नगर निगम पर धरने की चेतावनी से हरकत में प्रशासन:कचरा उठान ठप, 2 सप्ताह में हांफा नगर निगम का सफाई तंत्र; बैटरी बैकअप कमजोर

नगर निगम पर धरने की चेतावनी से हरकत में प्रशासन:कचरा उठान ठप, 2 सप्ताह में हांफा नगर निगम का सफाई तंत्र; बैटरी बैकअप कमजोर

शहर में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थिति यह है कि शहरभर में करीब 50 टिपर ड्राइवर न मिलने के कारण खड़े धूल फांक रहे हैं। ड्राइवरों की कमी और तकनीकी दिक्कतों के चलते बीकानेर का सफाई तंत्र पूरी तरह हांफता नजर आ रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस पार्षदों के तीखे विरोध और सोमवार को नगर निगम पर धरने की चेतावनी के चलते प्रशासन हरकत में है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष चेतना डोटासरा के वार्ड 17 में अनोखा तरीका अपनाते हुए टिपर की जगह ट्रैक्टरों के जरिए घर-घर से कचरा उठवाना शुरू कर दिया है। दरअसल दो दिन पहले वार्ड 17 की पार्षद एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष चेतना डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने डंपिंग यार्ड पर जाकर जोरदार प्रदर्शन किया था। तब डंपिंग यार्ड पर अत्यधिक बदबू और छुट्टियों के चलते धरना स्थगित कर दिया गया मगर पार्षदों ने सोमवार को सीधे नगर निगम कार्यालय पर बड़े धरने की चेतावनी दे दी। वार्ड 17 में जब नियमित टिपर उपलब्ध नहीं हो पाया, तो निगम ने कचरा उठाने के लिए फौरन ट्रैक्टर भेज दिए। इसका वीडियो चेतना डोटासरा के पति सुरेन्द्र डोटासरा ने सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है, जो शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालात यह हैं कि शहर में करीब 50 टिपर खड़े होने के बावजूद चालकों (ड्राइवर्स) का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। यह गंभीर समस्या आज की नहीं, बल्कि पिछले 2 अक्टूबर से चली आ रही है। ठेका लिए हुए फर्म को 23 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित फर्म अपना सिस्टम पटरी पर लाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। पूर्व में निगम आयुक्त ने भी स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जब तक नई व्यवस्था सुचारू रूप से शुरू नहीं होती, तब तक फर्म को किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। पूरा महीना बीतने को है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों ने वोट मुझे दिए हैं। आयुक्त या उपायुक्त को नहीं दिए। त्योहार है तो मुझे पता है कि शहर में परेशानी क्या है। इसलिए मैने खुद माइक खरीदा है। ट्रैक्टर पर लगाया। टिपर इतने छोटे हैं कि 10 घरों में ही फुल हो जाते हैं। इसलिए ट्रैक्टर लगाया ताकि दीवाली का कचरा तो साफ हो। पर निगम समझ नहीं रहा। सहनशीलता की हद पार हो रही है। चेतना डोटासरा, पार्षद व पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम सर्वे बाकी और आधुनिक तकनीक भी हवा-हवाई ठेके की शर्तों के मुताबिक टिपर संचालन से पहले घर-घर का सर्वे होना था। इस सर्वे के बाद हर घर पर एक ऐसी स्मार्ट चिप लगाई जानी थी, जिससे जैसे ही टिपर घर के आगे से गुजरे, उसकी पूरी टाइमिंग और कचरा उठाने या न उठाने की सटीक ऑनलाइन जानकारी मिल सके। लेकिन विडंबना यह है कि अभी तक जमीनी स्तर पर सर्वे का काम ही पूरा नहीं हो पाया। त्योहारी सीजन और दीपावली की विशेष सफाई के बीच यह व्यवस्था और अधिक नाकाफी साबित हो रही है। मौजूदा टिपर आकार में इतने छोटे हैं कि दीपावली की सफाई के दौरान मात्र 10 घरों का कचरा इकट्ठा होते ही वे पूरी तरह भर जाते हैं। इन टिपरों की बैटरी क्षमता केवल तीन फेरे (ट्रिप) लगाने लायक ही है। एक बार बैटरी डिस्चार्ज होने के बाद टिपर को दोबारा चार्ज होने में 5 से 6 घंटे का लंबा समय लगता है। ट्रैक्टर निगम का, माइक खुद खरीदकर लगाया बानगी यह है कि नगर निगम के ट्रैक्टर के पास माइक नहीं था। लोगों को पता लगे कि कचरा कलेक्ट हो रहा है इसलिए पार्षद चेतना डोटसरा ने खुद माइक खरीदा। माइक ट्रैक्टर पर लगाया और फिर गली-गली कचरा उठाने को लगाया। ताकि लोगों के घरों में जमा कचरा एकत्र किया जा सके।

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