‘बेटी की शादी के लिए कितना सामान खरीदकर रखा था। कपड़े, बर्तन और घर का एक-एक सामान जलकर राख हो गया। छठ के पारण के दिन लड़के वाले शादी की तारीख तय करने आने वाले थे। अब शादी कैसे होगी, क्या करेंगे? घर में एक भी चीज नहीं बची। सुबह हल्ला-हंगामा सुनकर बाहर निकली तो सैकड़ों लोग पहुंचे हुए थे। भीड़ ने घर में आग लगा दी। मैं घास काटकर किसी तरह परिवार चलाती हूं। क्या पता था कि बेटी की शादी के लिए जुटाया सामान ऐसे खत्म हो जाएगा।’ ये दर्द भरे शब्द मुजफ्फरपुर के प्रतापपुर गांव की शारदा देवी के हैं। रविवार शाम उनके घर में जला हुआ सामान बिखरा पड़ा था। कहीं कपड़ों और घरेलू सामान की राख थी तो कहीं आग से काली पड़ी दीवारें। घर के अंदर रखी चीजें इधर-उधर पड़ी थी। कुछ सामान जलकर पूरी तरह खत्म हो चुका था। आसपास के घरों से उठने वाला धुआं और जले सामान की गंध सुबह हुई हिंसा की कहानी बयां कर रही थी। शारदा देवी के घर में आग किसी घरेलू विवाद या दुर्घटना में नहीं लगी। गांव में दूसरे पक्ष के एक युवक की हत्या के बाद गुस्साई भीड़ पहुंची थी। भीड़ आरोपियों के घर तलाश रही थी। ग्रामीणों से आरोपी का घर पूछा गया। जब लोगों ने जानकारी नहीं होने की बात कही तो भीड़ ने दूसरे घरों को भी निशाना बना लिया। देखते ही देखते कई घरों में आग लगा दी गई। जहां शादी-ब्याह के लिए सामान जुटाया गया था, वहां भी सब कुछ जलकर राख हो गया। आरोपी के गांव की 3 तस्वीरें…
अब इस रिपोर्ट में पढ़िए विवाद कैसे शुरू हुआ, घर में क्यों आग लगाई है, मृतक नवनीत का कसूर था… सिलसिलेवार तरीके से जानिए पारू मामला मुजफ्फरपुर के करजा थाना क्षेत्र में शनिवार को मेला घूमने निकले 18 वर्षीय नवनीत कुमार की हत्या के बाद रविवार सुबह प्रतापपुर गांव में यह बवाल हुआ। हॉर्न बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद मारपीट और फिर युवक की मौत तक पहुंच गया। रविवार को शव गांव पहुंचा तो ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। इसके बाद आक्रोशित लोग प्रतापपुर पहुंचे और आरोपी पक्ष के घरों को निशाना बनाया। इस दौरान करीब पांच से छह घरों में आग लगने की बात सामने आई। कुछ घरों में रखे गैस सिलेंडर भी फट गए। पुलिस और दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। अधिकारियों ने कई घंटे तक कैंप कर स्थिति संभाली। अंतिम संस्कार के बाद स्थिति धीरे-धीरे शांत हुई। दुर्गा पूजा का मेला देखने निकला था नवनीत, पंजाब से लौटा था घर मोहम्मदपुर खाजे गांव निवासी राजेश राय का सबसे छोटा बेटा नवनीत कुमार करीब 18 साल का था। पिता राजेश राय के अनुसार, वह पिछले दो वर्षों से पंजाब में रहकर काम करता था। करीब डेढ़ महीने पहले ही मुजफ्फरपुर आया था। दुर्गा पूजा के बाद उसे दोबारा पंजाब लौटना था, लेकिन मां ने मेला देखने के लिए कुछ दिन और रुकने को कहा था। शनिवार शाम नवनीत अपने रिश्ते में लगने वाले भतीजे सुभाष कुमार के साथ मेला घूमने निकला था। दोनों बाइक से जा रहे थे। रास्ते में प्रतापपुर गांव के पास कुछ युवक सड़क पर खड़े थे। इसी दौरान हॉर्न बजाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। शुरुआत में मामला कहासुनी तक था, लेकिन कुछ ही देर में गाली-गलौज और मारपीट होने लगी। हॉर्न बजाने पर कहासुनी, फिर साथियों को बुलाकर की पिटाई नवनीत के साथ मौजूद सुभाष कुमार ने बताया कि प्रतापपुर के पास सड़क पर खड़े युवकों को हॉर्न बजाने पर आपत्ति हुई। इसके बाद गाली-गलौज शुरू कर दी गई। दोनों ने विरोध किया तो युवकों ने मारपीट शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर पास के चौड़ में ताड़ी पी रहे कुछ लोगों को भी बुलाया गया। सुभाष के अनुसार, इसके बाद करीब 10 से 15 लोग वहां पहुंच गए और दोनों की पिटाई करने लगे। सुभाष ने बताया कि हमलावरों ने नवनीत को बुरी तरह पीटा। इसी दौरान उसके कमर से बेल्ट निकालकर उसी से गला दबा दिया गया। सुभाष के मुताबिक, दो तरफ से बेल्ट पकड़कर नवनीत का गला दबाया गया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को छुड़ाया। गंभीर हालत में नवनीत को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के लिए यह घटना अचानक हुई ऐसी त्रासदी थी, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। मेला देखने निकला परिवार का सबसे छोटा बेटा वापस नहीं लौटा। घटना की सूचना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रात में ही आरोपी का पता पूछने पहुंचे थे लोग, ग्रामीणों ने अनजान होने की बात कही नवनीत की मौत के बाद उसके गांव और आसपास के लोगों में गुस्सा बढ़ने लगा। प्रतापपुर के ग्रामीण नरेश राम ने बताया कि घटना के बाद रात में भी कुछ लोग गांव पहुंचे थे। वे आरोपी का घर पूछ रहे थे। नरेश के अनुसार, लोगों ने चेतावनी दी थी कि अगर पता नहीं बताया गया तो इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। मुझे घटना के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। आरोपी का घर भी नहीं जानता था। ऐसे में क्या बताता। रात में पुलिस भी गांव पहुंची थी, लेकिन तब तक उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह इतनी बड़ी घटना हो जाएगी। शव गांव पहुंचते ही सैकड़ों लोग प्रतापपुर पहुंचे, घरों में लगा दी आग नरेश राम ने बताया कि सुबह अचानक सैकड़ों लोग पहुंचे और हंगामा करने लगे। इसके बाद करीब चार से छह घरों में आग लगा दी गई। आग की चपेट में आने से घरों में रखे कपड़े, बर्तन और अन्य घरेलू सामान जल गए। कई परिवारों के लिए घर में रखा जरूरी सामान ही उनकी पूरी जमा-पूंजी था। आग लगने के बाद वे देखते रह गए और कुछ भी बचा नहीं सके। शारदा देवी का घर भी इसी आगजनी में जल गया। बेटी की शादी के लिए उन्होंने धीरे-धीरे कपड़े, बर्तन और अन्य सामान जुटाए थे। छठ के पारण के दिन लड़के वाले आने वाले थे और शादी की तारीख तय होनी थी। अब घर में जले सामान के अलावा कुछ नहीं बचा है। उनके लिए यह सिर्फ घर जलने की घटना नहीं, बल्कि बेटी की शादी के लिए की गई महीनों की तैयारी के खत्म हो जाने का दर्द भी है। घरों में रखे सिलेंडर फटे, आग बुझाने पहुंची दमकल की गाड़ियां आगजनी के दौरान कुछ घरों के अंदर रखे गैस सिलेंडर भी फट गए। इससे मौके पर अफरा-तफरी और बढ़ गई। आग की लपटें उठने के साथ ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने लगे। जिनके घर आग की चपेट में आए, वे सामान बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेजी से फैलती आग के कारण काफी नुकसान हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस बल और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस घटना में कई घरों का सामान जल गया और कुछ बकरियों व अन्य मवेशियों के भी नुकसान की बात सामने आई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी बड़े जनहानि की पुष्टि नहीं हुई। रविवार शाम जब गांव में हालात सामान्य होने लगे, तब जले घरों के अंदर और बाहर सामान बिखरा पड़ा था। कहीं जले कपड़ों के टुकड़े थे तो कहीं बर्तन और घरेलू उपयोग की चीजें राख में बदल चुकी थीं। कुछ घरों की दीवारें आग से काली पड़ गई थी। आग बुझने के बाद भी कई जगह धुआं उठता दिख रहा था। पीड़ित परिवार अपने बचे-खुचे सामान को देखने और नुकसान का अंदाजा लगाने में जुटे थे। ग्रामीण एसपी, सिटी एसपी और सरैया एसडीपीओ पहुंचे; पुलिस ने संभाला मोर्चा मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एसपी राजेश कुमार सिंह प्रभाकर, सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी और सरैया एसडीपीओ अभिजीत कौर सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस ने लोगों को शांत कराने और स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की। अधिकारियों ने कई घंटे तक मौके पर कैंप किया। मौत से परिवार सदमें में हत्या के बाद प्रतापपुर में हुई आगजनी ने कई ऐसे परिवारों को भी नुकसान पहुंचाया, जिनका विवाद से संबंध होने की जानकारी सामने नहीं आई है। शारदा देवी जैसे परिवारों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जले घर और खत्म हुए सामान के बीच वे फिर से अपनी जिंदगी कैसे शुरू करेंगे। एक तरफ नवनीत की मौत से उसका परिवार सदमे में है, तो दूसरी तरफ आगजनी की चपेट में आए परिवार अपने घरों और वर्षों की जमा-पूंजी के नुकसान से जूझ रहे हैं। पुलिस के सामने अब हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ आगजनी में शामिल लोगों की पहचान और नुकसान की जांच की चुनौती भी है। गांव में तनाव के बाद स्थिति नियंत्रित करने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन रविवार की सुबह जिन परिवारों के घर जले, उनके लिए यह दिन लंबे समय तक याद रहने वाला है। ‘बेटी की शादी के लिए कितना सामान खरीदकर रखा था। कपड़े, बर्तन और घर का एक-एक सामान जलकर राख हो गया। छठ के पारण के दिन लड़के वाले शादी की तारीख तय करने आने वाले थे। अब शादी कैसे होगी, क्या करेंगे? घर में एक भी चीज नहीं बची। सुबह हल्ला-हंगामा सुनकर बाहर निकली तो सैकड़ों लोग पहुंचे हुए थे। भीड़ ने घर में आग लगा दी। मैं घास काटकर किसी तरह परिवार चलाती हूं। क्या पता था कि बेटी की शादी के लिए जुटाया सामान ऐसे खत्म हो जाएगा।’ ये दर्द भरे शब्द मुजफ्फरपुर के प्रतापपुर गांव की शारदा देवी के हैं। रविवार शाम उनके घर में जला हुआ सामान बिखरा पड़ा था। कहीं कपड़ों और घरेलू सामान की राख थी तो कहीं आग से काली पड़ी दीवारें। घर के अंदर रखी चीजें इधर-उधर पड़ी थी। कुछ सामान जलकर पूरी तरह खत्म हो चुका था। आसपास के घरों से उठने वाला धुआं और जले सामान की गंध सुबह हुई हिंसा की कहानी बयां कर रही थी। शारदा देवी के घर में आग किसी घरेलू विवाद या दुर्घटना में नहीं लगी। गांव में दूसरे पक्ष के एक युवक की हत्या के बाद गुस्साई भीड़ पहुंची थी। भीड़ आरोपियों के घर तलाश रही थी। ग्रामीणों से आरोपी का घर पूछा गया। जब लोगों ने जानकारी नहीं होने की बात कही तो भीड़ ने दूसरे घरों को भी निशाना बना लिया। देखते ही देखते कई घरों में आग लगा दी गई। जहां शादी-ब्याह के लिए सामान जुटाया गया था, वहां भी सब कुछ जलकर राख हो गया। आरोपी के गांव की 3 तस्वीरें…
अब इस रिपोर्ट में पढ़िए विवाद कैसे शुरू हुआ, घर में क्यों आग लगाई है, मृतक नवनीत का कसूर था… सिलसिलेवार तरीके से जानिए पारू मामला मुजफ्फरपुर के करजा थाना क्षेत्र में शनिवार को मेला घूमने निकले 18 वर्षीय नवनीत कुमार की हत्या के बाद रविवार सुबह प्रतापपुर गांव में यह बवाल हुआ। हॉर्न बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद मारपीट और फिर युवक की मौत तक पहुंच गया। रविवार को शव गांव पहुंचा तो ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। इसके बाद आक्रोशित लोग प्रतापपुर पहुंचे और आरोपी पक्ष के घरों को निशाना बनाया। इस दौरान करीब पांच से छह घरों में आग लगने की बात सामने आई। कुछ घरों में रखे गैस सिलेंडर भी फट गए। पुलिस और दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। अधिकारियों ने कई घंटे तक कैंप कर स्थिति संभाली। अंतिम संस्कार के बाद स्थिति धीरे-धीरे शांत हुई। दुर्गा पूजा का मेला देखने निकला था नवनीत, पंजाब से लौटा था घर मोहम्मदपुर खाजे गांव निवासी राजेश राय का सबसे छोटा बेटा नवनीत कुमार करीब 18 साल का था। पिता राजेश राय के अनुसार, वह पिछले दो वर्षों से पंजाब में रहकर काम करता था। करीब डेढ़ महीने पहले ही मुजफ्फरपुर आया था। दुर्गा पूजा के बाद उसे दोबारा पंजाब लौटना था, लेकिन मां ने मेला देखने के लिए कुछ दिन और रुकने को कहा था। शनिवार शाम नवनीत अपने रिश्ते में लगने वाले भतीजे सुभाष कुमार के साथ मेला घूमने निकला था। दोनों बाइक से जा रहे थे। रास्ते में प्रतापपुर गांव के पास कुछ युवक सड़क पर खड़े थे। इसी दौरान हॉर्न बजाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। शुरुआत में मामला कहासुनी तक था, लेकिन कुछ ही देर में गाली-गलौज और मारपीट होने लगी। हॉर्न बजाने पर कहासुनी, फिर साथियों को बुलाकर की पिटाई नवनीत के साथ मौजूद सुभाष कुमार ने बताया कि प्रतापपुर के पास सड़क पर खड़े युवकों को हॉर्न बजाने पर आपत्ति हुई। इसके बाद गाली-गलौज शुरू कर दी गई। दोनों ने विरोध किया तो युवकों ने मारपीट शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर पास के चौड़ में ताड़ी पी रहे कुछ लोगों को भी बुलाया गया। सुभाष के अनुसार, इसके बाद करीब 10 से 15 लोग वहां पहुंच गए और दोनों की पिटाई करने लगे। सुभाष ने बताया कि हमलावरों ने नवनीत को बुरी तरह पीटा। इसी दौरान उसके कमर से बेल्ट निकालकर उसी से गला दबा दिया गया। सुभाष के मुताबिक, दो तरफ से बेल्ट पकड़कर नवनीत का गला दबाया गया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को छुड़ाया। गंभीर हालत में नवनीत को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के लिए यह घटना अचानक हुई ऐसी त्रासदी थी, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। मेला देखने निकला परिवार का सबसे छोटा बेटा वापस नहीं लौटा। घटना की सूचना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रात में ही आरोपी का पता पूछने पहुंचे थे लोग, ग्रामीणों ने अनजान होने की बात कही नवनीत की मौत के बाद उसके गांव और आसपास के लोगों में गुस्सा बढ़ने लगा। प्रतापपुर के ग्रामीण नरेश राम ने बताया कि घटना के बाद रात में भी कुछ लोग गांव पहुंचे थे। वे आरोपी का घर पूछ रहे थे। नरेश के अनुसार, लोगों ने चेतावनी दी थी कि अगर पता नहीं बताया गया तो इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। मुझे घटना के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। आरोपी का घर भी नहीं जानता था। ऐसे में क्या बताता। रात में पुलिस भी गांव पहुंची थी, लेकिन तब तक उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह इतनी बड़ी घटना हो जाएगी। शव गांव पहुंचते ही सैकड़ों लोग प्रतापपुर पहुंचे, घरों में लगा दी आग नरेश राम ने बताया कि सुबह अचानक सैकड़ों लोग पहुंचे और हंगामा करने लगे। इसके बाद करीब चार से छह घरों में आग लगा दी गई। आग की चपेट में आने से घरों में रखे कपड़े, बर्तन और अन्य घरेलू सामान जल गए। कई परिवारों के लिए घर में रखा जरूरी सामान ही उनकी पूरी जमा-पूंजी था। आग लगने के बाद वे देखते रह गए और कुछ भी बचा नहीं सके। शारदा देवी का घर भी इसी आगजनी में जल गया। बेटी की शादी के लिए उन्होंने धीरे-धीरे कपड़े, बर्तन और अन्य सामान जुटाए थे। छठ के पारण के दिन लड़के वाले आने वाले थे और शादी की तारीख तय होनी थी। अब घर में जले सामान के अलावा कुछ नहीं बचा है। उनके लिए यह सिर्फ घर जलने की घटना नहीं, बल्कि बेटी की शादी के लिए की गई महीनों की तैयारी के खत्म हो जाने का दर्द भी है। घरों में रखे सिलेंडर फटे, आग बुझाने पहुंची दमकल की गाड़ियां आगजनी के दौरान कुछ घरों के अंदर रखे गैस सिलेंडर भी फट गए। इससे मौके पर अफरा-तफरी और बढ़ गई। आग की लपटें उठने के साथ ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने लगे। जिनके घर आग की चपेट में आए, वे सामान बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेजी से फैलती आग के कारण काफी नुकसान हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस बल और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस घटना में कई घरों का सामान जल गया और कुछ बकरियों व अन्य मवेशियों के भी नुकसान की बात सामने आई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी बड़े जनहानि की पुष्टि नहीं हुई। रविवार शाम जब गांव में हालात सामान्य होने लगे, तब जले घरों के अंदर और बाहर सामान बिखरा पड़ा था। कहीं जले कपड़ों के टुकड़े थे तो कहीं बर्तन और घरेलू उपयोग की चीजें राख में बदल चुकी थीं। कुछ घरों की दीवारें आग से काली पड़ गई थी। आग बुझने के बाद भी कई जगह धुआं उठता दिख रहा था। पीड़ित परिवार अपने बचे-खुचे सामान को देखने और नुकसान का अंदाजा लगाने में जुटे थे। ग्रामीण एसपी, सिटी एसपी और सरैया एसडीपीओ पहुंचे; पुलिस ने संभाला मोर्चा मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एसपी राजेश कुमार सिंह प्रभाकर, सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी और सरैया एसडीपीओ अभिजीत कौर सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस ने लोगों को शांत कराने और स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की। अधिकारियों ने कई घंटे तक मौके पर कैंप किया। मौत से परिवार सदमें में हत्या के बाद प्रतापपुर में हुई आगजनी ने कई ऐसे परिवारों को भी नुकसान पहुंचाया, जिनका विवाद से संबंध होने की जानकारी सामने नहीं आई है। शारदा देवी जैसे परिवारों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जले घर और खत्म हुए सामान के बीच वे फिर से अपनी जिंदगी कैसे शुरू करेंगे। एक तरफ नवनीत की मौत से उसका परिवार सदमे में है, तो दूसरी तरफ आगजनी की चपेट में आए परिवार अपने घरों और वर्षों की जमा-पूंजी के नुकसान से जूझ रहे हैं। पुलिस के सामने अब हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ आगजनी में शामिल लोगों की पहचान और नुकसान की जांच की चुनौती भी है। गांव में तनाव के बाद स्थिति नियंत्रित करने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन रविवार की सुबह जिन परिवारों के घर जले, उनके लिए यह दिन लंबे समय तक याद रहने वाला है।

