बक्सर जिले के चौसा बाजार में रामलीला मंच पर तालाबंदी का विवाद दूसरे दिन भी जारी है। नगर पंचायत कर्मी ताला खोलने चाबी लेकर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने मना कर दिया। वे कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) रानी कुमारी को मौके पर बुलाकर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग पर अड़े हैं। इस विवाद के चलते 102 साल पुरानी रामलीला परंपरा पर असर पड़ा है और मंगलवार को मंचन नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि 1925 से यहां रामलीला होती आ रही है। ईओ द्वारा मंच पर ताला लगाने से उनकी धार्मिक आस्था और पुरानी परंपरा प्रभावित हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि सिर्फ चाबी भेजने से बात नहीं बनेगी, ईओ को खुद आकर माफी मांगनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईओ माफी नहीं मांगती हैं, तो वे चौसा-कोचस स्टेट हाईवे जाम करेंगे। इससे विवाद और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। रामलीला प्रभावित करने का नहीं था मकसद इस मामले में कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने पहले सफाई देते हुए कहा था कि वह सनातन विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार, संबंधित भवन साक्षरता भवन है और सार्वजनिक उपयोग के लिए ही है। बाजार में नाली निर्माण का निरीक्षण करने के दौरान वह भवन के अंदर जाना चाहती थीं, लेकिन चाबी नहीं मिलने पर उन्होंने अलग से ताला लगा दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि विवाद की जानकारी मिलने पर कर्मी को ताला खोलने के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल, एक ओर नगर पंचायत भवन में काम कराने की बात कह रहा है, तो दूसरी ओर ग्रामीण रामलीला के बीच तालाबंदी को लेकर नाराज हैं। 102 साल पुरानी रामलीला का मंचन रुकने और हाईवे जाम की चेतावनी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच इस विवाद का समाधान कैसे निकलेगा। बक्सर जिले के चौसा बाजार में रामलीला मंच पर तालाबंदी का विवाद दूसरे दिन भी जारी है। नगर पंचायत कर्मी ताला खोलने चाबी लेकर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने मना कर दिया। वे कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) रानी कुमारी को मौके पर बुलाकर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग पर अड़े हैं। इस विवाद के चलते 102 साल पुरानी रामलीला परंपरा पर असर पड़ा है और मंगलवार को मंचन नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि 1925 से यहां रामलीला होती आ रही है। ईओ द्वारा मंच पर ताला लगाने से उनकी धार्मिक आस्था और पुरानी परंपरा प्रभावित हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि सिर्फ चाबी भेजने से बात नहीं बनेगी, ईओ को खुद आकर माफी मांगनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईओ माफी नहीं मांगती हैं, तो वे चौसा-कोचस स्टेट हाईवे जाम करेंगे। इससे विवाद और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। रामलीला प्रभावित करने का नहीं था मकसद इस मामले में कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने पहले सफाई देते हुए कहा था कि वह सनातन विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार, संबंधित भवन साक्षरता भवन है और सार्वजनिक उपयोग के लिए ही है। बाजार में नाली निर्माण का निरीक्षण करने के दौरान वह भवन के अंदर जाना चाहती थीं, लेकिन चाबी नहीं मिलने पर उन्होंने अलग से ताला लगा दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि विवाद की जानकारी मिलने पर कर्मी को ताला खोलने के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल, एक ओर नगर पंचायत भवन में काम कराने की बात कह रहा है, तो दूसरी ओर ग्रामीण रामलीला के बीच तालाबंदी को लेकर नाराज हैं। 102 साल पुरानी रामलीला का मंचन रुकने और हाईवे जाम की चेतावनी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच इस विवाद का समाधान कैसे निकलेगा।

