जयपुर. अमरीकी नागरिकों के एपल फोन में तकनीकी खराबी दूर करने का झांसा देकर उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल करने और करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले गिरोह का भांकरोटा में पर्दाफाश हुआ है। सीएसटी से मिली सूचना के आधार पर मंगलवार को भांकरोटा थाना पुलिस ने साइबर ठगी के लिए संचालित किए जा रहे कॉल सेंटर पर दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आठ युवकों और दो युवतियों समेत कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मौके से 19 मोबाइल फोन, 12 लैपटॉप और ठगी में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए गए हैं।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश के अनुसार, यह गिरोह हर महीने अमरीकी नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी के जरिए करोड़ों रुपए की रकम ऐंठता था। गिरफ्तार आरोपियों में हरियाणा के झज्जर निवासी हर्ष चौहान और अंकित, महेंद्रगढ़ निवासी रविंद्र कुमार, गुरुग्राम निवासी निशांत यादव, असम निवासी कृष्ण नेपाली, नगालैंड निवासी केवी और खोजा कुसचपन शामिल हैं। इनके अलावा सिलीगुड़ी निवासी दिया गुरुजी, आकाशी लांबा और लिशीनी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और ठगी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
युवती बनती थी बैंककर्मी
गिरोह में शामिल एक युवती बैंककर्मी बनकर लोगों से फोन पर बात करती थी। वह खुद को बैंक का कर्मचारी बताकर ग्राहकों का भरोसा जीतती और फिर बातचीत के दौरान उनके बैंक खातों से जुड़ी जरूरी जानकारी हासिल कर लेती थी। इसके बाद यह जानकारी टेलीग्राम ग्रुप में साझा की जाती थी। आरोप है कि विदेश में बैठा गिरोह का संचालक इन जानकारियों का इस्तेमाल कर बैंक खातों को हैक करता और उनमें जमा रकम निकाल लेता था। पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना गुजरात का रहने वाला बताया जा रहा है। वह अपनी पहचान और ठिकाना बदल-बदलकर कॉल सेंटर चला रहा था, ताकि पुलिस की नजर से बच सके। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। जांच के दौरान विदेश में बैठे संचालक की पहचान, अब तक की गई ठगी की कुल रकम और गिरोह में शामिल दूसरे लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।
तकनीकी मदद के नाम पर बिछाते जाल
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि लैपटॉप में एक्स लाइट सॉफ्टवेयर के जरिए टीएफएन नंबरों पर कॉल आती थीं। विदेश में बैठा गिरोह का संचालक अमरीकी नागरिकों को चालक कॉल कर एपल फोन की तकनीकी समस्या दूर करने के नाम पर सेवा शुल्क बताता था। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी जुटाने का सिलसिला शुरू होता था।

