभागिता के दौरान मिले एक दशक के अनुभवों को राष्ट्रीय मंच पर साझा करना है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास युवाओं के नेतृत्व में ठोस बदलाव लाने, जमीनी समुदाय को संगठित करने तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच एक सतत और समावेशी भविष्य के निर्माण में योगदान देना रहेगा। राष्ट्रीय मंच पर रखेंगे जमीनी अनुभव और युवा विजन यूनिसेफ युवा के सलाहकार के रूप में राहुल कुमार अब युवाओं से जुड़े नीतिगत निर्णयों, पर्यावरण अभियानों और कौशल विकास से जुड़ी राष्ट्रीय योजनाओं में अपनी सक्रिय सलाह और भूमिका निभाएंगे। अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राहुल ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) रक्षा और सामुदायिक सहभागिता के दौरान मिले एक दशक के अनुभवों को राष्ट्रीय मंच पर साझा करना है। उनका प्रयास युवाओं के नेतृत्व में ठोस बदलाव लाने, जमीनी समुदाय को संगठित करने तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच एक सतत और समावेशी भविष्य के निर्माण में योगदान देना रहेगा। दसवीं कक्षा में पक्षी अवलोकन से शुरू हुई थी यात्रा राहुल कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जड़ें वर्ष 2014 से जुड़ी हैं। जब वे दसवीं कक्षा के छात्र थे, तब उन्होंने अपने कुछ उत्साही युवा साथियों के साथ मिलकर पक्षी अवलोकन के उद्देश्य से एक छोटा सा समूह बनाया। उस समय मुख्य लक्ष्य अपने आसपास मौजूद जैव विविधता को समझना, उसे लिपिबद्ध करना और अनुभवों को आपस में साझा करना था। टीम ने राजगीर के वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों, पंचाने नदी के बेसिन तथा गिद्धी झील और पुष्करणी झील जैसी महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का नियमित भ्रमण शुरू किया। इन यात्राओं के दौरान पक्षियों, तितलियों, दुर्लभ पेड़-पौधों, सरीसृपों और जलीय जीवों का दस्तावेजीकरण किया जाने लगा। कठिनाइयों और उपेक्षा के बीच ‘बिपसा’ से ‘एमएनसीटी’ तक का सफर समय के साथ जब स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर मानवीय गतिविधियों के खतरों का एहसास हुआ, तो टीम ने स्कूलों और ग्रामीण समुदायों के बीच जाकर जागरूकता फैलाना शुरू किया। शुरुआत में उपेक्षा, संसाधनों के अभाव और उपहास का सामना करने के बावजूद यह युवा टीम नहीं रुकी। अभियान को ‘बिहार पर्यावरण संरक्षण अभियान’ का रूप दिया गया। धीरे-धीरे शिक्षकों, पर्यावरणविदों, स्थानीय नागरिकों और सरकारी विभागों का साथ मिलने लगा। इस एक दशक लंबी यात्रा और बढ़ती वैश्विक जिम्मेदारियों को देखते हुए वर्ष 2026 में इस अभियान को ‘मगध नेचर कंजर्वेशन ट्रस्ट’के रूप में औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की वन्यजीव गणनाओं में दर्ज कराई मौजूदगी राहुल और उनकी टीम ने बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ मिलकर गंगा नदी डॉल्फिन (गंगा डॉल्फिन) के नियमित अनुश्रवण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में बतौर मास्टर ट्रेनर योगदान, बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद के अंतर्गत जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन एवं पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर का निर्माण, झारखंड में अखिल भारतीय बाघ अनुमान कार्य, तथा बिहार में ‘सिटिजन साइंस’ के जरिए युवाओं को बर्ड वॉचिंग से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया। जिलेभर में खुशी की लहर नालंदा की ऐतिहासिक भूमि से निकलकर यूनिसेफ के राष्ट्रीय सलाहकार मंच तक पहुंचने पर जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों, शिक्षकों और प्रशासनिक हलकों ने राहुल कुमार को बधाई दी है। लोगों का कहना है कि राहुल की यह उपलब्धि बिहार के युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रेरित करेगी। नालंदा के युवा पर्यावरणविद् राहुल कुमार ने राष्ट्रीय पटल पर जिले और राज्य का गौरव बढ़ाया है। राहुल का चयन यूनिसेफ के वैश्विक यूथ प्लेटफॉर्म ‘युवा’ की प्रतिष्ठित ‘यंग पीपल्स एक्शन टीम’ 2026-27 के सदस्य और यूथ एडवाइजर के रूप में हुआ है। इस राष्ट्रीय दायित्व के लिए देशभर से लगभग 6,000 प्रतिभाशाली युवाओं ने आवेदन किया था। कई चरणों की बेहद प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के उपरांत राहुल कुमार ने इस राष्ट्रीय सलाहकार समिति में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। राष्ट्रीय मंच पर रखेंगे जमीनी अनुभव और युवा विजन यूनिसेफ युवा के सलाहकार के रूप में राहुल कुमार अब युवाओं से जुड़े नीतिगत निर्णयों, पर्यावरण अभियानों और कौशल विकास से जुड़ी राष्ट्रीय योजनाओं में अपनी सक्रिय सलाह और भूमिका निभाएंगे। अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राहुल ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) रक्षा और सामुदायिक सहभागिता के दौरान मिले एक दशक के अनुभवों को राष्ट्रीय मंच पर साझा करना है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास युवाओं के नेतृत्व में ठोस बदलाव लाने, जमीनी समुदाय को संगठित करने तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच एक सतत और समावेशी भविष्य के निर्माण में योगदान देना रहेगा। राष्ट्रीय मंच पर रखेंगे जमीनी अनुभव और युवा विजन यूनिसेफ युवा के सलाहकार के रूप में राहुल कुमार अब युवाओं से जुड़े नीतिगत निर्णयों, पर्यावरण अभियानों और कौशल विकास से जुड़ी राष्ट्रीय योजनाओं में अपनी सक्रिय सलाह और भूमिका निभाएंगे। अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राहुल ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) रक्षा और सामुदायिक सहभागिता के दौरान मिले एक दशक के अनुभवों को राष्ट्रीय मंच पर साझा करना है। उनका प्रयास युवाओं के नेतृत्व में ठोस बदलाव लाने, जमीनी समुदाय को संगठित करने तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच एक सतत और समावेशी भविष्य के निर्माण में योगदान देना रहेगा। दसवीं कक्षा में पक्षी अवलोकन से शुरू हुई थी यात्रा राहुल कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जड़ें वर्ष 2014 से जुड़ी हैं। जब वे दसवीं कक्षा के छात्र थे, तब उन्होंने अपने कुछ उत्साही युवा साथियों के साथ मिलकर पक्षी अवलोकन के उद्देश्य से एक छोटा सा समूह बनाया। उस समय मुख्य लक्ष्य अपने आसपास मौजूद जैव विविधता को समझना, उसे लिपिबद्ध करना और अनुभवों को आपस में साझा करना था। टीम ने राजगीर के वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों, पंचाने नदी के बेसिन तथा गिद्धी झील और पुष्करणी झील जैसी महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का नियमित भ्रमण शुरू किया। इन यात्राओं के दौरान पक्षियों, तितलियों, दुर्लभ पेड़-पौधों, सरीसृपों और जलीय जीवों का दस्तावेजीकरण किया जाने लगा। कठिनाइयों और उपेक्षा के बीच ‘बिपसा’ से ‘एमएनसीटी’ तक का सफर समय के साथ जब स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर मानवीय गतिविधियों के खतरों का एहसास हुआ, तो टीम ने स्कूलों और ग्रामीण समुदायों के बीच जाकर जागरूकता फैलाना शुरू किया। शुरुआत में उपेक्षा, संसाधनों के अभाव और उपहास का सामना करने के बावजूद यह युवा टीम नहीं रुकी। अभियान को ‘बिहार पर्यावरण संरक्षण अभियान’ का रूप दिया गया। धीरे-धीरे शिक्षकों, पर्यावरणविदों, स्थानीय नागरिकों और सरकारी विभागों का साथ मिलने लगा। इस एक दशक लंबी यात्रा और बढ़ती वैश्विक जिम्मेदारियों को देखते हुए वर्ष 2026 में इस अभियान को ‘मगध नेचर कंजर्वेशन ट्रस्ट’के रूप में औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की वन्यजीव गणनाओं में दर्ज कराई मौजूदगी राहुल और उनकी टीम ने बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ मिलकर गंगा नदी डॉल्फिन (गंगा डॉल्फिन) के नियमित अनुश्रवण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में बतौर मास्टर ट्रेनर योगदान, बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद के अंतर्गत जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन एवं पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर का निर्माण, झारखंड में अखिल भारतीय बाघ अनुमान कार्य, तथा बिहार में ‘सिटिजन साइंस’ के जरिए युवाओं को बर्ड वॉचिंग से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया। जिलेभर में खुशी की लहर नालंदा की ऐतिहासिक भूमि से निकलकर यूनिसेफ के राष्ट्रीय सलाहकार मंच तक पहुंचने पर जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों, शिक्षकों और प्रशासनिक हलकों ने राहुल कुमार को बधाई दी है। लोगों का कहना है कि राहुल की यह उपलब्धि बिहार के युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रेरित करेगी।

