अयोध्या में भगवान श्रीराम की भक्ति और सनातन संस्कृति की भावधारा के बीच भगवदाचार्य स्मारक सदन में आयोजित पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीरामलीला के दसवें दिवस अंगद संवाद, बालि वध एवं लंका दहन की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से रामकथा के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। लीला के दौरान धर्म, नीति, मर्यादा, साहस और सत्य की विजय का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचा। श्रीरामलीला केवल धार्मिक आख्यान या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के आदर्शों और जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने वाली सशक्त परंपरा है। अंगद संवाद का प्रसंग जहां धर्म के प्रति अटूट निष्ठा, आत्मविश्वास और सत्य के पक्ष में निर्भीकता का प्रतीक है, वहीं बालि वध न्याय एवं धर्म की स्थापना का संदेश देता है। लंका दहन की लीला अधर्म, अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक बनकर सामने आई।
अंगद संवाद के प्रसंग में भगवान श्रीराम के दूत के रूप में अंगद का रावण की सभा में पहुंचना और उसे प्रभु श्रीराम की शरण में आने का संदेश देना विशेष आकर्षण रहा। अंगद ने रावण को समझाने का प्रयास किया कि अहंकार और अन्याय का मार्ग विनाश की ओर ले जाता है। इसके बावजूद रावण का अपने अभिमान पर अड़े रहना उसके पतन की पृष्ठभूमि तैयार करता है। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने दर्शाया कि शक्ति और वैभव से अधिक महत्वपूर्ण सत्य, विवेक और धर्म का पालन है। बालि वध के प्रसंग में अधर्म के विरुद्ध न्याय की स्थापना तथा मर्यादा के पालन का भाव उभरा। वहीं लंका दहन की लीला में हनुमानजी के पराक्रम, प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रभावशाली चित्रण किया गया। मंचन के दौरान रामभक्त हनुमान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर प्रभु श्रीराम और बजरंगबली के जयकारे लगाए।इस अवसर पर अयोध्या के निवर्तमान सांसद लल्लू सिंह, संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष एवं बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश कुमार दास , महामंत्री महंत संजय दास, नागा राम लखन दास, श्रृंगी ऋषि महंत हेमंत दास, राम कचेहरी महंत शशिकांत दास , अंजनी गर्ग, नागा उपेंद्र दास, पुजारी जयमंगल दास, पुजारी राजन दास, पुजारी मोहित दास, बाबा गोविंद दास, महंत धनुषधारी शुक्ला, बाबा जमुना दास, महंत विराट दास, पुरोहित समाज से ओमप्रकाश, घनश्याम दास, अंबिका दास, तन्मय दास, भोलेन्द्र प्रताप सिंह, देवव्रत पांडेय एवं समिति के सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत-महंत, धर्मप्रेमी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

