प्रशासन की सख्ती के बाद हरकत में आई 102 एंबुलेंस एजेंसी, कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया

प्रशासन की सख्ती के बाद हरकत में आई 102 एंबुलेंस एजेंसी, कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया

भास्कर न्यूज |लखीसराय एंबुलेंस की मरम्मत और रखरखाव में लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन की सख्ती के बाद 102 एंबुलेंस संचालित करने वाली एजेंसी हरकत में आई है। एंबुलेंस की व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ अब कर्मियों को जीवनरक्षक उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सदर अस्पताल के एंबुलेंस सहायकों को गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान रास्ते में होने वाली परेशानी से निपटने और उपलब्ध उपकरणों की मदद से प्राथमिक उपचार देने की जानकारी दी गई। जिला एंबुलेंस नियंत्रक कन्हैया कुमार ने बताया कि पटना से आए प्रशिक्षक राजेश कुमार ने कर्मियों को एंबुलेंस में उपलब्ध उपकरणों के इस्तेमाल की बारीकियां समझाईं। इसमें कृत्रिम सांस देने वाला वेंटिलेटर, हृदय की धड़कन की जांच करने वाली ईसीजी मशीन, दिल की धड़कन सामान्य करने वाला डिफिब्रिलेटर, सांस की नली से तरल पदार्थ निकालने वाली सक्शन मशीन, खून में ऑक्सीजन मापने वाला पल्स ऑक्सीमीटर और दवाएं नियंत्रित गति से देने वाला इन्फ्यूजन पंप शामिल हैं। रास्ते में बिगड़ी हालत तो तुरंत मिलेगी मदद सड़क दुर्घटना, हृदयाघात और सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले का समय मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में उपकरणों के सही इस्तेमाल से मरीज को समय पर शुरुआती उपचार मिल सकेगा और आपात स्थिति में उसकी जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। कन्हैया कुमार ने बताया कि पहले चरण में सदर अस्पताल के एंबुलेंस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके बाद विभिन्न प्रखंडों में तैनात अन्य एंबुलेंस सहायकों को भी चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। भास्कर न्यूज |लखीसराय एंबुलेंस की मरम्मत और रखरखाव में लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन की सख्ती के बाद 102 एंबुलेंस संचालित करने वाली एजेंसी हरकत में आई है। एंबुलेंस की व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ अब कर्मियों को जीवनरक्षक उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सदर अस्पताल के एंबुलेंस सहायकों को गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान रास्ते में होने वाली परेशानी से निपटने और उपलब्ध उपकरणों की मदद से प्राथमिक उपचार देने की जानकारी दी गई। जिला एंबुलेंस नियंत्रक कन्हैया कुमार ने बताया कि पटना से आए प्रशिक्षक राजेश कुमार ने कर्मियों को एंबुलेंस में उपलब्ध उपकरणों के इस्तेमाल की बारीकियां समझाईं। इसमें कृत्रिम सांस देने वाला वेंटिलेटर, हृदय की धड़कन की जांच करने वाली ईसीजी मशीन, दिल की धड़कन सामान्य करने वाला डिफिब्रिलेटर, सांस की नली से तरल पदार्थ निकालने वाली सक्शन मशीन, खून में ऑक्सीजन मापने वाला पल्स ऑक्सीमीटर और दवाएं नियंत्रित गति से देने वाला इन्फ्यूजन पंप शामिल हैं। रास्ते में बिगड़ी हालत तो तुरंत मिलेगी मदद सड़क दुर्घटना, हृदयाघात और सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले का समय मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में उपकरणों के सही इस्तेमाल से मरीज को समय पर शुरुआती उपचार मिल सकेगा और आपात स्थिति में उसकी जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। कन्हैया कुमार ने बताया कि पहले चरण में सदर अस्पताल के एंबुलेंस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके बाद विभिन्न प्रखंडों में तैनात अन्य एंबुलेंस सहायकों को भी चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।  

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