जमीन विवाद में हुई थी रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर की हत्या:4 आरोपी गिरफ्तार, कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़े गए मुख्य आरोपी, आरा में 15 दिन पहले रची थी साजिश

जमीन विवाद में हुई थी रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर की हत्या:4 आरोपी गिरफ्तार, कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़े गए मुख्य आरोपी, आरा में 15 दिन पहले रची थी साजिश

आरा के कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर राम कुमार सिंह हत्याकांड में भोजपुर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसपी अवधेश दीक्षित ने बुधवार को बताया कि 14 कट्ठा जमीन के विवाद में हत्या की गई थी। गिरफ्तार आरोपियों में चंदन सिंह, कथित पत्रकार मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, अभिषेक कुमार और टीपू शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जबकि टीपू को भोजपुर के टाउन इलाके से पकड़ा गया। मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था। मुख्य आरोपी चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को गुरुवार को पेशी की जाएगी। 14 कट्ठा जमीन के विवाद में हत्या का आरोप एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि 15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे नवादा थाना क्षेत्र के कनकपुरी मोहल्ले में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास राम कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी। मामले में नवादा थाना में कांड संख्या 784/26 दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई, जिसका नेतृत्व एसडीपीओ सदर-1 कर रहे थे। पुलिस मृतक के परिजनों के आवेदन और हत्या के संभावित कारणों की जांच कर रही थी। 2006 से बेटे के नाम पर थी जमीन, 2025 में रजिस्ट्री का दावा पुलिस के अनुसार, विवादित जमीन भोजपुर जिले के सिंगही में है। इसका थाना नंबर 245, खेसरा नंबर 69 और खाता नंबर 88 बताया गया है। एसपी ने बताया कि वर्ष 2006 से यह जमीन राम कुमार सिंह के बेटे के नाम पर थी। वर्ष 2020 में इसकी घेराबंदी भी कराई गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि विपक्षी पक्ष ने वर्ष 2025 में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी ली। इसके आधार पर अलग-अलग लोगों के नाम रजिस्ट्री कराई गई और जमीन का म्यूटेशन भी कराया गया। एसपी ने कहा कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि राम कुमार सिंह का लंबे समय से जमीन पर कब्जा होने के बावजूद इसकी रजिस्ट्री और म्यूटेशन किस आधार पर कराया गया। हत्या से 15-20 दिन पहले बनाई गई थी योजना एसपी के मुताबिक, आरोपियों ने हत्या से करीब 15 से 20 दिन पहले वारदात की योजना बनाई थी। इसमें हत्या को अंजाम देने, शूटर की भूमिका तय करने और घटना के बाद फरार होने की रणनीति शामिल थी। पुलिस का दावा है कि वारदात से तीन-चार दिन पहले आरोपियों ने अपने बैंक खातों में मौजूद रकम निकालकर पत्नी के खातों में ट्रांसफर कर दी थी। उनकी पत्नियों को भी दूसरी जगह भेज दिया गया था। सिलीगुड़ी से गंगटोक होते हुए कोलकाता पहुंचे आरोपी एसपी ने बताया कि आरोपियों ने पहचान छिपाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए नए सिम कार्ड और मोबाइल फोन खरीदे। इसके अलावा नया बैंक खाता भी बनाया गया। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपी भोजपुर से निकलकर पहले सिलीगुड़ी गए, फिर गंगटोक पहुंचे और वहां से कोलकाता चले गए। अलग-अलग जगहों पर ठहरने के दौरान उन्होंने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की। कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के समय भी चंदन सिंह अपनी असली पहचान बताने से बच रहा था। जमीन की रजिस्ट्री में मनोज लक्की की भूमिका की जांच एसपी ने बताया कि मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की की भूमिका विवादित जमीन में साझेदारी और रजिस्ट्री से जुड़ी हुई सामने आई है। पुलिस के अनुसार, चंदन सिंह और राम कुमार सिंह के बीच जमीन विवाद को लेकर बातचीत या मध्यस्थता के दौरान मनोज लक्की ने चंदन सिंह के पक्ष में भूमिका निभाई थी। एसपी ने यह भी बताया कि जांच के दौरान चंदन सिंह के अन्य लोगों के साथ मिलकर जमीनों को विवादित बनाने की गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी मिली है। पुलिस को ऐसे समूहों और संभावित सिंडिकेट के बारे में भी जानकारी मिली है, जो दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन विवाद पैदा करते हैं। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि इन पहलुओं पर अभी जांच जारी है। हत्या में इस्तेमाल हथियार अभी बरामद नहीं एसपी ने बताया कि हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार अभी बरामद नहीं हुआ है। चंदन सिंह के घर पर छापेमारी के दौरान एक पिस्तौल मिली है। पुलिस जांच कर रही है कि इस पिस्तौल का इस्तेमाल राम कुमार सिंह की हत्या में हुआ था या किसी दूसरे हथियार से वारदात को अंजाम दिया गया। एसपी के अनुसार, पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं और चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। मामले में स्पीडी ट्रायल कराने की कोशिश होगी। घटना में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। आरा के कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर राम कुमार सिंह हत्याकांड में भोजपुर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसपी अवधेश दीक्षित ने बुधवार को बताया कि 14 कट्ठा जमीन के विवाद में हत्या की गई थी। गिरफ्तार आरोपियों में चंदन सिंह, कथित पत्रकार मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, अभिषेक कुमार और टीपू शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जबकि टीपू को भोजपुर के टाउन इलाके से पकड़ा गया। मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था। मुख्य आरोपी चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को गुरुवार को पेशी की जाएगी। 14 कट्ठा जमीन के विवाद में हत्या का आरोप एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि 15 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे नवादा थाना क्षेत्र के कनकपुरी मोहल्ले में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास राम कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी। मामले में नवादा थाना में कांड संख्या 784/26 दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई, जिसका नेतृत्व एसडीपीओ सदर-1 कर रहे थे। पुलिस मृतक के परिजनों के आवेदन और हत्या के संभावित कारणों की जांच कर रही थी। 2006 से बेटे के नाम पर थी जमीन, 2025 में रजिस्ट्री का दावा पुलिस के अनुसार, विवादित जमीन भोजपुर जिले के सिंगही में है। इसका थाना नंबर 245, खेसरा नंबर 69 और खाता नंबर 88 बताया गया है। एसपी ने बताया कि वर्ष 2006 से यह जमीन राम कुमार सिंह के बेटे के नाम पर थी। वर्ष 2020 में इसकी घेराबंदी भी कराई गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि विपक्षी पक्ष ने वर्ष 2025 में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी ली। इसके आधार पर अलग-अलग लोगों के नाम रजिस्ट्री कराई गई और जमीन का म्यूटेशन भी कराया गया। एसपी ने कहा कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि राम कुमार सिंह का लंबे समय से जमीन पर कब्जा होने के बावजूद इसकी रजिस्ट्री और म्यूटेशन किस आधार पर कराया गया। हत्या से 15-20 दिन पहले बनाई गई थी योजना एसपी के मुताबिक, आरोपियों ने हत्या से करीब 15 से 20 दिन पहले वारदात की योजना बनाई थी। इसमें हत्या को अंजाम देने, शूटर की भूमिका तय करने और घटना के बाद फरार होने की रणनीति शामिल थी। पुलिस का दावा है कि वारदात से तीन-चार दिन पहले आरोपियों ने अपने बैंक खातों में मौजूद रकम निकालकर पत्नी के खातों में ट्रांसफर कर दी थी। उनकी पत्नियों को भी दूसरी जगह भेज दिया गया था। सिलीगुड़ी से गंगटोक होते हुए कोलकाता पहुंचे आरोपी एसपी ने बताया कि आरोपियों ने पहचान छिपाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए नए सिम कार्ड और मोबाइल फोन खरीदे। इसके अलावा नया बैंक खाता भी बनाया गया। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपी भोजपुर से निकलकर पहले सिलीगुड़ी गए, फिर गंगटोक पहुंचे और वहां से कोलकाता चले गए। अलग-अलग जगहों पर ठहरने के दौरान उन्होंने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की। कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के समय भी चंदन सिंह अपनी असली पहचान बताने से बच रहा था। जमीन की रजिस्ट्री में मनोज लक्की की भूमिका की जांच एसपी ने बताया कि मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की की भूमिका विवादित जमीन में साझेदारी और रजिस्ट्री से जुड़ी हुई सामने आई है। पुलिस के अनुसार, चंदन सिंह और राम कुमार सिंह के बीच जमीन विवाद को लेकर बातचीत या मध्यस्थता के दौरान मनोज लक्की ने चंदन सिंह के पक्ष में भूमिका निभाई थी। एसपी ने यह भी बताया कि जांच के दौरान चंदन सिंह के अन्य लोगों के साथ मिलकर जमीनों को विवादित बनाने की गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी मिली है। पुलिस को ऐसे समूहों और संभावित सिंडिकेट के बारे में भी जानकारी मिली है, जो दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन विवाद पैदा करते हैं। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि इन पहलुओं पर अभी जांच जारी है। हत्या में इस्तेमाल हथियार अभी बरामद नहीं एसपी ने बताया कि हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार अभी बरामद नहीं हुआ है। चंदन सिंह के घर पर छापेमारी के दौरान एक पिस्तौल मिली है। पुलिस जांच कर रही है कि इस पिस्तौल का इस्तेमाल राम कुमार सिंह की हत्या में हुआ था या किसी दूसरे हथियार से वारदात को अंजाम दिया गया। एसपी के अनुसार, पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं और चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। मामले में स्पीडी ट्रायल कराने की कोशिश होगी। घटना में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।  

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