छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची से करीब 25 लाख नाम कम होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2023 के बाद आबादी बढ़ने के बावजूद राज्य में मतदाताओं की संख्या कैसे घट गई? उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के इस्तेमाल और इसके आधार पर नाम काटने की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। मोहम्मद अकबर ने दस्तावेजों के आधार पर दावा किया कि राज्य में 2023 से अब तक 24 लाख 99 हजार मतदाता कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को बताना चाहिए कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों में कितने मामले फॉर्म-7 के आधार पर थे और उनमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। रायपुर में सबसे ज्यादा 31 हजार नाम कटे अकबर के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में कुल 1 लाख 8 हजार 807 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इनमें रायपुर में 31,028, कोरबा में 15,187, दुर्ग में 7,209, बालोद में 3,903, बलौदाबाजार-भाटापारा में 2,662 और कबीरधाम में 2,234 नाम शामिल हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूछा कि इन नामों में कितने फॉर्म-7 के आधार पर हटाए गए। क्या आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों के बयान लिए गए और जिन मतदाताओं के नाम काटने की मांग की गई, उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया? गलत जानकारी देकर नाम कटवाने पर कार्रवाई का प्रावधान मोहम्मद अकबर ने कहा कि फॉर्म-7 दाखिल होने भर से किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं कट जाता। आपत्ति पर कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को सुनना और अधिकारी का आपत्ति की वैधता से संतुष्ट होना जरूरी है। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का हवाला देते हुए कहा कि जानबूझकर गलत जानकारी या घोषणा देकर मतदाता सूची से नाम कटवाने की कोशिश करने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। अकबर ने आयोग से यह भी पूछा कि कितनी शिकायतें झूठी पाई गईं और ऐसे मामलों में कितने शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। चुनावी जीत-हार के अंतर से की तुलना कांग्रेस नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा के बीच जीत-हार का अंतर 6 लाख 32 हजार वोटों का रहा, जबकि उनके दावे के मुताबिक, 2023 से अब तक मतदाताओं की संख्या में करीब 25 लाख की कमी आई है। उन्होंने इस अंतर को लेकर निर्वाचन आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। अकबर ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी हो। उन्होंने मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ा जाए और किसी भी पात्र मतदाता को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए।

