जमीन गिरवी रख 2 करोड़ का लोन लेने का मामला:बेटियों को दान की जमीन पर बिल्डर ने लिया लोन, उन्हीं से बैंक पर केस कराया

जमीन गिरवी रख 2 करोड़ का लोन लेने का मामला:बेटियों को दान की जमीन पर बिल्डर ने लिया लोन, उन्हीं से बैंक पर केस कराया

बेटियों के नाम दान की जा चुकी जमीन को अपनी संपत्ति बताकर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से 2 करोड़ रुपए का लोन लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कॉलोनाइजर्स के एमडी जीशान अली ने बावड़ियाकलां स्थित व्यावसायिक जमीन 2013 में अपनी तीन बेटियों के नाम हिबानामा कर दी थी। इसके करीब दो साल बाद इसी जमीन को गिरवी रखकर कंपनी के लिए ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई गई। आरोप है कि बैंक को जमीन के पहले ही बेटियों के नाम हस्तांतरित होने की जानकारी नहीं दी गई। कर्ज की अदायगी नहीं होने पर बैंक ने वसूली की प्रक्रिया शुरू की तो अक्टूबर 2017 में बेटियों के जरिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कराया गया। इसमें जमीन पर उनका मालिकाना हक बताते हुए बैंक की ओर से उसे जब्त किए जाने का विरोध किया गया। ईओडब्ल्यू की जांच में इन घटनाक्रमों के आधार पर पति-पत्नी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। 2008 में खरीदी जमीन, 2013 में बेटियों के नाम की मामले की शुरुआत शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति की जमीन से हुई। वर्ष 2007 में समिति की ओर से जारी टेंडर में जीशान अली अकेले बोलीदाता थे। इसके बाद 5 फरवरी 2008 को बावड़ियाकलां की 526.83 वर्गमीटर व्यावसायिक जमीन उनके नाम रजिस्टर्ड हुई। जीशान ने 10 जुलाई 2013 को हिबानामा तैयार कर यह जमीन अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी। इनमें से दो उस समय नाबालिग थीं। जांच के मुताबिक, जीशान ने 2018 में बैंक को लिखे पत्र में भी जमीन बेटियों के नाम करने की बात स्वीकार की थी। दान की जमीन पर कंपनी के लिए मंजूर कराई ओवरड्राफ्ट लिमिट हिबानामा होने के बावजूद 24 सितंबर 2015 को रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स के नाम 2 करोड़ रुपए की ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई गई। आरोप है कि बैंक को जमीन के हस्तांतरण की जानकारी नहीं दी गई। लीगल सर्च रिपोर्ट में भी नाबालिग के हित से जुड़े कॉलम में ‘नन’ दर्ज था। इस तरह बैंक के सामने जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई और उसे ऋण के लिए गिरवी रखा गया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि फरवरी 2015 में जीशान और नाजनीन ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम के एक दूसरे प्लॉट को बेचने के लिए जिला अदालत से अनुमति ली थी। ईओडब्ल्यू ने इसे इस बात के संदर्भ में देखा कि दंपती को नाबालिग की संपत्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी थी। लोन एनपीए हुआ तो बैंक की कार्रवाई से पहले दायर किया मुकदमा वर्ष 2017 में कर्ज खाता एनपीए हो गया। बैंक की ओर से 3 जनवरी 2018 को सरफेसी नोटिस जारी किए जाने से पहले ही 4 अक्टूबर 2017 को बेटियों के जरिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया गया था। इसमें दावा किया गया कि जमीन उनकी है और बैंक उसे जब्त नहीं कर सकता। सिविल कोर्ट से दावा खारिज होने के बाद मामला डीआरएटी, इलाहाबाद पहुंचा। बैंक ने वहां दलील दी कि वसूली की कार्रवाई रोकने के लिए मिलीभगत से मुकदमा दायर कराया गया था। डीआरटी ने 8 मार्च 2019 को बैंक के पक्ष में फैसला देते हुए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया। इसके बावजूद बैंक का 2,07,86,807.48 रुपए बकाया बताया गया है। जीशान की मां का निधन, उन पर कार्रवाई नहीं ईओडब्ल्यू के मुताबिक, कंपनी की डायरेक्टर और गारंटर रहीं जीशान अली की मां का निधन हो चुका है। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। जीशान के खिलाफ पिछले साल दिसंबर में भी धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी।

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