2738 में से 2460 गांव अकालग्रस्त:बारिश के अभाव में 6 लाख 62 हजार क्विंटल बाजरा, 5 लाख क्विंटल ग्वार उत्पादन का नुकसान

2738 में से 2460 गांव अकालग्रस्त:बारिश के अभाव में 6 लाख 62 हजार क्विंटल बाजरा, 5 लाख क्विंटल ग्वार उत्पादन का नुकसान

आठ साल बाद भीषण सूखे की मार ने अन्नदाता को घर का छोड़ा न घाट का। किसानों की महीनों की मेहनत आंखों के सामने जलकर राख हो गई। अकाल के आंकलन की गिरदावरी रिपोर्ट से पहले भास्कर ने सूखाग्रस्त गांवों में फसल खराबे की हकीकत का पता किया तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। जिले के कुल 2738 गांवों में 2460 गांव अकालग्रस्त है। जहां पर 80 से 100 फीसदी फसलें जलकर नष्ट हो गई। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ बुवाई के अनुसार जिले में 150 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान था। कहीं 100 फीसदी तो कहीं 80 फीसदी खराबा हुआ है। इस हिसाब से चार प्रमुख फसल बाजरा,ग्वार, मूंग, मोठ की फसलें बर्बाद होने से कुल 50 अरब 26 करोड़ 38 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। ग्राउंड का सच: चारा डिपो खुले न पशु शिविर मुख्यमंत्री ने बाछड़ाऊ में आयोजित सभा में जिले के अकालग्रस्त गांवों में चारा डिपो व शिविर खोलने के लिए बजट की घोषणा की ​थी, लेकिन अभी तक सूखाग्रस्त एक भी गांव में चारा डिपो खुले न पशु शिविर। गोवंश चारे के अभाव में मौत के मुहाने पर खड़ा है। पशुपालक चारे के एक एक तिनके को मोहताज है। वहीं प्रशासन ने चारा डिपो व पशु शिविरों की रिपोर्ट सरकार को भेजकर इतिश्री कर ली।
चारा डिपो स्वीकृत, जल्द ही शुरू होंगे गिरदावरी रिपोर्ट तैयार हो गई है। दो-तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड हो जाएगी। चारा डिपो खोलने की स्वीकृति मिल गई है। जरूरत के अनुसार गांवों में जल्द ही चारा डिपो शुरू किए जाएंगे। -रविंद्र कुमार, एडीएम बाड़मेर। औसत से 180mm कम बारिश की वजह से 50 अरब की फसलें बर्बाद जिले में मानसून ने देरी से दस्तक दी। जुलाई के बाद मानसून रूठ गया। ​औसत 387 के मुकाबले 207 एमएम बारिश हुई। यानि औसत से 180 एमएम कम बारिश दर्ज की गई। इस वजह से अंकुरित होने के बाद फसलों की ग्रोथ रूक कई। एक माह बाद मुरझाकर नष्ट हो गई। जिले में सालाना करीब 150 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है। इस बार महज 10 फीसदी उत्पादन की संभावना है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस सीजन में बाजरा 6 लाख 62 हजार 990 क्विंटल उत्पादन का अनुमान था। शत फीसदी खराबे से 1 अरब 65 करोड़ 74 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। वहीं मूंग का उत्पादन 1 लाख 44 हजार क्विंटल उत्पादन का अनुमान था खराबा 80 फीसदी के हिसाब से 1 लाख 15 हजार क्विंटल का उत्पादन नहीं होने से 9 अरब 83 करोड़ की फसल बर्बाद हो गई। मोठ की फसल में 1 करोड़ 26 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इसी तरह ग्वार का उत्पादन 5 लाख 3 हजार क्विंटल के अनुमान के मुताबिक 38 अरब 75 करोड़ 68 लाख रुपए की फसलें नष्ट हुई। -डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्र गुड़ामालानी।

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