‘बच्ची मेरी नहीं, रिस्क भी मेरा नहीं; पैसे ले लो’:स्कूल में छात्रा को करंट लगने के बाद प्रिंसिपल का जवाब, बच्ची का हाथ काटना पड़ सकता

‘बच्ची मेरी नहीं, रिस्क भी मेरा नहीं; पैसे ले लो’:स्कूल में छात्रा को करंट लगने के बाद प्रिंसिपल का जवाब, बच्ची का हाथ काटना पड़ सकता

मुजफ्फरपुर के अहियारपुर स्थित रायकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 9 अक्टूबर को 7वीं की छात्रा को करंट लगा था। 11 हजार वोल्ट के तार से झुलस गई थी। डॉक्टर कहते हैं कि अगर उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उसका दाहिना हाथ काटना पड़ सकता है। पीड़ित छात्रा संध्या की मां अनु देवी ने स्कूल प्रबंधन पर कई आरोप लगाए हैं। अनु ने कहा कि मैंने प्रिंसिपल पांडव राय से मुलाकात की। अनु का आरोप है कि प्रिंसिपल कहते हैं कुछ पैसे लेकर मामले को रफा-दफा कीजिए। प्रिंसिपल ने कहा है कि बच्ची मेरी नहीं है। इसलिए रिस्क भी मेरा नहीं। बेटी दर्द से परेशान थी, शिक्षकों ने फोन नहीं उठाया अनु देवी के मुताबिक, मंगलवार की सुबह प्रिंसिपल 4 शिक्षकों के साथ बच्ची को देखने घर पहुंचे थे। इस दौरान मैंने शिक्षकों को संध्या की गंभीर स्थिति के बारे में बताया। बेटी रातभर दर्द से चिल्लाती रही और बार-बार बेहोश हो रही थी। मैंने शिक्षकों को बताया कि बच्ची की हालत बेहद गंभीर है, लेकिन रात में फोन करने के बावजूद किसी शिक्षक ने कॉल नहीं उठाया। सुबह शिक्षक पहुंचे और बच्ची के खाने-पीने और दवा के बारे में पूछा।
‘हाथ कट गया तो बेटी का भविष्य कैसे बचेगा’ अनु देवी को अब सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि कहीं बेटी का दाहिना हाथ न काटना पड़े। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने स्थिति में सुधार नहीं होने पर हाथ काटने की आशंका जताई है। अगर ऐसा हुआ तो बेटी अपना रोजमर्रा का काम कैसे करेगी और पढ़ाई कैसे जारी रख पाएगी। मां को उसके भविष्य और शादी की भी चिंता सता रही है। अनु देवी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन को संध्या के इलाज और भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उनका आरोप है कि घटना के बाद स्कूल का रवैया लापरवाही भरा रहा। मां ने यह भी दावा किया कि बेटी का नाम स्कूल के रिकॉर्ड से अलग करवाया गया है। अस्पताल में भर्ती कराने के दौरान संध्या का नाम संजना दर्ज किया गया। करंट से नसें क्षतिग्रस्त 9 अक्टूबर को स्कूल में 11 हजार वोल्ट तार से 2 छात्राएं झुलस गई थीं। इनमें नंदिनी की हालत में सुधार होने के बाद सोमवार को एसकेएमसीएच से छुट्टी दे दी गई। वहीं, संध्या का बर्न एंड प्लास्टिक विभाग में इलाज चल रहा है। विभाग के डॉ. राधा रमन के अनुसार, तेज करंट सीधे हाथ में लगने से नसें और अंदरूनी ऊतक क्षतिग्रस्त हुए हैं। हाथ में सूजन और दबाव बढ़ने की स्थिति को कम्पार्टमेंट सिंड्रोम कहा जाता है। इससे निपटने के लिए संध्या के हाथ की फेशियोटॉमी सर्जरी की गई है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर रक्त संचार सामान्य नहीं हुआ और स्थिति में सुधार नहीं आया, तो संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हाथ काटना पड़ सकता। अभी बात नहीं कर सकते- प्रिंसिपल इस मामले में स्कूल के प्रिंसिपल पांडव राय से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि अभी इस मामले में कुछ बात नहीं कर सकते, कल बात करेंगे। इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। मां की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष नहीं मिल सका है।
स्कूल के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का तार स्कूल के ऊपर से 11 हजार वोल्ट का बिजली तार गुजर रहा है। घायल छात्रा स्कूल की छत पर गई थी। वहां दीवार पर हाथ रखते ही उसे जोरदार करंट लगा और वह नीचे गिर गई। उसके साथ मौजूद दूसरी छात्रा भी चिल्लाने लगी। इसके बाद श्रुति नाम की छात्रा ने उन्हें नीचे लाने में मदद की। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरातफरी मच गई। मुजफ्फरपुर के अहियारपुर स्थित रायकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 9 अक्टूबर को 7वीं की छात्रा को करंट लगा था। 11 हजार वोल्ट के तार से झुलस गई थी। डॉक्टर कहते हैं कि अगर उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उसका दाहिना हाथ काटना पड़ सकता है। पीड़ित छात्रा संध्या की मां अनु देवी ने स्कूल प्रबंधन पर कई आरोप लगाए हैं। अनु ने कहा कि मैंने प्रिंसिपल पांडव राय से मुलाकात की। अनु का आरोप है कि प्रिंसिपल कहते हैं कुछ पैसे लेकर मामले को रफा-दफा कीजिए। प्रिंसिपल ने कहा है कि बच्ची मेरी नहीं है। इसलिए रिस्क भी मेरा नहीं। बेटी दर्द से परेशान थी, शिक्षकों ने फोन नहीं उठाया अनु देवी के मुताबिक, मंगलवार की सुबह प्रिंसिपल 4 शिक्षकों के साथ बच्ची को देखने घर पहुंचे थे। इस दौरान मैंने शिक्षकों को संध्या की गंभीर स्थिति के बारे में बताया। बेटी रातभर दर्द से चिल्लाती रही और बार-बार बेहोश हो रही थी। मैंने शिक्षकों को बताया कि बच्ची की हालत बेहद गंभीर है, लेकिन रात में फोन करने के बावजूद किसी शिक्षक ने कॉल नहीं उठाया। सुबह शिक्षक पहुंचे और बच्ची के खाने-पीने और दवा के बारे में पूछा।
‘हाथ कट गया तो बेटी का भविष्य कैसे बचेगा’ अनु देवी को अब सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि कहीं बेटी का दाहिना हाथ न काटना पड़े। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने स्थिति में सुधार नहीं होने पर हाथ काटने की आशंका जताई है। अगर ऐसा हुआ तो बेटी अपना रोजमर्रा का काम कैसे करेगी और पढ़ाई कैसे जारी रख पाएगी। मां को उसके भविष्य और शादी की भी चिंता सता रही है। अनु देवी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन को संध्या के इलाज और भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उनका आरोप है कि घटना के बाद स्कूल का रवैया लापरवाही भरा रहा। मां ने यह भी दावा किया कि बेटी का नाम स्कूल के रिकॉर्ड से अलग करवाया गया है। अस्पताल में भर्ती कराने के दौरान संध्या का नाम संजना दर्ज किया गया। करंट से नसें क्षतिग्रस्त 9 अक्टूबर को स्कूल में 11 हजार वोल्ट तार से 2 छात्राएं झुलस गई थीं। इनमें नंदिनी की हालत में सुधार होने के बाद सोमवार को एसकेएमसीएच से छुट्टी दे दी गई। वहीं, संध्या का बर्न एंड प्लास्टिक विभाग में इलाज चल रहा है। विभाग के डॉ. राधा रमन के अनुसार, तेज करंट सीधे हाथ में लगने से नसें और अंदरूनी ऊतक क्षतिग्रस्त हुए हैं। हाथ में सूजन और दबाव बढ़ने की स्थिति को कम्पार्टमेंट सिंड्रोम कहा जाता है। इससे निपटने के लिए संध्या के हाथ की फेशियोटॉमी सर्जरी की गई है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर रक्त संचार सामान्य नहीं हुआ और स्थिति में सुधार नहीं आया, तो संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हाथ काटना पड़ सकता। अभी बात नहीं कर सकते- प्रिंसिपल इस मामले में स्कूल के प्रिंसिपल पांडव राय से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि अभी इस मामले में कुछ बात नहीं कर सकते, कल बात करेंगे। इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। मां की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष नहीं मिल सका है।
स्कूल के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का तार स्कूल के ऊपर से 11 हजार वोल्ट का बिजली तार गुजर रहा है। घायल छात्रा स्कूल की छत पर गई थी। वहां दीवार पर हाथ रखते ही उसे जोरदार करंट लगा और वह नीचे गिर गई। उसके साथ मौजूद दूसरी छात्रा भी चिल्लाने लगी। इसके बाद श्रुति नाम की छात्रा ने उन्हें नीचे लाने में मदद की। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरातफरी मच गई।  

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