झालावाड़ में लोकमंथन यात्रा पूरी हो गई है। यह यात्रा 2 सितंबर को रामदेवरा रुणीजा, जैसलमेर से शुरू हुई थी और राजस्थान के 41 जिलों से होकर गुराड़ी गांव में खत्म हुई। इसका मकसद लोक दर्शन और लोक चेतना जगाना था। यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने बताया- इसका मुख्य उद्देश्य प्राचीन लोक संस्कृति, विरासत, परंपराएं, रीति-रिवाज और कलाओं को फिर से जीवंत करना है। इसमें लोक स्वास्थ्य, कहावतें, काव्य, गीत और वाद्य यंत्र शामिल हैं, जिन्हें लोग भूलते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान शहरों में 5 घंटे के कार्यक्रम हुए, जिनमें स्थानीय कलाकार और लोक विधा के जानकार शामिल हुए। प्रत्येक जिले के एक गांव में भी ऐसे कार्यक्रम हुए, जहां ग्रामीणों ने स्वागत किया और परंपरागत खेलों का आयोजन हुआ। डॉ. कुमावत ने यह भी जानकारी दी कि 4 से 6 दिसंबर 2026 को जयपुर में अंतरराष्ट्रीय लोकमंथन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। लोक संस्कृति का प्रवाह नई पीढ़ी में बड़े इसके लिए इसको पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए हमने राज्य सरकार को सुझाव दिया है। राजस्थान के शिक्षा विभाग को भी हमने बोला है कि प्रत्येक महीने में एक बार लोक विरासत प्रकल्प यह शुरू किया जाए और नो बैग डे के दिन सभी बच्चों को अपने दादा-दादी नाना नानी से पूछी गई बातों को साझा करने का अवसर दिया जाना चाहिए। पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण, अंग्रेजी माध्यम स्कूल और मोबाइल के आने के बाद से बच्चों का उनके दादा दादी के पास बैठना कम हो जाना इसके प्रमुख कारण है। मोबाइल का दुष्प्रभाव इतना ज्यादा है कि घर में सारे लोग बड़े बुजुर्गों के पास आजकल नहीं बैठते है।

