दरभंगा- अलीनगर की लहटा-तुमौल-सुहथ पंचायत भवन निर्माण में अनियमितता:डीएम, डीडीसी ने जांच के दिए आदेश; 1.44 करोड़ की लागत से 6 साल में तैयार हुई थी बिल्डिंग

दरभंगा- अलीनगर की लहटा-तुमौल-सुहथ पंचायत भवन निर्माण में अनियमितता:डीएम, डीडीसी ने जांच के दिए आदेश; 1.44 करोड़ की लागत से 6 साल में तैयार हुई थी बिल्डिंग

दरभंगा के अलीनगर प्रखंड की लहटा-तुमौल-सुहथ पंचायत में नवनिर्मित पंचायत सरकार भवन के निर्माण में अनियमितता की जांच होगी। दैनिक भास्कर डिजिटल में 4 अक्टूबर को ‘8 महीने पुराने पंचायत भवन की दीवार में दरार-सीलन’ की खबर पब्लिश हुई थी। अब दरभंगा जिलाधिकारी कौशल कुमार और उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने मामले का संज्ञान लिया है। उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने अलीनगर के प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी दीपिका झा को चिट्ठी जारी कर निर्माण कार्य की वस्तुस्थिति की जांच कर जल्द से जल्द फैक्चुअल रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। वहीं, जिलाधिकारी कौशल कुमार ने जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करने की बात कही है। पहले पंचायत सरकार भवन के निर्माण में अनियमितता की तीन तस्वीरें देखिए… सबसे पहले जानिए, जिलाधिकारी ने क्या कहा? जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि पंचायत सरकार भवन निर्माण से जुड़ी शिकायतों की टीम गठित कर जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, उप विकास आयुक्त कार्यालय, दरभंगा की ओर से प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, अलीनगर को जारी पत्र में दैनिक भास्कर डिजिटल में 4 अक्टूबर 2026 को पब्लिश खबर का जिक्र किया गया है। पत्र में कहा गया है कि करीब छह साल में बने पंचायत सरकार भवन का निर्माण जनवरी 2026 में पूरा होने की बात सामने आई है, लेकिन भवन में दरारें दिखाई देने, हाल में किए गए रंग-रोगन का उखड़ने और चबूतरे के टूटे होने की शिकायतें सामने आई हैं। 1.44 करोड़ की योजना, 1.12 करोड़ का भुगतान जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित इस पंचायत में सरकार भवन का निर्माण साल 2020 में शुरू हुआ था। पंचायत सचिव सुमन प्रसाद के अनुसार, योजना की शुरुआती लागत करीब 1.34 करोड़ रुपए थी। बाद में संशोधित प्राक्कलन के बाद लागत बढ़कर करीब 1.44 करोड़ रुपए हो गई। अब तक लगभग 1.12 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। भवन निर्माण में देरी और गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। वायरल वीडियो में परिसर के चबूतरे के क्षतिग्रस्त हिस्से को दिखाया गया था। इसके बाद मौके पर चबूतरे की मरम्मत कराई गई। भवन में रंग-रोगन और बिजली से जुड़े कुछ कार्य भी किए गए हैं। हालांकि, मौके पर कुछ हिस्सों में पेंट उखड़ने और ऊपरी तल की एक दीवार में हल्की दरार दिखाई देने की बात सामने आई थी। इन स्थितियों को लेकर शिकायतकर्ता ने निर्माण सामग्री, प्लास्टर, सीमेंट-बालू के अनुपात, पिलर, टाइल्स और अन्य कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन संकेतों से अपने आप निर्माण में अनियमितता साबित नहीं होती। वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच और निर्माण संबंधी डॉक्यूमेंट्स की जांच से ही स्पष्ट होगी। शिकायत के बाद विभागीय रिपोर्ट पर भी उठे सवाल इस मामले में 11 सितंबर 2026 को सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत का संदर्भ संख्या REF NO-824477 बताया गया है। शिकायतकर्ता ने भवन निर्माण में कथित अनियमितता, सरकारी राशि के उपयोग और निर्माण में देरी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी की ओर से पंचायत सचिव के जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट में भवन निर्माण कार्य पूरा होने और शिकायत में लगाए गए आरोपों को निराधार बताया गया था। साथ ही, शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर को पुराना बताया गया था। विभागीय रिपोर्ट से असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने दोबारा शिकायत दर्ज कराते हुए लेटेस्ट जीपीएस वाली तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध होने का दावा किया। उन्होंने कागजी रिपोर्ट के बजाय स्थल का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराने की मांग की थी। जनप्रतिनिधि ने आरोपों को किया खारिज वहीं, पंचायत के मुखिया सतीश चंद्र झा ने निर्माण में अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि भवन का निर्माण सरकार के मॉडल एस्टीमेट और स्वीकृत नक्शे के अनुसार कराया गया है। निर्माण के दौरान योजना विकास विभाग के एसडीओ और तकनीकी कर्मियों ने निरीक्षण भी किया था। मुखिया के अनुसार, चबूतरे को किसी वाहन की ठोकर लगने या बारिश के कारण नीचे की मिट्टी बैठने से नुकसान पहुंचा हो सकता है। इसकी मरम्मत करा दी गई है। उन्होंने भवन को जल्द शुरू कराने की बात भी कही है। ‘सरकारी सेवाओं का गांव में ही मिलेगी लाभ’ वहीं, ग्रामीणों ने भवन की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि छह साल बाद तैयार हुए भवन का उद्देश्य अब तक पूरी तरह पूरा नहीं हो सका है। गांव के लोगों को उम्मीद है कि पंचायत सरकार भवन शुरू होने के बाद जाति, आय, आवासीय और मृत्यु प्रमाण पत्र समेत पंचायत स्तर के विभिन्न कार्यों के लिए प्रखंड मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। दूसरी ओर, कुछ ग्रामीणों ने भवन का काम ठीक दिखाई देने की बात कहते हुए इसे जल्द शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन चालू होने से पंचायत के लोगों को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। दोषी पाए जाने पर जेल, राशि की रिकवरी और ब्लैकलिस्टिंग तक की कार्रवाई संभव मामले में कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं पर अधिवक्ता हिना परवीन ने बताया कि निर्माण कार्य में अनियमितता की पुष्टि होने पर ठेकेदार की स्थिति, उसकी भूमिका और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी राशि के दुरुपयोग, धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात के आरोप साक्ष्यों से साबित होते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। वकील के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्ति को जेल की सजा, जुर्माना और सरकारी राशि की वसूली जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यदि ठेकेदार किसी सरकारी विभाग या संस्था से जुड़ा है और जांच में उसकी भूमिका साबित होती है, तो सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।वहीं, निजी ठेकेदार या उसकी कंपनी के विरुद्ध लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि किसी भी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने मात्र से आरोप साबित नहीं हो जाते। कानूनी कार्रवाई जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय में आरोप सिद्ध होने के आधार पर आगे बढ़ती है। पंचायत सरकार भवन के मामले में भी निर्माण की गुणवत्ता, भुगतान, सरकारी राशि के उपयोग और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि किन लोगों के विरुद्ध कौन-से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। दरभंगा के अलीनगर प्रखंड की लहटा-तुमौल-सुहथ पंचायत में नवनिर्मित पंचायत सरकार भवन के निर्माण में अनियमितता की जांच होगी। दैनिक भास्कर डिजिटल में 4 अक्टूबर को ‘8 महीने पुराने पंचायत भवन की दीवार में दरार-सीलन’ की खबर पब्लिश हुई थी। अब दरभंगा जिलाधिकारी कौशल कुमार और उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने मामले का संज्ञान लिया है। उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने अलीनगर के प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी दीपिका झा को चिट्ठी जारी कर निर्माण कार्य की वस्तुस्थिति की जांच कर जल्द से जल्द फैक्चुअल रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। वहीं, जिलाधिकारी कौशल कुमार ने जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करने की बात कही है। पहले पंचायत सरकार भवन के निर्माण में अनियमितता की तीन तस्वीरें देखिए… सबसे पहले जानिए, जिलाधिकारी ने क्या कहा? जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि पंचायत सरकार भवन निर्माण से जुड़ी शिकायतों की टीम गठित कर जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, उप विकास आयुक्त कार्यालय, दरभंगा की ओर से प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, अलीनगर को जारी पत्र में दैनिक भास्कर डिजिटल में 4 अक्टूबर 2026 को पब्लिश खबर का जिक्र किया गया है। पत्र में कहा गया है कि करीब छह साल में बने पंचायत सरकार भवन का निर्माण जनवरी 2026 में पूरा होने की बात सामने आई है, लेकिन भवन में दरारें दिखाई देने, हाल में किए गए रंग-रोगन का उखड़ने और चबूतरे के टूटे होने की शिकायतें सामने आई हैं। 1.44 करोड़ की योजना, 1.12 करोड़ का भुगतान जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित इस पंचायत में सरकार भवन का निर्माण साल 2020 में शुरू हुआ था। पंचायत सचिव सुमन प्रसाद के अनुसार, योजना की शुरुआती लागत करीब 1.34 करोड़ रुपए थी। बाद में संशोधित प्राक्कलन के बाद लागत बढ़कर करीब 1.44 करोड़ रुपए हो गई। अब तक लगभग 1.12 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। भवन निर्माण में देरी और गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। वायरल वीडियो में परिसर के चबूतरे के क्षतिग्रस्त हिस्से को दिखाया गया था। इसके बाद मौके पर चबूतरे की मरम्मत कराई गई। भवन में रंग-रोगन और बिजली से जुड़े कुछ कार्य भी किए गए हैं। हालांकि, मौके पर कुछ हिस्सों में पेंट उखड़ने और ऊपरी तल की एक दीवार में हल्की दरार दिखाई देने की बात सामने आई थी। इन स्थितियों को लेकर शिकायतकर्ता ने निर्माण सामग्री, प्लास्टर, सीमेंट-बालू के अनुपात, पिलर, टाइल्स और अन्य कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन संकेतों से अपने आप निर्माण में अनियमितता साबित नहीं होती। वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच और निर्माण संबंधी डॉक्यूमेंट्स की जांच से ही स्पष्ट होगी। शिकायत के बाद विभागीय रिपोर्ट पर भी उठे सवाल इस मामले में 11 सितंबर 2026 को सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत का संदर्भ संख्या REF NO-824477 बताया गया है। शिकायतकर्ता ने भवन निर्माण में कथित अनियमितता, सरकारी राशि के उपयोग और निर्माण में देरी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी की ओर से पंचायत सचिव के जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट में भवन निर्माण कार्य पूरा होने और शिकायत में लगाए गए आरोपों को निराधार बताया गया था। साथ ही, शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर को पुराना बताया गया था। विभागीय रिपोर्ट से असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने दोबारा शिकायत दर्ज कराते हुए लेटेस्ट जीपीएस वाली तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध होने का दावा किया। उन्होंने कागजी रिपोर्ट के बजाय स्थल का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराने की मांग की थी। जनप्रतिनिधि ने आरोपों को किया खारिज वहीं, पंचायत के मुखिया सतीश चंद्र झा ने निर्माण में अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि भवन का निर्माण सरकार के मॉडल एस्टीमेट और स्वीकृत नक्शे के अनुसार कराया गया है। निर्माण के दौरान योजना विकास विभाग के एसडीओ और तकनीकी कर्मियों ने निरीक्षण भी किया था। मुखिया के अनुसार, चबूतरे को किसी वाहन की ठोकर लगने या बारिश के कारण नीचे की मिट्टी बैठने से नुकसान पहुंचा हो सकता है। इसकी मरम्मत करा दी गई है। उन्होंने भवन को जल्द शुरू कराने की बात भी कही है। ‘सरकारी सेवाओं का गांव में ही मिलेगी लाभ’ वहीं, ग्रामीणों ने भवन की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि छह साल बाद तैयार हुए भवन का उद्देश्य अब तक पूरी तरह पूरा नहीं हो सका है। गांव के लोगों को उम्मीद है कि पंचायत सरकार भवन शुरू होने के बाद जाति, आय, आवासीय और मृत्यु प्रमाण पत्र समेत पंचायत स्तर के विभिन्न कार्यों के लिए प्रखंड मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। दूसरी ओर, कुछ ग्रामीणों ने भवन का काम ठीक दिखाई देने की बात कहते हुए इसे जल्द शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन चालू होने से पंचायत के लोगों को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। दोषी पाए जाने पर जेल, राशि की रिकवरी और ब्लैकलिस्टिंग तक की कार्रवाई संभव मामले में कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं पर अधिवक्ता हिना परवीन ने बताया कि निर्माण कार्य में अनियमितता की पुष्टि होने पर ठेकेदार की स्थिति, उसकी भूमिका और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी राशि के दुरुपयोग, धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात के आरोप साक्ष्यों से साबित होते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। वकील के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्ति को जेल की सजा, जुर्माना और सरकारी राशि की वसूली जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यदि ठेकेदार किसी सरकारी विभाग या संस्था से जुड़ा है और जांच में उसकी भूमिका साबित होती है, तो सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।वहीं, निजी ठेकेदार या उसकी कंपनी के विरुद्ध लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि किसी भी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने मात्र से आरोप साबित नहीं हो जाते। कानूनी कार्रवाई जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय में आरोप सिद्ध होने के आधार पर आगे बढ़ती है। पंचायत सरकार भवन के मामले में भी निर्माण की गुणवत्ता, भुगतान, सरकारी राशि के उपयोग और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि किन लोगों के विरुद्ध कौन-से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।  

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