बिहार शरीफ शहर में लावारिस और आक्रामक कुत्तों का आतंक अब आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ने लगा है। दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर जब चारों तरफ भक्ति और उल्लास का माहौल था, तभी नवमी की शाम (19 अक्टूबर) सड़कों पर घूम रहे कुत्तों ने तांडव मचा दिया। शहर के प्रमुख रास्तों, पूजा पंडालों और बाजार वाले इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड ने राहगीरों पर अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में 110 से अधिक लोग लहूलुहान होकर जख्मी हो गए। पीड़ितों में बड़ी संख्या उन श्रद्धालुओं की है जो अपने परिवार और बच्चों के साथ पूजा का मेला देखने निकले थे। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में जख्मी लोगों के पहुंचने का सिलसिला बढ़ता गया, जिससे अस्पताल परिसर में देर रात तक चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। कागजों तक सिमटा अभियान, निगम के शिथिल रवैये से बढ़ी परेशानी इस अप्रत्याशित घटना ने नगर निगम प्रशासन की कार्यशैली और जमीनी तैयारियों की कलई पूरी तरह खोल दी है। शहरवासियों को कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए निगम ने बड़े जोर-शोर से डॉग कैचिंग अभियान शुरू करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत में यह मुहिम महज दिखावा साबित हुई। कुछेक श्वानों को पकड़कर शहर से बाहर छोड़ देने के अलावा निगम के पास इस विकराल समस्या का कोई दीर्घकालिक समाधान नजर नहीं आ रहा। निगम अधिकारियों का सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना रवैया इस कदर हावी है कि न तो शहर में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का कोई ठोस कार्यक्रम चल रहा है और न ही सड़कों से इन खूंखार झुंडों को हटाने के लिए कोई सक्रिय टीम तैनात है। अधिकारियों की इसी शिथिलता और लापरवाही के चलते आज आम नागरिकों, महिलाओं और मासूम बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों से गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन मुस्तैद, दवाओं का पूरा स्टॉक मौजूद सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बताया कि नवमी की देर शाम से ही अस्पताल में डॉग बाइट के मरीजों की भारी तादाद आने लगी थी। हालात को देखते हुए इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया। उन्होंने शहरवासियों को आश्वस्त किया कि अस्पताल में इलाज के लिए जरूरी एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही अत्यधिक गहरे जख्मों और गंभीर रूप से जख्मी मरीजों के लिए जरूरी इम्युनोग्लोबुलिन भी प्रचुर मात्रा में मौजूद है, जिससे सभी घायलों का समय पर समुचित उपचार किया जा सका। डॉग बाइट के बाद न बरतें लापरवाही, ये सावधानियां हैं बेहद जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डॉग बाइट की स्थिति में तुरंत सही कदम उठाने की सख्त सलाह दी है। कुत्ता काटने या हल्का सा भी नाखून लगने पर सबसे पहले घाव को बिना समय गंवाए नल के बहते साफ पानी और साबुन से लगातार 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए, ताकि लार में मौजूद वायरस का प्रभाव कम हो सके। इसके बाद कटे हुए स्थान पर केवल एंटीसेप्टिक दवा लगाएं और घाव को पट्टी या कपड़े से बिल्कुल न बांधें। झाड़-फूंक के अंधविश्वास में पड़ने या जख्म पर मिर्च, तेल, चूना और राख लगाने जैसी गलतियां जानलेवा साबित हो सकती हैं। घटना के तुरंत बाद नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें और चिकित्सक की देखरेख में एंटी-रेबीज वैक्सीन का निर्धारित पूरा कोर्स समय पर लगवाएं, क्योंकि समय पर लिया गया सही उपचार ही रेबीज जैसी लाइलाज बीमारी से जीवन की रक्षा कर सकता है। बिहार शरीफ शहर में लावारिस और आक्रामक कुत्तों का आतंक अब आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ने लगा है। दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर जब चारों तरफ भक्ति और उल्लास का माहौल था, तभी नवमी की शाम (19 अक्टूबर) सड़कों पर घूम रहे कुत्तों ने तांडव मचा दिया। शहर के प्रमुख रास्तों, पूजा पंडालों और बाजार वाले इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड ने राहगीरों पर अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में 110 से अधिक लोग लहूलुहान होकर जख्मी हो गए। पीड़ितों में बड़ी संख्या उन श्रद्धालुओं की है जो अपने परिवार और बच्चों के साथ पूजा का मेला देखने निकले थे। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में जख्मी लोगों के पहुंचने का सिलसिला बढ़ता गया, जिससे अस्पताल परिसर में देर रात तक चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। कागजों तक सिमटा अभियान, निगम के शिथिल रवैये से बढ़ी परेशानी इस अप्रत्याशित घटना ने नगर निगम प्रशासन की कार्यशैली और जमीनी तैयारियों की कलई पूरी तरह खोल दी है। शहरवासियों को कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए निगम ने बड़े जोर-शोर से डॉग कैचिंग अभियान शुरू करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत में यह मुहिम महज दिखावा साबित हुई। कुछेक श्वानों को पकड़कर शहर से बाहर छोड़ देने के अलावा निगम के पास इस विकराल समस्या का कोई दीर्घकालिक समाधान नजर नहीं आ रहा। निगम अधिकारियों का सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना रवैया इस कदर हावी है कि न तो शहर में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का कोई ठोस कार्यक्रम चल रहा है और न ही सड़कों से इन खूंखार झुंडों को हटाने के लिए कोई सक्रिय टीम तैनात है। अधिकारियों की इसी शिथिलता और लापरवाही के चलते आज आम नागरिकों, महिलाओं और मासूम बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों से गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन मुस्तैद, दवाओं का पूरा स्टॉक मौजूद सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बताया कि नवमी की देर शाम से ही अस्पताल में डॉग बाइट के मरीजों की भारी तादाद आने लगी थी। हालात को देखते हुए इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया। उन्होंने शहरवासियों को आश्वस्त किया कि अस्पताल में इलाज के लिए जरूरी एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही अत्यधिक गहरे जख्मों और गंभीर रूप से जख्मी मरीजों के लिए जरूरी इम्युनोग्लोबुलिन भी प्रचुर मात्रा में मौजूद है, जिससे सभी घायलों का समय पर समुचित उपचार किया जा सका। डॉग बाइट के बाद न बरतें लापरवाही, ये सावधानियां हैं बेहद जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डॉग बाइट की स्थिति में तुरंत सही कदम उठाने की सख्त सलाह दी है। कुत्ता काटने या हल्का सा भी नाखून लगने पर सबसे पहले घाव को बिना समय गंवाए नल के बहते साफ पानी और साबुन से लगातार 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए, ताकि लार में मौजूद वायरस का प्रभाव कम हो सके। इसके बाद कटे हुए स्थान पर केवल एंटीसेप्टिक दवा लगाएं और घाव को पट्टी या कपड़े से बिल्कुल न बांधें। झाड़-फूंक के अंधविश्वास में पड़ने या जख्म पर मिर्च, तेल, चूना और राख लगाने जैसी गलतियां जानलेवा साबित हो सकती हैं। घटना के तुरंत बाद नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें और चिकित्सक की देखरेख में एंटी-रेबीज वैक्सीन का निर्धारित पूरा कोर्स समय पर लगवाएं, क्योंकि समय पर लिया गया सही उपचार ही रेबीज जैसी लाइलाज बीमारी से जीवन की रक्षा कर सकता है।

