केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को अशोकनगर में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में अपने जीवन के कठिन दौर का जिक्र किया। उन्होंने मंच से 2019 में चुनाव हारने के बाद अपने मन में चल रही बातों को युवाओं के साथ साझा किया। सिंधिया ने कहा जब मैं 2019 में चुनाव हारा, उस समय मेरे मन में यही चल रहा था कि कमी मुझमें है। अपने आप को कैसे परिवर्तित करना है और कैसे दोबारा लोगों से वह रिश्ता बनाना है। दरअसल, युवा संवाद कार्यक्रम में एक युवा ने सिंधिया से सवाल पूछा था कि जब आपके जीवन में कठिन समय आते हैं तो आप उनका सामना कैसे करते हैं। इसी सवाल का जवाब देते हुए सिंधिया ने अपने जीवन के दो कठिन समय के उदाहरण दिए। देखें युवा संवाद की तस्वीरें… कहा- जिंदगी में ऐसे मोड़ आएंगे
सिंधिया ने कहा कि जब मैं 2019 में चुनाव हारा, साधारण तौर पर जब हम फेल हो जाते हैं तो दूसरे लोगों पर इल्जाम लगाते हैं। हम भूल जाते हैं कि एक उंगली दूसरे पर उठाते हैं तो तीन उंगलियां हमारी ओर होती हैं। उस समय मेरे मन में यही चल रहा था कि कमी मुझमें है। अपने आप को कैसे परिवर्तित करना है, कैसे दोबारा लोगों से वह रिश्ता बनाना है। उन्होंने कहा कि दुख होता है, उस दुख के साथ शक्ति भी होनी चाहिए कि हम दोबारा उठेंगे और मेहनत करेंगे। दोबारा सफलता की तरफ चलेंगे। अगर वह शक्ति और आत्मविश्वास का संगम होगा तो मेहनत और लगन से आगे बढ़ेंगे। सिंधिया ने युवाओं से कहा कि जिंदगी में ऐसे मोड़ आएंगे, जहां आपको प्रश्न करना पड़ेगा कि मैं क्या करूं। उस समय प्रश्न दिमाग से मत करो, दिल से प्रश्न करो। बताया- कैसे मिली पिता की मौत की सूचना
सिंधिया ने अपने जीवन के पहले कठिन समय का जिक्र करते हुए कहा कि 2001 में बेंगलुरु जा रहा था। उस समय फोन आया कि पिता का निधन हो गया। ऐसी दुख की घड़ी में भी भगवान आपको अंदर से शक्ति देता है। मुझे ऐसा अनुभव हुआ जैसे मेरे दिल के ऊपर किसी ने भार लगा दिया है। जैसे पूरी तरह से सील हो गया। उन्होंने कहा कि मेरे दिमाग में चल रहा था कि मेरी मां की कैसे देखभाल करूंगा, बहन की कैसे देखभाल करूंगा। मेरे पिताजी के हजारों-लाखों परिवार के सदस्य हैं, उनकी कैसे देखभाल करूंगा। भगवान शक्ति देता है और व्यक्ति इसमें लीन हो जाता है। उस 2001 के समय से आज 25 साल हो गए। कैसे समय निकल गया। उन्होंने कहा कि जब आप बड़ी खाई में गिरते हो तो आत्मविश्वास के साथ उठना होगा। इसके आलावा कहा जो आपके पिता हैं, आप भी वही बनो। जो आपका दिल कहे, वह करो। जहां आपकी दिलचस्पी हो, वह काम करो। सलाह- दिल की पुकार सुनें और अवसर चुनें
सिंधिया ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि मैंने छह साल नौकरी की है। न्यूयॉर्क, हॉन्गकॉन्ग और मुंबई में नौकरी की। मुंबई में टैक्सी से सफर किया। बारिश में भागकर टैक्सी में बैठा हूं। इस तरह हर चीज से आपको सीख मिलेगी। उन्होंने युवाओं से कहा कि आप भी दिल की पुकार सुनें और रोजगार के अवसर चुनें। कार्यक्रम के बाद डांडिया खेलते नजर आए सिंधिया
संसदीय क्षेत्र के प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोकनगर में आयोजित डांडिया कार्यक्रम में भी शामिल हुए। यहां उन्होंने उत्साह के साथ डांडिया खेला और सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।

