बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुला पत्र लिखा है। यह अधिकारी कुंदन कृष्णन के 5 करोड़ रुपए के मानहानि नोटिस पर है। सांसद ने नोटिस की राशि और सरकारी अनुमति के नियम पर सफाई मांगी है। सांसद ने कहा कि उनके सवाल सरकारी अधिकारी की भूमिका से जुड़े हैं, इसलिए सरकार की सहमति साफ होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या इस मामले में राज्य सरकार या गृह मंत्री से अनुमति मिली है। सांसद ने बिहार के प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करते हैं और जनता के प्रति जवाबदेही के बजाय अपने खास अधिकारों को अहमियत देते हैं। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि डेढ़ साल पहले कुंदन कृष्णन ने भ्रष्टाचार मामले में उन्हें और उनके भाई को धमकी दिलवाई थी। इसकी शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से की गई थी। उन्होंने बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर किसानों पर की गई एक कथित टिप्पणी का भी जिक्र किया। सांसद ने कहा कि उस बयान को लेकर किसानों में नाराजगी हुई थी और बाद में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी गई थी।
भारत भूषण तिवारी हत्याकांड का भी किया जिक्र
खुले पत्र में सांसद ने भारत भूषण तिवारी हत्याकांड का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के डीजी पद पर कार्यरत थे। उनके अनुसार, घटना के दिन की कमान, निर्णय प्रक्रिया, अधिकारियों के बीच संवाद और पुलिस मुख्यालय की भूमिका जांच के दायरे में है।
सांसद ने कहा कि सरकार की ओर से पुलिस की चूक स्वीकार किए जाने, संबंधित पुलिसकर्मियों के निलंबन, मृतक की मां की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज होने और न्यायिक जांच के आदेश के बाद इस मामले में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाना स्वाभाविक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानहानि का नोटिस भेजकर संबंधित अधिकारी खुद को सवालों से बाहर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों और नोटिस से संबंधित सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। डीएम-एसपी के व्यवहार में बदलाव की मांग
सांसद ने मुख्यमंत्री से राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों को जनता के साथ संवेदनशील एवं मानवीय व्यवहार करने का निर्देश देने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी जनता के सेवक हैं और उन्हें आम लोगों से दूरी बनाकर दरबार लगाने के बजाय उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
पत्र के अंत में सांसद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए कार्यपालिका के कामकाज पर जनप्रतिनिधियों की निगरानी और समीक्षा जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आगे भी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहेंगे। बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुला पत्र लिखा है। यह अधिकारी कुंदन कृष्णन के 5 करोड़ रुपए के मानहानि नोटिस पर है। सांसद ने नोटिस की राशि और सरकारी अनुमति के नियम पर सफाई मांगी है। सांसद ने कहा कि उनके सवाल सरकारी अधिकारी की भूमिका से जुड़े हैं, इसलिए सरकार की सहमति साफ होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या इस मामले में राज्य सरकार या गृह मंत्री से अनुमति मिली है। सांसद ने बिहार के प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करते हैं और जनता के प्रति जवाबदेही के बजाय अपने खास अधिकारों को अहमियत देते हैं। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि डेढ़ साल पहले कुंदन कृष्णन ने भ्रष्टाचार मामले में उन्हें और उनके भाई को धमकी दिलवाई थी। इसकी शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से की गई थी। उन्होंने बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर किसानों पर की गई एक कथित टिप्पणी का भी जिक्र किया। सांसद ने कहा कि उस बयान को लेकर किसानों में नाराजगी हुई थी और बाद में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी गई थी।
भारत भूषण तिवारी हत्याकांड का भी किया जिक्र
खुले पत्र में सांसद ने भारत भूषण तिवारी हत्याकांड का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के डीजी पद पर कार्यरत थे। उनके अनुसार, घटना के दिन की कमान, निर्णय प्रक्रिया, अधिकारियों के बीच संवाद और पुलिस मुख्यालय की भूमिका जांच के दायरे में है।
सांसद ने कहा कि सरकार की ओर से पुलिस की चूक स्वीकार किए जाने, संबंधित पुलिसकर्मियों के निलंबन, मृतक की मां की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज होने और न्यायिक जांच के आदेश के बाद इस मामले में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाना स्वाभाविक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानहानि का नोटिस भेजकर संबंधित अधिकारी खुद को सवालों से बाहर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों और नोटिस से संबंधित सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। डीएम-एसपी के व्यवहार में बदलाव की मांग
सांसद ने मुख्यमंत्री से राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों को जनता के साथ संवेदनशील एवं मानवीय व्यवहार करने का निर्देश देने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी जनता के सेवक हैं और उन्हें आम लोगों से दूरी बनाकर दरबार लगाने के बजाय उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
पत्र के अंत में सांसद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए कार्यपालिका के कामकाज पर जनप्रतिनिधियों की निगरानी और समीक्षा जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आगे भी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहेंगे।

