Operation Sindoor के बाद पहली बार भारत ने किया सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास, 40 देशों की Airforce को सामने देख Rajnath Singh ने दे दिया बड़ा संदेश

Operation Sindoor के बाद पहली बार भारत ने किया सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास, 40 देशों की Airforce को सामने देख Rajnath Singh ने दे दिया बड़ा संदेश

दुनिया के समुद्री व्यापार मार्गों और सामरिक समुद्री संकरे रास्तों पर बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों और अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग का स्पष्ट संदेश दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज बहुराष्ट्रीय वायु सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के दौरान चेतावनी दी कि महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों, समुद्री संचार लाइनों और संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट्स को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ा रही है। उनका संदेश स्पष्ट था कि बदलते युद्धक्षेत्र में केवल सैन्य संख्या नहीं, तकनीकी श्रेष्ठता और साझा कार्रवाई निर्णायक होगी।

हम आपको बता दें कि 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक आयोजित दो सप्ताह के इस अभ्यास में 40 देशों ने भाग लिया। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों की वायु सेनाओं ने अपने विमान और सैन्यकर्मी भेजे। अमेरिकी वायु सेना के F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान की भारतीय जमीन पर किसी सैन्य अभ्यास में पहली भागीदारी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। भारतीय वायु सेना ने राफेल और सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों के साथ अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, जबकि फ्रांस ने भी राफेल विमानों के साथ अभ्यास में हिस्सा लिया।

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ऑपरेशन सिंदूर के सबक, युद्ध की नई तैयारी

हम आपको बता दें कि तरंग शक्ति भारतीय वायु सेना की ओर से मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी एयरबेस पर की गई कार्रवाइयों के बाद इस स्तर का पहला बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास है। अधिकारियों के अनुसार, उस अभियान से मिले परिचालन सबकों को अभ्यास में शामिल किया गया है। पांच समीपवर्ती वायुसेना अड्डों को सक्रिय कर भाग लेने वाली सेनाओं को अलग-अलग ठिकानों से संचालित दो टीमों में बांटा गया, ताकि वास्तविक संघर्ष जैसी परिस्थितियां बनाई जा सकें। इस अभ्यास में बड़े पैमाने पर हवाई मुकाबले, महत्वपूर्ण हवाई संसाधनों का संचालन, सैन्य हवाई परिवहन, ड्रोन अभियान, वायु रक्षा, गतिशील लक्ष्य निर्धारण और युद्धक खोज एवं बचाव अभियान शामिल रहे। इसका उद्देश्य अलग-अलग विमानों, सैन्य प्रणालियों और संचालन पद्धतियों के बीच तालमेल विकसित करना था।

ड्रोन, एआई और अंतरिक्ष: युद्ध की बदलती परिभाषा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष, साइबर क्षेत्र, विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम और सूचना क्षेत्र भी संघर्ष के प्रमुख मोर्चे बन चुके हैं। ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों ने सैन्य अभियानों की गति, विस्तार और स्वरूप बदल दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है, जबकि लंबी दूरी के सटीक मारक हथियार युद्धक्षेत्र का दायरा बढ़ा रहे हैं। गैर-राज्य तत्वों की बढ़ती भूमिका और अचानक पैदा होने वाले खतरे इस चुनौती को और जटिल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि, भविष्य की सैन्य शक्ति का आकलन केवल लड़ाकू विमानों और हथियारों की संख्या से नहीं होगा, बल्कि इस क्षमता से होगा कि कोई सेना कितनी तेजी से स्थिति को पहचानती है, सूचनाओं को समझती है, निर्णय लेती है और सटीक कार्रवाई करती है।

आत्मनिर्भरता ही दीर्घकालिक युद्ध की असली ताकत

रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि कोई देश अपने हथियारों और महत्वपूर्ण तकनीकों के उत्पादन की क्षमता के बिना लंबे युद्ध को टिकाऊ ढंग से नहीं लड़ सकता। भारत का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्नत विमान इंजन के विकास और सह-उत्पादन पर जोर भी इसी रणनीति का हिस्सा है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग-थलग होना नहीं है। भविष्य की रक्षा साझेदारियां केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अनुसंधान, संयुक्त विकास, सह-उत्पादन, रखरखाव, प्रशिक्षण और नवाचार पर आधारित होंगी। तकनीक और विश्वास इन साझेदारियों की बुनियाद होंगे।

रणनीतिक संदेश: तैयारी, साझेदारी और प्रतिरोधक क्षमता

देखा जाये तो तरंग शक्ति का सामरिक महत्व केवल हवाई अभ्यास तक सीमित नहीं है। यह भारत को मित्र देशों के साथ संचालनगत तालमेल बढ़ाने, उन्नत सैन्य तकनीकों से परिचित होने और संभावित बहुक्षेत्रीय संघर्षों की तैयारी का अवसर देता है।

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