कौशांबी के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की डायलिसिस यूनिट किडनी रोगियों के लिए राहत का केंद्र बन रही है। चालू वर्ष में अब तक यहां आठ हजार से अधिक डायलिसिस की जा चुकी हैं। रोजाना औसतन 30 से 35 मरीजों को यह सुविधा मिल रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, मरीजों को बिना लंबा इंतजार किए डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। चार जिलों के मरीजों को मिल रहा लाभ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह के नेतृत्व में यूनिट की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया गया है। यहां कौशांबी के अलावा चित्रकूट, फतेहपुर और बांदा के मरीज भी निःशुल्क डायलिसिस करा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने और बड़े शहरों तक जाने की जरूरत कम हुई है। आयुष्मान लाभार्थियों को मुफ्त डायलाइजर यूनिट में आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थियों को निःशुल्क डायलाइजर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन भी दिया जाता है। यह इंजेक्शन किडनी रोगियों में खून की कमी यानी एनीमिया के उपचार में मदद करता है। इन सुविधाओं से मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिल रही है। समय और यात्रा खर्च की बचत मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को उपचार के लिए बड़े शहरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ रहा है। नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों को इससे खास राहत मिल रही है। उनकी यात्रा पर होने वाले खर्च और आने-जाने में लगने वाले समय की भी बचत हो रही है। डॉक्टरों और स्टाफ की अहम भूमिका डायलिसिस यूनिट के संचालन में डॉ. सुरभि प्रकाश, डॉ. अंजन दास, मैनेजर अर्णब बनर्जी और स्टाफ ललिता सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज तिवारी भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहे हैं।

