समस्तीपुर में दक्षिणेश्वर कली मंदिर की तरह पूजा पंडाल:शिवकली दुर्गा मंदिर में महानवमी पर खोईंछा भरने की परंपरा; श्रद्धालुओं के लिए कुर्सी, पानी, कुलर की व्यवस्था

समस्तीपुर में दक्षिणेश्वर कली मंदिर की तरह पूजा पंडाल:शिवकली दुर्गा मंदिर में महानवमी पर खोईंछा भरने की परंपरा; श्रद्धालुओं के लिए कुर्सी, पानी, कुलर की व्यवस्था

समस्तीपुर शहर में अष्टमी के मौके पर शाम ढलते ही पूजा पंडाल लाल पीली रोशनियों से जगमग हो उठे। शहर के मथुरापुर में पश्चिम बंगाल के हुगली नदी किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तरह दिखने वाला पूजा पंडाल का भव्य निर्माण कराया गया है। जबकि 12 पत्थर मोहल्ला में साईं शिर्डी मंदिर के गुंबज की तरह दिखने वाले पूजा पंडाल बनाया गया है। शहर में इस बार 15 पूजा-पंडाल बनाए गए हैं। महानवमी पर खोईंछा भरने की परंपरा शहर के 12 पठार स्थित शिवकली दुर्गा पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवानंद बम बम ने बतलाया कि इस पूजा पंडाल में नवमी के दिन माता का खोईंछा भरने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ होती है। यहां महिलाओं को बैठने के लिए अलग से कुर्सियां भी लगाई गई है। गर्मी से राहत के लिए कुलर की व्यवस्था की गई है। ठंडा पानी के लिए भी अलग-अलग स्टॉल लगाए गए हैं। पूजा पंडालों के अंदर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया है।
दक्षिणेश्वर कली मंदिर बना आकर्षण का केंद्र मथुरापुर स्थित पूजा पंडाल का लुक पश्चिम बंगाल के हुगली नदी किनारे स्थित दक्षिणेश्वर कली मंदिर का दिया गया है। इस पूजा पंडाल को बनाने में करीब 12 से 15 लाख रुपए का खर्चा आया है। पूजा समिति के व्यवस्थापक महेंद्र प्रधान बताते हैं कि हर वर्ष यहां पंडाल को अलग-अलग लुक दिया जाता है। इस बार करीब एक माह से कलाकारों ने दिन रात मेहनत कर इसे बनाया है। इस पूजा पंडाल को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में मौके पर लोगों की भीड़ जुट रही है परिसर में शहनाई वादक कलाकारों की टीम को लगाया गया है। समस्तीपुर शहर में अष्टमी के मौके पर शाम ढलते ही पूजा पंडाल लाल पीली रोशनियों से जगमग हो उठे। शहर के मथुरापुर में पश्चिम बंगाल के हुगली नदी किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तरह दिखने वाला पूजा पंडाल का भव्य निर्माण कराया गया है। जबकि 12 पत्थर मोहल्ला में साईं शिर्डी मंदिर के गुंबज की तरह दिखने वाले पूजा पंडाल बनाया गया है। शहर में इस बार 15 पूजा-पंडाल बनाए गए हैं। महानवमी पर खोईंछा भरने की परंपरा शहर के 12 पठार स्थित शिवकली दुर्गा पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवानंद बम बम ने बतलाया कि इस पूजा पंडाल में नवमी के दिन माता का खोईंछा भरने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ होती है। यहां महिलाओं को बैठने के लिए अलग से कुर्सियां भी लगाई गई है। गर्मी से राहत के लिए कुलर की व्यवस्था की गई है। ठंडा पानी के लिए भी अलग-अलग स्टॉल लगाए गए हैं। पूजा पंडालों के अंदर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया है।
दक्षिणेश्वर कली मंदिर बना आकर्षण का केंद्र मथुरापुर स्थित पूजा पंडाल का लुक पश्चिम बंगाल के हुगली नदी किनारे स्थित दक्षिणेश्वर कली मंदिर का दिया गया है। इस पूजा पंडाल को बनाने में करीब 12 से 15 लाख रुपए का खर्चा आया है। पूजा समिति के व्यवस्थापक महेंद्र प्रधान बताते हैं कि हर वर्ष यहां पंडाल को अलग-अलग लुक दिया जाता है। इस बार करीब एक माह से कलाकारों ने दिन रात मेहनत कर इसे बनाया है। इस पूजा पंडाल को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में मौके पर लोगों की भीड़ जुट रही है परिसर में शहनाई वादक कलाकारों की टीम को लगाया गया है।  

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