बेटे की पार्थिव देह देख बिलख पड़ी मां:पिता बोले- मुझे अपने बेटे पर गर्व है, ट्रेनी अग्निवीर महेश को नम आंखों से दी अंतिम विदाई

बेटे की पार्थिव देह देख बिलख पड़ी मां:पिता बोले- मुझे अपने बेटे पर गर्व है, ट्रेनी अग्निवीर महेश को नम आंखों से दी अंतिम विदाई

बेटे की पार्थिव देह सामने थी, आंखों में आंसू थे, लेकिन पिता लालचंद मुहाल के शब्दों में बेटे को देश के नाम करने का गर्व भी झलक रहा था। ट्रेनी अग्निवीर महेश कुमार मुहाल (21) की पार्थिव देह रविवार को उनके गांव पीथीसर पहुंची तो पूरा गांव अपने लाडले को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा। चूरू से पीथीसर तक 22 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। रास्ते में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि दी। गांव में महिलाओं, युवतियों और स्कूली बच्चों ने भी फूल बरसाकर महेश को विदाई दी। राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में छोटे भाई निर्मल ने मुखाग्नि दी। इस दौरान जहां बेटे की पार्थिव देह देखकर मां बिलख पड़ी, वहीं पिता लालचंद ने भावुक होकर कहा, “मैंने अपने बेटे को देश के नाम कर दिया है। मुझे गर्व है।” 22 किलोमीटर तक तिरंगे के साथ निकली अंतिम यात्रा महेश कुमार की पार्थिव देह को चूरू से पीथीसर लाया गया। इस दौरान 22 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। रास्ते में ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि दी। पीथीसर पहुंचने पर सैकड़ों लोग अपने गांव के लाडले के अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। गांव की महिलाओं और युवतियों ने घरों की छतों पर चढ़कर फूल बरसाए, वहीं स्कूली बच्चों ने भी रास्ते के किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा की। हर आंख नम थी और माहौल गमगीन हो गया। 100 मीटर लंबा तिरंगा लेकर पहुंचे युवा, गूंजे अमर रहने के नारे गांव घंटेल से युवा करीब 100 मीटर लंबा तिरंगा लेकर महेश के घर तक पहुंचे। इस दौरान ‘महेश कुमार अमर रहे’ के जयकारे गूंजते रहे। युवाओं ने तिरंगे के साथ अपने गांव के वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। ग्रामीणों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने महेश के प्रति सम्मान और देशसेवा के उनके जज्बे के प्रति लोगों की भावनाओं को जाहिर किया। सेना ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर, पिता को सौंपा तिरंगा ट्रेनी अग्निवीर महेश कुमार मुहाल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। नायब सूबेदार विजयपाल सैनी, नायब सूबेदार बजरंग सिंह और टू राज राइफल सेंटर, बीकानेर से आए जवानों ने पार्थिव देह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सेना के अधिकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज उनके पिता लालचंद को सौंपा। इसके बाद छोटे भाई निर्मल ने महेश को मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीण ने दी आधा बीघा जमीन महेश के अंतिम संस्कार के लिए पीथीसर निवासी राकेश मुहाल ने अपने खेत की आधा बीघा जमीन दी। ग्रामीणों ने उनके इस कदम की सराहना की। अंतिम संस्कार के दौरान राजेंद्र राठौड़, हरलाल सहारण, रफीक मंडेलिया, देवेंद्र झाझड़िया सहित कई नेताओं ने पुष्पचक्र अर्पित कर महेश को श्रद्धांजलि दी। पूरे गांव ने नम आंखों से अपने लाडले को विदा किया। ट्रेनिंग के दौरान बिगड़ी थी तबीयत ट्रेनी अग्निवीर महेश कुमार मुहाल का ओडिशा के ब्रह्मपुर स्थित आर्मी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे करीब 4 महीने पहले भारतीय सेना की आर्टिलरी एयर डिफेंस में भर्ती हुए थे और गोपालपुर में ट्रेनिंग ले रहे थे। महेश को बुखार के बाद बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता लालचंद के अनुसार, डॉक्टरों ने जांच में डेंगू की पुष्टि नहीं की, लेकिन लक्षण डेंगू जैसे बताए थे। बेटे की तबीयत खराब होने की सूचना पर पिता ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुए, लेकिन सादुलपुर पहुंचने पर उन्हें महेश के निधन की सूचना मिल गई। शनिवार को पार्थिव देह दिल्ली पहुंची थी। महेश हंसमुख और शांत स्वभाव के थे महेश ने बीए पूरा करने के बाद सेना में नौकरी हासिल की थी। उनके छोटे भाई निर्मल चूरू के लोहिया कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। ग्रामीणों के अनुसार, महेश हंसमुख और शांत स्वभाव के थे तथा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।

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