तमिल सिनेमा के मशहूर संगीतकार देवा का निधन, 75 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

तमिल सिनेमा के मशहूर संगीतकार देवा का निधन, 75 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Tamil Music Composer Deva Death: तमिल फिल्म उद्योग के लोकप्रिय संगीतकार देवा का शनिवार को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उन्हें अस्पताल लाए जाने तक उनकी नाड़ी बंद हो चुकी थी और चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

देवा ने तमिल सिनेमा में चेन्नई की पारंपरिक “गाना” संगीत शैली को मुख्यधारा में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने रजनीकांत अभिनीत फिल्मों अन्नामलै, बाशा और अरुणाचलम के लिए संगीत और पृष्ठभूमि संगीत तैयार कर व्यापक पहचान हासिल की। उनके गीतों और बैकग्राउंड स्कोर ने 1990 के दशक में तमिल सिनेमा के व्यावसायिक स्वरूप को नई ऊर्जा दी।

सरकारी कर्मचारी से संगीतकार

देवा का मूल नाम देवनेशन चोक्कलिंगम था। फिल्म जगत में आने से पहले वे तमिलनाडु सरकार के लोक निर्माण विभाग में कार्यरत थे। 1986 में फिल्म माट्टुकारा मन्नारु से संगीतकार के रूप में उन्होंने करियर की शुरुआत की। हालांकि यह फिल्म सफल नहीं रही, लेकिन इसके गीतों ने ध्यान आकर्षित किया। बाद में वैकासी पोरंथाचु की सफलता ने उन्हें राज्य स्तर पर पहचान दिलाई और सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का तमिलनाडु राज्य पुरस्कार भी मिला। उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ व मलयालम में चार सौ से अधिक फिल्मों के लिए संगीत दिया।

देवा ने गाना संगीत, लोक धुनों, शास्त्रीय संगीत और भक्ति संगीत का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत किया। उन्होंने सर्काझी गोविंदराजन, पी. सुशीला, एम. बालामुरलीकृष्ण और मदुरै सोमु जैसे दिग्गज गायकों के साथ भी काम किया। मंदिरों में आज भी उनके द्वारा संगीतबद्ध कई भक्ति गीत सुनाई देते हैं।

तमिल फिल्म और संगीत जगत ने देवा के निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया है। उनके निधन से तमिल संगीत जगत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया।

देवा तमिलनाडु सरकार के प्रतिष्ठित कलैमामणि पुरस्कार के विजेता थे

बता दें तमिल सिनेमा के मशहूर संगीत निर्देशक देवा ने अपने संगीत से इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई थी। कुछ हफ्ते पहले वह तमिल फिल्म ‘मिसाया मुरुक्कु 2’ के सक्सेस मीट में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने बताया था कि आखिर उन्होंने गाना शैली की शुरुआत क्यों की।

देवा ने कहा था कि जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, तब इलैयाराजा का दबदबा था। वह तमिल सिनेमा में डेब्यू करने वाले 28वें संगीत निर्देशक थे। उनसे पहले 27 संगीत निर्देशक आए, लेकिन अपनी जगह बनाने में सफल नहीं हो सके। उस दौर में इलैयाराजा और एआर रहमान जैसे दिग्गज संगीतकारों के बीच अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था।

देवा को तमिलनाडु सरकार के प्रतिष्ठित कलैमामणि पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 1990 में पहली बार राज्य का फिल्म पुरस्कार भी जीता था। उनके बेटे श्रीकांत देवा भी संगीत निर्देशक हैं, जबकि उनके भतीजे जय तमिल फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता हैं।

सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर 2 बजे देवा का पार्थिव शरीर चेन्नई के वडापलानी स्थित उनके घर लाया जाएगा, जहां लोग और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकेंगे।

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