7 साल बाद भी नहीं बना SRN का चिल्ड्रन विंग:हाईकोर्ट नाराज, कोर्ट में हुआ तमाशा, एमडी- ठेकेदार के कोर्ट में आरोप

7 साल बाद भी नहीं बना SRN का चिल्ड्रन विंग:हाईकोर्ट नाराज, कोर्ट में हुआ तमाशा, एमडी- ठेकेदार के कोर्ट में आरोप

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल से संबद्ध मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के 200 बेड के चिल्ड्रन विंग का निर्माण 7 साल बाद भी पूरा न होने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शहर के बच्चों के इलाज के लिए बन रहा अस्पताल इतने साल बाद भी बन कर तैयार नहीं हो सका। डॉ. अरविंद गुप्ता की याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने की। याची की ओर से अधिवक्ता आरती अग्रवाल, राहुल अग्रवाल और प्रतिवादियों की ओर से अक्षय गुप्ता, विभु राय, विवेक प्रसाद माथुर उपस्थित रहे। मुख्य सचिव का हलफनामा मुख्य सचिव, यूपी सरकार का दूसरा हलफनामा और प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का 16वां हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग को आवंटित जमीन पर खड़े 21 सरकारी बंगलों को ध्वस्त करने का प्रस्ताव 13.अक्टूबर .2026 को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है। पिछली तारीख के आदेश पर यूपी सिडको के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव सिंह कोर्ट में हाजिर हुए। उनके वकील विवेक प्रसाद माथुर ने उनकी पहचान की। मेसर्स आर सी बी इंफ्राकान्स प्रा लि की ओर से इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की गई। कंपनी के डायरेक्टर रोहित अवस्थी भी कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट में कहा कि ठेकेदार डिफॉल्ट एम डी ने कोर्ट में कहा कि ठेकेदार ने डिफॉल्ट किया और उन्हें अंधेरे में रखा। पहले उन्होंने 30 सितंबर 2026 तक सभी 6 लिफ्ट लगाकर पूरा चिल्ड्रन विंग हैंडओवर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह पूरा नहीं हुआ, इसलिए उन्हें तलब करना पड़ा। ठेकेदार के वकील उदय चंदानी ने कहा कि सिविल वर्क पूरा हो चुका था, लेकिन अगस्त 2025 में विभाग ने अतिरिक्त काम लिफ्ट लगाने और अन्य इलेक्ट्रिकल वर्क करने को कहा। विभाग ने चिट्ठी दी, ठेकेदार ने स्वीकार कर लिया, लेकिन एल ओ आई जारी नहीं हुई और ठेकेदार काम करता रहा। विभाग ने पेमेंट नहीं किया ठेकेदार रोहित अवस्थी ने कहा कि विभाग ने कुछ पेमेंट नहीं किया और मौखिक रूप से काम करने को कहा गया। कोर्ट ने पूछा कि बिना एल ओ आई के क्यों स्वीकार किया, तो कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने बताया कि कंपनी को कल रात ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, इसलिए काम नहीं हो पा रहा। रोहित अवस्थी ने कोर्ट में आश्वासन दिया कि यदि काम करने दिया जाए तो 29.अक्टूबर .2026 तक 2 और लिफ्ट लगा देंगे और बाकी 2 लिफ्ट अगले 15-20 दिन में लगा देंगे। साथ ही केबल बिछाने, फायर एक्सटिंग्विशर और खिड़की के शीशे का काम अगली तारीख तक पूरा कर देंगे। बाहरी दीवारें बारिश से गीली हैं, सूखने पर फाइनल कोट और पेंट कर देंगे। अवस्थी ने कहा कि यदि ब्लैकलिस्टिंग आदेश को स्थगित रखा जाए तो वह काम जारी रखेंगे और 15 दिन में पूरा करने की कोशिश करेंगे। पेमेंट का विवाद वह विभाग से अलग उठाएंगे लेकिन काम नहीं रोकेंगे। ठेकेदार ने जानबूझकर मामला लटकाया एम डी संजीव सिंह ने जवाब में कहा कि ठेकेदार ने जानबूझकर मामला लटकाया है। लगभग पूरा भुगतान हो चुका है, सिर्फ 50 लाख रुपये रिजर्व फंड में रोका गया है, जबकि पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 30 करोड़ है। विभाग ने ओ टी आई एस कंपनी से संपर्क किया, लेकिन वह भी लिफ्ट सप्लाई की टाइमलाइन नहीं दे पा रही। उन्हें भरोसा नहीं कि ठेकेदार 15 दिन में 2 लिफ्ट भी लगा पाएगा। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा कि – “मैं यह देखकर हैरान हूं कि किस तरह एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उसका ठेकेदार खुले कोर्ट में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। यह बिल्डिंग पिछले सात साल से बन रही है, जो प्रयागराज शहर के लोगों की चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के लिए है।” कोर्ट ने कहा मानीटरिंग हो रही “मैं पिछले डेढ़ साल से इस केस की मॉनिटरिंग कर रहा हूं, लेकिन दोनों ने ही राज्य सरकार को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में निराश किया है। यह सिर्फ 200 बेड की बिल्डिंग है जो शहर के बच्चों के इलाज के लिए बननी थी। कोर्ट ने ठेकेदार को एक मौका देते हुए 15 दिन का समय दिया है दो और लिफ्ट लगाने, केबल बिछाने, फायर एक्सटिंग्विशर और खिड़की-शीशे लगाने का काम पूरा करने के लिए। कोर्ट ने 15 दिन के लिए कंपनी का ब्लैक लिस्टिंग आदेश स्थगित कर दिया है। याचिका की सुनवाई 29.अक्टूबर .2026 को दोपहर 2:00 बजे होगी। उस दिन एम डी और ठेकेदार रोहित अवस्थी दोनों कोर्ट में हाजिर रहेंगे और किए गए प्रयासों का हलफनामा दाखिल करेंगे।

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