जैसलमेर में लोमड़ी ने किया गोडावण का शिकार:सैटेलाइट ट्रैकिंग से घटना का पता चला; पंख और अवशेष मिले, 7 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना टाली

जैसलमेर में लोमड़ी ने किया गोडावण का शिकार:सैटेलाइट ट्रैकिंग से घटना का पता चला; पंख और अवशेष मिले, 7 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना टाली

जैलसमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को जंगल में सात दिन पहले छोड़े गए 6 महीने के एक नर गोडावण का मरू लोमड़ी ने शिकार कर लिया। ये घटना सम इलाके में तब हुई जब पक्षी एक प्राकृतिक जलस्रोत (गाजलर) पर पानी पीने आया था। सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए वैज्ञानिकों को घटना का पता चला। मौके पर पहुंची टीम को पक्षी के पंख और अन्य अवशेष मिले। घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने बाकी 7 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना फिलहाल टाल दी है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और रिलीज प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी गई है। पानी पीते समय हुआ हमला, सैटेलाइट सिग्नल से मिली जानकारी जैसलमेर के सम स्थित ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए 11 गोडावणों को जंगल में बसाने की योजना बनाई गई थी। जानकारी के अनुसार, 4 अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दो गोडावणों को जंगल में छोड़ा था। इसके बाद पिछले बुधवार को दो और नर गोडावणों को छोड़ा गया। रविवार को इनमें से एक पक्षी प्राकृतिक जलस्रोत पर पानी पीने पहुंचा था। इसी दौरान झाड़ियों में छिपी मरू लोमड़ी ने उस पर हमला कर दिया। कंट्रोल रूम में मौजूद वैज्ञानिकों को सैटेलाइट सिग्नल रुकने पर घटना का संदेह हुआ और अलर्ट जारी किया गया। फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचा, तब तक लोमड़ी वहां से जा चुकी थी। टीम ने सैटेलाइट ट्रैकिंग डिवाइस बरामद कर ली। घटनास्थल से मिले खून के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। बाकी गोडावण सुरक्षित, नए सिरे से होगी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा राहत की बात यह है कि जंगल में छोड़े गए बाकी गोडावण सुरक्षित बताए जा रहे हैं। घटना के बाद WII ने शेष 7 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना रोक दी है। संस्थान की ओर से रिलीज प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जा रही है। नए पक्षियों को जंगल में छोड़ने का फैसला सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। इस घटना से हमारा मनोबल कमजोर नहीं होगा वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के निदेशक गोविंद सागर भारद्वाज के अनुसार, जंगल में शिकार होना प्राकृतिक प्रक्रिया है और ऐसे क्षेत्रों में लोमड़ियों की मौजूदगी स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि फील्ड टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। भारद्वाज ने कहा- इस घटना से गोडावण संरक्षण अभियान का मनोबल कमजोर नहीं होगा, बल्कि मिशन को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। गोडावण से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… राजस्थान में 9 करोड़ की टनल बचाएगी ‘गोडावण’:64 मीटर लंबी सुरंग में चूजों को मिलेगी शिकार करने की ट्रेनिंग जैसलमेर में आर्टिफिशियल तरीके से गोडावण का जन्म:ब्रीडिंग सेंटर में 94 हुई संख्या; 9 करोड़ से टनल बन रही पहली बार जंगल में जाएंगे राजस्थान के गोडावण:10 पक्षियों को खुले में छोड़ेंगे एक्सपर्ट, 4 महीने से टनल में जीना सीख रहे थे टनल में शिफ्ट हुए गोडावण, अब अकेले जीना सीखेंगे:खुद शिकार तलाशेंगे, जंगल जैसा माहौल मिलेगा; CCTV से 24 घंटे एक्सपर्ट रखेंगे नजर

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