जेरोधा ने शुरू की अमेरिकी शेयरों में ट्रेडिंग की सुविधा:चुनिंदा ग्राहकों को एक्सेस मिला; पूरा शेयर खरीदने की जरूरत नहीं टुकड़ों में भी खरीद सकेंगे

जेरोधा ने शुरू की अमेरिकी शेयरों में ट्रेडिंग की सुविधा:चुनिंदा ग्राहकों को एक्सेस मिला; पूरा शेयर खरीदने की जरूरत नहीं टुकड़ों में भी खरीद सकेंगे

जेरोधा ने अपने काइट एप पर चुनिंदा भारतीय यूजर्स के लिए अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश की सुविधा शुरू कर दी है। यह सर्विस अभी टेस्टिंग में है। इसके जरिए निवेशक अमेरिका के 2 हजार से ज्यादा शेयर और 1 हजार से ज्यादा ईटीएफ खरीद-बेच सकेंगे। हर सौदे पर 0.1% चार्ज, अधिकतम सीमा 10 डॉलर तय जेरोधा पर अमेरिकी शेयर खरीदने और बेचने दोनों पर ट्रांजैक्शन वैल्यू का 0.1% ब्रोकरेज लगेगा। उदाहरण के लिए, अगर आप 20,000 डॉलर के शेयर खरीदते हैं, तो सामान्य हिसाब से 20 डॉलर ब्रोकरेज बनता, लेकिन कैप की वजह से आपको सिर्फ 10 डॉलर ही देने होंगे। ग्रो और IND मनी जैसे प्लेटफॉर्म्स पहले से ये सुविधा दे रहे जेरोधा से पहले ग्रो और IND मनी जैसे प्लेटफॉर्म ये सुविधा दे रहे हैं। ग्रो पर अमेरिकी स्टॉक्स के लिए ब्रोकरेज 0.1% है, लेकिन वहां कम से कम 1 डॉलर का चार्ज लगता है और अधिकतम फीस की कोई सीमा तय नहीं है। इन दोनों प्लेटफॉर्म्स की तरह जेरोधा पर बी शेयर को टुकड़ों में खरीदा जा सकेगा। करेंसी कन्वर्जन में 0.5% से 1.2% तक खर्च लगेगा जब आप भारत से अमरीकी शेयर खरीदते हैं, तो आपको अपने रुपए को डॉलर में बदलना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य रूप से 3 तरह के खर्च आते हैं। सबसे पहला खर्च डॉलर में बदलने की फीस का होता है। इसमें ब्रोकर असली करेंसी रेट से 0.5% से 1.2% तक ज्यादा शुल्क वसूलते हैं। इसके अलावा, भारतीय बैंक अकाउंट से विदेशी ब्रोकर के अकाउंट में पैसा भेजने पर ट्रांसफर फीस अलग से लगती है। साथ ही, सरकार के टैक्स TCS/GST और अन्य छोटे-मोटे चार्ज भी जुड़ते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप ₹1 लाख के अमरीकी शेयर खरीदते हैं, तो लगभग ₹500 से ₹1,200 सिर्फ डॉलर कन्वर्जन फीस में कट जाएंगे। बाकी ट्रांसफर फीस व टैक्स इसके ऊपर अलग से लगेंगे। अमेरिकी पार्टनर का नाम अभी साफ नहीं जेरोधा ने यह तो बताया है कि ट्रेडिंग गिफ्ट सिटी के जरिए होगी, लेकिन अमेरिका में उनका लोकल ब्रोकर या टेक पार्टनर कौन है, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। केवल आम भारतीय नागरिकों के लिए ये सुविधा यह सुविधा फिलहाल केवल भारत में रहने वाले निवेशकों के लिए है। NRIs और कंपनियों या ट्रस्ट के खातों को इसमें निवेश की अनुमति नहीं है। विदेश में पैसा भेजने के लिए RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के नियम पूरे करने होंगे।

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