फूल से लेकर नींबू तक की मांग उछली, ऑटोमोबाइल सर्विस सेक्टर भी पीछे नहीं
चेन्नई. तमिलनाडु में 19 अक्टूबर को होने वाली आयुध पूजा ने चेन्नई के बाजारों में त्योहार से जुड़ी खरीदारी बढ़ा दी है। घरों, दुकानों, दफ्तरों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और वाहनों की पूजा की तैयारियों के बीच फूल, केले के पौधे, कद्दू, नारियल, फल और पारंपरिक सजावटी सामग्री की मांग बढ़ रही है। कोयंबेडु थोक बाजार में विशेष पूजा बाजार 14 से 23 अक्टूबर तक संचालित किया गया है।कोयंबेडु होलसेल मार्केट मैनेजमेंट कमेटी ने खाद्यान्न बाजार परिसर की पार्किंग में 1.5 एकड़ क्षेत्र में विशेष बाजार लगाने की व्यवस्था की है। यहां अवल (चिवड़ा), पोरी (मुरमुरा), केले के पौधे, तोरण, कद्दू और अन्य पूजा सामग्री की बिक्री की जा रही है। बाजार 23 अक्टूबर तक चलेगा, ताकि लोग पूजा से पहले अपनी जरूरत का सामान खरीद सकें।चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (सीएमडीए) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस. पी. कार्तिका की अध्यक्षता में तैयारियों को लेकर समन्वय बैठक भी हुई। बाजार में संकेतक बोर्ड, लाउडस्पीकर से घोषणाएं, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था तथा वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों की तैनाती की गई है। शनिवार रात की भारी बारिश का असर जरूर दिखा है लेकिन रविवार को दिन साफ रहने से ग्राहकों का उत्साह बना रहा।
फूल और फल महंगे, मांग के साथ बढ़े दाम
कोयंबेडु बाजार में शनिवार को सामान्य दिनों में करीब 150 रुपए किलो तक बिकने वाला सेब 300 रुपए किलो तक पहुंच गया था। नागपुर संतरा 60 रुपए, देशी संतरा 250 रुपए तक और अमरूद 120 रुपए किलो तक बिकने की जानकारी मिली है। इसी तरह चमेली (मल्ली) की कीमत सुबह 1,800 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई, जो बाद में घटकर 1,500 रुपए प्रति किलो रही। कारोबारियों का कहना है कि बारिश जारी रहने से आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और दाम में फिर तेजी आ सकती है। प्रमुख फूलों के भावों में पिची 900-1,000 रुपए, मुल्लै 800-900 रुपए, कनकांबरम 1,500-1,800 रुपए, गुलाब 350-400 रुपए और गेंदा 80-120 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। कमल का भाव 20-25 रुपए प्रति फूल है।
त्योहार से जुड़े कारोबार की असली तस्वीर
आयुध पूजा का आर्थिक दायरा केवल पूजा सामग्री तक सीमित नहीं है। परंपरा के अनुसार, वाहन, मशीनें और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजार साफ करके उनकी पूजा की जाती है। इससे वाहन धुलाई केंद्रों, सर्विस स्टेशनों और सजावट सामग्री बेचने वालों को अतिरिक्त ग्राहक मिलने की संभावना रहती है। वाहनों के अलावा तीन दिन के अवकाश को लेकर लोगों के घर लौटने की कशमकश से निजी वाहन ऑपरेटर्स की चांदी कटी। सरकार के अतिरिक्त बस सेवाओं का संचालन भी नाकाफी रहा और ऊपर से हुई भारी बारिश से यात्रियों को खूब असुविधा हुई।


