(फाइल फोटो सहित)
चेन्नई, 10 अक्टूबर अभिनेता से नेता बने और राज्यसभा सदस्य कमल हासन ने भारत में स्टारलिंक को कथित तौर पर नियामकीय मंजूरी मिलने में देरी को लेकर अमेरिकी कारोबारी और स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि ‘‘किसी भी अरबपति को किसी देश की नीति तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।’’
हासन ने कहा कि भारत जानता है कि दूरसंचार नेटवर्क और स्पेक्ट्रम रणनीतिक बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं, न कि केवल व्यावसायिक संपत्ति। उन्होंने जोर दिया कि ‘‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सुरक्षा उपायों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।’’
हासन ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मस्क, किसी भी अरबपति को किसी देश की नीति तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत को सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भारतीय और वैश्विक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का स्वागत करना चाहिए। जो भी कंपनी दूरदराज के इलाकों में लोगों तक इंटरनेट पहुंचाने का सबसे व्यावहारिक और किफायती समाधान दे, उसे मौका मिलना चाहिए।’’
हासन ने कहा, ‘‘प्रति व्यक्ति आय कम होने वाले देशों में सैटेलाइट इंटरनेट किफायती भी होना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि अधिक सदस्यता शुल्क और उपकरणों की ऊंची कीमतों के कारण आम परिवारों के लिए सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।
हासन ने कहा कि इंटरनेट कनेक्टिविटी का उद्देश्य डिजिटल खाई को पाटना होना चाहिए, न कि एक नयी खाई पैदा करना। हासन ने कहा कि हर देश अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिमी देशों को घरेलू स्तर पर संरक्षणवादी नीतियां अपनाते हुए मुक्त बाजार की वकालत नहीं करनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका ने अपने घरेलू उद्योग को संरक्षण देने के लिए चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया है, ठीक उसी तरह जैसे भारत अपने घरेलू निर्माताओं के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत और अमेरिका, दोनों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण हुआवेई पर प्रतिबंध लगाए हैं।
कोई देश केवल तभी दूसरों से समान अवसर की मांग नहीं कर सकता, जब यह उसके अपने हितों के अनुकूल हो।’’
उन्होंने कहा कि भारत के लोग एक लोकतांत्रिक देश के रूप में अपनी खूबियों और कमियों पर आपस में चर्चा करेंगे, सवाल उठाएंगे और उन्हें दूर करने के उपाय करेंगे। हासन ने कहा, ‘‘भारत एक लोकतंत्र है, कोई उपनिवेश नहीं। हम दुनिया का स्वागत करते हैं, लेकिन अपने भविष्य का फैसला हम भारतीय खुद करेंगे, न कि पश्चिमी देशों के निहित स्वार्थ, उनके दोहरे मापदंड या कोई अरबपति, चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी।

