Maharashtra Politics: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा (BJP) नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि यदि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जनता से मतदान और विरोध प्रदर्शन का अधिकार छीन रही है, तो ऐसी सरकार को बदलने की सख्त जरूरत है। इसलिए इस सरकार के खिलाफ हम आवाज उठा रहे है। अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए ठाकरे ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के ‘सत्ता परिवर्तन’ (रिजीम चेंज) के आह्वान का खुला समर्थन किया।
विरोध प्रदर्शनों में हिंसा पर भड़के ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कुछ दलों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि पुलिस युवाओं और महिलाओं के साथ मारपीट कर रही है और उनके कपड़े फाड़ रही है, ऐसी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंक देना चाहिए।
व्यंग्य कसते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या दिल्ली में हजारों पुलिसकर्मियों को डांडिया खेलने के लिए तैनात किया गया था? उनकी यह टिप्पणी नवरात्रि के त्योहार और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किए जाने के संदर्भ में थी।
‘जो राम को लाने का दावा करते हैं, वे कॉकरोच से डरते हैं’
दशहरा समारोह के दौरान कॉकरोच का पुतला जलाए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर जोरदार कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “जो लोग राम को लाने का दावा करते हैं, वे आज कॉकरोच से डरते हैं।” उन्होंने दोहराया कि हम यहां व्यवस्था और सत्ता में बदलाव लाने के लिए हैं।
प्रशांत भूषण के बयान पर मचा है घमासान
बृहस्पतिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि लोकतंत्र में सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त करना कोई अपराध नहीं है और यह संघर्ष अब ‘सत्ता परिवर्तन’ के लिए है।
भूषण ने स्पष्ट किया था, “सरकार आरोप लगा रही है कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन करना चाहता है… हम फिलहाल यह सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि चुनाव निष्पक्ष हों। लेकिन अगर इस तरह की बर्बरता जारी रही, तो निश्चित रूप से सत्ता परिवर्तन होगा।” उनके इस बयान के बाद से देश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है और सत्तारूढ़ दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

