Parineeti Chopra Statement: परिणीति चोपड़ा अपनी फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’ को लेकर चर्चा में हैं।फिल्म बालू माफिया की दुनिया पर आधारित है, जिसमें एक पत्रकार और कैमरामैन मिलकर इस नेटवर्क के राज सामने लाने की कोशिश करते हैं। आरजे श्रुति से बातचीत में परिणीति ने फिल्म की कहानी के बारे में बताया। वहीं, अपनी पहली ओटीटी सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ और मां बनने के बाद काम व परिवार के बीच संतुलन बनाने की चुनौतियों पर भी बात की।
परिणीति की मिस्ट्री थ्रिलर सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ 24 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी। एक्ट्रेस ने बताया कि सीरीज की स्क्रिप्ट उन्हें इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने इसे महज दो घंटे में पढ़ लिया। वह ऐसा थ्रिलर करना चाहती थीं, जिसे दर्शक एक साथ बैठकर देख सकें।
बालू माफिया के राज खोलेगी ‘रिपोर्टिंग लाइव’
अपनी फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’ के बारे में बात करते हुए परिणीति ने बताया कि इसकी कहानी बालू माफिया पर आधारित है। फिल्म में एक पत्रकार और कैमरामैन मिलकर इस दुनिया से जुड़े राज उजागर करते हैं। हालांकि, बातचीत में फिल्म के किरदार और कहानी से जुड़ी अन्य जानकारी विस्तार से साझा नहीं की गई।
सोशल मीडिया पत्रकारों को दी सलाह
परिणीति ने कहा कि फिल्म क्रिटिक्स को प्रभावित करना मुश्किल होता है। सोशल मीडिया पर खबरें साझा करने वाले पत्रकारों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें केवल सत्यापित तथ्यों के आधार पर रिपोर्टिंग करनी चाहिए, अफवाहें फैलाने से बचना चाहिए और सिर्फ व्यूज के पीछे नहीं भागना चाहिए।
ओटीटी पर काम करना फिल्मों से ज्यादा मुश्किल
परिणीति ने ओटीटी पर अपने अनुभव के बारे में बताया कि वेब सीरीज में किरदार की निरंतरता बनाए रखना फिल्मों के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। उनकी सीरीज में सात एपिसोड हैं और शूटिंग कहानी के क्रम में नहीं होती। ऐसे में हर सीन के दौरान कलाकार को याद रखना पड़ता है कि किरदार किस भावनात्मक स्थिति में है।
एक्ट्रेस ने कहा कि जब उन्हें ‘शक’ की स्क्रिप्ट मिली, तो उन्होंने इसे दो घंटे में पूरा पढ़ लिया था। वह ऐसा थ्रिलर करना चाहती थीं, जिसे दर्शक एक बार में देखने के लिए उत्साहित हों। परिणीति के मुताबिक, ओटीटी पर रिलीज का अनुभव भी फिल्मों से अलग है। फिल्मों में पहले शुक्रवार और शुरुआती वीकेंड को लेकर दबाव रहता है, जबकि ओटीटी पर दर्शक अपनी सुविधा के अनुसार शो देख सकते हैं। इसके अलावा, सीरीज को दुनियाभर में एक साथ रिलीज किए जाने का अनुभव भी उनके लिए खास रहा।
राजनीतिक एंगल की कमी दिख रही है फिल्म में
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विषय है। अवैध रेत खनन जैसे गंभीर मुद्दे को बड़े पर्दे पर बहुत कम दिखाया गया है, लेकिन इस फिल्म में इसे बेबाकी से उठाया गया है। अवैध खनन के साथ-साथ पत्रकारिता के दौरान आने वाली चुनौतियों को भी प्रभावी ढंग से पेश किया गया है। हालांकि, कमजोर स्क्रीनप्ले और कहानी के प्रेडिक्टेबल होने की वजह से फिल्म का रोमांच कुछ हद तक कम हो जाता है। कुछ चुनिंदा दृश्यों में ही तनाव महसूस होता है।
फिल्म में राजनीतिक एंगल की कमी भी खलती है, जबकि अवैध रेत खनन जैसे मुद्दे पर बनी कहानी में यह पहलू अहम हो सकता था। वहीं, 1 घंटे 56 मिनट का रनटाइम इसकी एक खासियत है। फिल्म बेवजह कहानी को खींचने के बजाय सीधे मुद्दे पर आती है।
हालांकि, कहानी में कुछ अप्रत्याशित मोड़ और ट्विस्ट जोड़े जाते, तो इसे और दिलचस्प बनाया जा सकता था। कुल मिलाकर, अलग और जरूरी मुद्दे पर बनी परिणीति चोपड़ा की यह इन्वेस्टिगेटिव क्राइम थ्रिलर एक बार देखी जा सकती है।


