‘पेपर बेचने वाला बड़ा अपराधी है या पेपर खरीदने वाला?’ राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने परीक्षा में पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समस्या के लिए सिर्फ सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। पेपर लीक करने वाला, उसे खरीदने वाला और बीच में सॉल्वर या दूसरे माध्यमों से मदद करने वाला हर व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। जब तक पेपर बेचने और खरीदने वाले दोनों को समान रूप से जवाबदेह नहीं माना जाएगा, तब तक इस गड़बड़ी पर रोक लगाना मुश्किल है। राज्यसभा के उपसभापति शनिवार को मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज स्थित आचार्य जेबी कृपलानी सभागार में आयोजित नया बस देवी स्मृति व्याख्यानमाला में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय ‘आधुनिक शिक्षा में नैतिक सशक्तिकरण की आवश्यकता’ था। उपसभापति ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी को केवल सरकारी व्यवस्था की नाकामी मानना अधूरा नजरिया है। इसमें शामिल हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पेपर लीक में सिर्फ बेचने वाला नहीं, खरीदने वाला भी जिम्मेदार उपसभापति हरिवंश ने परीक्षा में गड़बड़ी के पूरे तंत्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की घटना में केवल उसे बाहर निकालने वाला ही नहीं, बल्कि उसे खरीदकर अनुचित लाभ लेने वाला भी जिम्मेदार है। परीक्षा में शामिल हर व्यक्ति और इस प्रक्रिया में मदद करने वालों की भूमिका की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परीक्षा केंद्रों पर निगरानी तक कई स्तरों पर जिम्मेदारी होने की बात कही। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति पैसे देकर पेपर खरीदता है और दूसरा उसे बेचता है, तो दोनों इस गलत काम में भागीदार हैं। केवल व्यवस्था को दोष देकर ऐसे मामलों का समाधान नहीं किया जा सकता। नैतिकता के बिना शिक्षा और प्रतिभा अधूरी उपसभापति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रतियोगी परीक्षा पास करना, नौकरी हासिल करना या प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेना नहीं है। ज्ञान और प्रतिभा के साथ चरित्र और नैतिकता भी जरूरी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा में अनुचित तरीके अपनाकर हासिल की गई सफलता शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य के विपरीत है। उन्होंने अपने बचपन के एक शिक्षक की सीख का उल्लेख करते हुए कहा कि धन खोने पर सब कुछ नहीं खोता, स्वास्थ्य खोने पर कुछ खोता है, लेकिन चरित्र खोने पर सब कुछ खो जाता है। उन्होंने इस विचार को आज की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि नैतिक मूल्यों के बिना ज्ञान का सही उपयोग संभव नहीं है। गांधी और भारतीय विचार परंपरा का दिया उदाहरण उपसभापति ने महात्मा गांधी, श्री अरविंद और गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा में भारतीय विचार परंपरा और नैतिक मूल्यों को भी जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने बड़ी कंपनियों और प्रतिष्ठित संस्थानों का उदाहरण देकर समझाया कि केवल बौद्धिक क्षमता और तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है; ईमानदारी और चरित्र भी उतने ही जरूरी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता एलएस कॉलेज की प्राचार्य प्रो. डॉ. कनुप्रिया ने की। बोचहां विधायक बेबी कुमारी, स्त्री रोग विशेषज्ञ अर्चना कुमारी और स्मृति व्याख्यानमाला के संस्थापक न्यासी क्रांति प्रकाश भी मौजूद थे। संचालन डॉ. कौशल किशोर ने किया। ‘पेपर बेचने वाला बड़ा अपराधी है या पेपर खरीदने वाला?’ राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने परीक्षा में पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समस्या के लिए सिर्फ सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। पेपर लीक करने वाला, उसे खरीदने वाला और बीच में सॉल्वर या दूसरे माध्यमों से मदद करने वाला हर व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। जब तक पेपर बेचने और खरीदने वाले दोनों को समान रूप से जवाबदेह नहीं माना जाएगा, तब तक इस गड़बड़ी पर रोक लगाना मुश्किल है। राज्यसभा के उपसभापति शनिवार को मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज स्थित आचार्य जेबी कृपलानी सभागार में आयोजित नया बस देवी स्मृति व्याख्यानमाला में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय ‘आधुनिक शिक्षा में नैतिक सशक्तिकरण की आवश्यकता’ था। उपसभापति ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी को केवल सरकारी व्यवस्था की नाकामी मानना अधूरा नजरिया है। इसमें शामिल हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पेपर लीक में सिर्फ बेचने वाला नहीं, खरीदने वाला भी जिम्मेदार उपसभापति हरिवंश ने परीक्षा में गड़बड़ी के पूरे तंत्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की घटना में केवल उसे बाहर निकालने वाला ही नहीं, बल्कि उसे खरीदकर अनुचित लाभ लेने वाला भी जिम्मेदार है। परीक्षा में शामिल हर व्यक्ति और इस प्रक्रिया में मदद करने वालों की भूमिका की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परीक्षा केंद्रों पर निगरानी तक कई स्तरों पर जिम्मेदारी होने की बात कही। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति पैसे देकर पेपर खरीदता है और दूसरा उसे बेचता है, तो दोनों इस गलत काम में भागीदार हैं। केवल व्यवस्था को दोष देकर ऐसे मामलों का समाधान नहीं किया जा सकता। नैतिकता के बिना शिक्षा और प्रतिभा अधूरी उपसभापति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रतियोगी परीक्षा पास करना, नौकरी हासिल करना या प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेना नहीं है। ज्ञान और प्रतिभा के साथ चरित्र और नैतिकता भी जरूरी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा में अनुचित तरीके अपनाकर हासिल की गई सफलता शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य के विपरीत है। उन्होंने अपने बचपन के एक शिक्षक की सीख का उल्लेख करते हुए कहा कि धन खोने पर सब कुछ नहीं खोता, स्वास्थ्य खोने पर कुछ खोता है, लेकिन चरित्र खोने पर सब कुछ खो जाता है। उन्होंने इस विचार को आज की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि नैतिक मूल्यों के बिना ज्ञान का सही उपयोग संभव नहीं है। गांधी और भारतीय विचार परंपरा का दिया उदाहरण उपसभापति ने महात्मा गांधी, श्री अरविंद और गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा में भारतीय विचार परंपरा और नैतिक मूल्यों को भी जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने बड़ी कंपनियों और प्रतिष्ठित संस्थानों का उदाहरण देकर समझाया कि केवल बौद्धिक क्षमता और तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है; ईमानदारी और चरित्र भी उतने ही जरूरी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता एलएस कॉलेज की प्राचार्य प्रो. डॉ. कनुप्रिया ने की। बोचहां विधायक बेबी कुमारी, स्त्री रोग विशेषज्ञ अर्चना कुमारी और स्मृति व्याख्यानमाला के संस्थापक न्यासी क्रांति प्रकाश भी मौजूद थे। संचालन डॉ. कौशल किशोर ने किया।

